कॉम्बैट खिलाड़ियों के लिए मुकाबला सिर्फ रिंग या मैट पर कदम रखने के बाद ही शुरू नहीं होता, बल्कि असली मुकाबला तो इससे पहले शुरू होता है और हर खिलाड़ी इस बात को बखूबी जानता है. एशियन गेम्स 2026 से बाहर होने वाले मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइटर वरुण सान्याल भी यह बात जानते हैं. सान्याल का एशियन गेम्स में सफर सही से शुरू होने से ठीक पहले अचानक खत्म हो गया, क्योंकि क्वार्टर-फाइनल मुकाबले से पहले उन्हें मेडिकल तौर पर अनफिट घोषित कर दिया गया. बताया जा रहा है कि सान्याल वजन कम करने की कोशिश के दौरान सॉना में बेहोश हो गए थे. इस सेशन के लगभग 30 मिनट बाद उन्हें हल्का सिरदर्द, चक्कर आना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी तकलीफें हुईं. मेडिकल जांच में हल्की डिहाइड्रेशन का पता चला और उनके ब्लड टेस्ट में ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) का स्तर नॉर्मल रेंज के ऊपरी छोर पर पाया गया.
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इस घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया कि कॉम्बैट खिलाड़ी वजन कैटेगरी में फिट होने के लिए किस हद तक जा सकते हैं. 2024 पेरिस ओलिंपिक में भी ऐसी ही एक घटना देखने को मिली थी, जब विनेश फोगाट ने अपने फाइनल मुक़ाबले से पहले सौ ग्राम वजन कम करने के लिए स्वेटसूट पहनकर स्किपिंग और जॉगिंग की और अपने बाल भी कटवाए, लेकिन फिर भी वह वजन के पैमाने पर खरी नहीं उतर सकीं. हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार स्पोर्ट्स साइंटिस्ट निखिल लाटे का कहना है कि तेजी से वजन घटाने का सबसे तेज और आम तरीका डिहाइड्रेशन है. अगर पहले से ही बहुत ज़्यादा डिहाइड्रेटेड हैं और सॉना में बैठते हैं तो ब्लड प्रेशर गिर जाता है, जिससे बेहोशी छा सकती है.किडनी पर पड़ने वाले ज़्यादा दबाव से ब्लड यूरिया का लेवल भी बढ़ सकता है.
वजन क्यों और कैसे कम करते हैं?
वेट-इन (वज़न की जांच) से पहले एथलीट जॉगिंग करते हैं, कई परत वाले कपड़े पहनते हैं, कार्डियो करते हैं, भारी कंबल ओढ़कर सोते हैं या सॉना में बैठते हैं ताकि शरीर का पानी कम हो सके, क्योंकि इस तरीके से फ़ैट, कार्बोहाइड्रेट या मसल्स तेज़ी से बर्न नहीं होते.इससे वज़न तो कम हो जाता है, लेकिन शरीर पर बहुत ज़्यादा दबाव भी पड़ता है. एशियन गेम्स के दौरान कई एथलीट इस प्रक्रिया से गुजरते हैं क्योंकि वे रेसलिंग, जूडो, MMA, वुशु, बॉक्सिंग और ताइक्वांडो जैसे कॉम्बैट स्पोर्ट्स में हिस्सा लेते हैं.
निखिल लाटे ने कहा कि अगर आप 52 किग्रा कैटेगरी में हिस्सा ले रहे हैं और आपका सामान्य वजन 56kg है, तो आपको लगभग चार किलो वज़न कम करना होगा. एक रात में इतना वजन कम करना नामुमकिन होता है.बेहतर तरीका यह है कि वजन कम करने की प्रक्रिया जल्दी शुरू की जाए और इसे धीरे-धीरे किया जाए.4 किलो वजन कम करने के लिए लगभग तीन सप्ताह का समय लेना चाहिए, जिसमें हर सप्ताह लगभग 1 से 1.25 किलो वज़न कम करने का लक्ष्य हो, न कि मुक़ाबले से ठीक पहले कई किलो वजन कम करने की कोशिश की जाए.
नुकसान जानते हुए भी तेजी से वजन कम क्यों करते हैं खिलाड़ी
अगर तेजी से वजन कम करने के असर के बारे में सबको पता है, तो भी कॉम्बैट स्पोर्ट के एथलीट ऐसा क्यों करते हैं? धीरे-धीरे वजन कम करने की प्रक्रिया में एथलीट अपने ट्रेनिंग कैंप का ज़्यादातर समय कैलोरी की कमी (यानी अपनी ज़रूरत से कम कैलोरी लेना) में बिताता है, जिससे वह थक सकता है और कमज़ोर हो सकता है. लाटे ने आगे कहा कि जब जल्दी वज़न कम करना शुरू करते हैं, तो कमजोरी आ जाती है.कैलोरी की कमी से एनर्जी कम हो जाती है, जिसका असर ट्रेनिंग, कॉन्फिडेंस और आक्रामकता पर पड़ता है. इसीलिए कोच और एथलीट इसे टालने की कोशिश करते हैं.भले ही उन्हें पता हो कि आख़िरकार उन्हें वजन कम करना ही होगा.
वे-इन के बाद तेजी से पानी की कमी पूरी करने से शरीर में खून की मात्रा तो ठीक हो जाती है, लेकिन शरीर के टिशू से निकले सारे तरल पदार्थ (fluid) को दोबारा भरने में ज़्यादा समय लगता है. गंभीर डिहाइड्रेशन से मांसपेशियों के काम करने की क्षमता, ध्यान लगाने की शक्ति और शारीरिक परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है, जबकि डिहाइड्रेशन और थकान दोनों मिलकर चोट लगने का ख़तरा बढ़ा सकते हैं. उम्र बढ़ने पर इसके ज्यादा गंभीर असर देखने को मिल सकती है.बार-बार गंभीर डिहाइड्रेशन होने से किडनी और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर दबाव पड़ता है और मांसपेशियों के काम करने की क्षमता काफ़ी कम हो जाती है.
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