भारतीय खिलाड़ियों ने हाल में आइची नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में कमाल का प्रदर्शन किया. आइची- नागोया में भारत ने 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज समेत कुल 85 मेडल जीते. भारत की शानदार सफलता में एक बड़ा योगदान भारतीय जवानों का भी रहा. एशियन गेम्स 2026 में भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए कुल 20 मेडल जीते, जिसमें छह गोल्ड, आठ सिल्वर और छह ब्रॉन्ज मेडल है यानी भारत के कुल 85 मेडल में से लगभग एक-चौथाई और देश के 21 गोल्ड मेडल में से लगभग 29 प्रतिशत मेडल सेना के खिलाड़ियों ने ही जीते. सेना के छह गोल्ड पिछले एशियन गेम्स में जीते गए गोल्ड मेडल की संख्या से दोगुने थे.
ADVERTISEMENT
हरमनप्रीत ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड जीतने के बाद छोड़ी कप्तानी
एशियाड में बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों में भारतीय सेना के नायब सूबेदार गुलवीर सिंह शामिल थे, जिन्होंने एथलेटिक्स में तीन व्यक्तिगत मेडल जीते. उन्होंने 1500 मीटर और 10,000 मीटर में सिल्वर और 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीता. वहीं नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने शूटिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता. इसमें 28 के एशियाई-रिकॉर्ड स्कोर के साथ महिलाओं का व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट का खिताब भी शामिल था, जिससे वह ट्रैप में व्यक्तिगत एशियाई खेल गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. हवलदार सावन बरवाल ने नेशनल रिकॉर्ड के साथ मैराथन में सिल्वर मेडल जीता और इस इवेंट में मेडल के लिए भारत के 44 साल के इंतजार को खत्म किया, जबकि नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने 56 साल के अंतराल के बाद हाई-जंप में सिल्वर मेडल जीता.
मेडल जीतने वाले भारतीय सेना के खिलाड़ी
नायब सूबेदार सलमान खान ने सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुषों के डबल स्कल्स इवेंट में भारत के लिए पहला एशियाड मेडल जीता. सूबेदार धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुषों की रिकर्व तीरंदाजी में नेशनल और एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड बनाए, जबकि हवलदार कमलजीत सिंह ने सुरुचि सिंह के साथ मिलकर मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 484.6 के एशियाई खेल रिकॉर्ड स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता.भारतीय सेना के 62 खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स 2026 में 15 इवेंट में हिस्सा लिया था.
| नाम | खेल | मेडल |
| नायब सूबेदार नीरू ढांडा | शूटिंग ट्रैप | 2 गोल्ड और एक सिल्वर |
| हवलदार कमलजीत | 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग | गोल्ड |
| हवलदार अंकुश पंघाल | बॉक्सिंग 80 किग्रा | गोल्ड |
| सूबेदार सूरज करकेरा | हॉकी | गोल्ड |
| हवलदार देवांग, हवलदार राहुल और हवलदार अंकित | कबड्डी | गोल्ड |
| नायब सूबेदार गुलवीर सिंह | एथलेटिक्स | दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज |
| सूबेदार धीरज बोम्मादेवरा | रिकर्व आर्चरी | दो सिल्वर |
| और मानु फ्रासिंस | सेलिंग | सिल्वर |
| हवलदार मनीषा कीर | ट्रैप शूटिंग | सिल्वर |
| हवलदार सवाल बरवाल | मैराथन | सिल्वर |
| नायब सूबेदार सर्वेश कुशारा | हाई जम्प | सिल्वर |
| नायब सूबेदार सलमान खान | रोइंग | ब्रॉन्ज |
| सूबेदार नरेंद्र बेरवाल | बॉक्सिंग | ब्रॉन्ज |
| हवलदार धर्मवीर चौधरी | एथलेटिक्स | ब्रॉन्ज |
| हवलदार कपिल | बॉक्सिंग | ब्रॉन्ज |
| सूबेदार दीपक पूनिया | रेसलिंग | ब्रॉन्ज |
मिशन ओलिंपिक्स विंग हाथ
भारतीय सेना के खिलाड़ियों की एशियन गेम्स 2026 में सफलता में पीछे मिशन ओलिंपिक्स विंग' (MOW) का सबसे बड़ा हाथ है. जो डायरेक्टर जनरल इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग (DGIT) के व्यापक ट्रेनिंग ढांचे के तहत काम करता है. 'मिशन ओलंपिक्स' 2001 में शुरू हुआ था और उसके बाद से सेना ने खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें खास कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग, न्यूट्रिशन, रिकवरी, मेंटल कंडीशनिंग और इंटरनेशनल एक्सपोज़र देने के लिए एक व्यवस्थित सिस्टम तैयार किया है. इसका मकसद टैलेंट को टॉप लेवल के इंटरनेशनल प्रदर्शन तक एक लगातार चलने वाला रास्ता बनाना है. इस सिस्टम का एक अहम हिस्सा पुणे में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट' (ASI) है, जिसे एक जुलाई 2001 को 'मिशन ओलिंपिक्स' प्रोग्राम के तहत शुरू किया गया था. यह तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, डाइविंग, फेंसिंग, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती जैसे खेलों में व्यवस्थित ट्रेनिंग, प्रोफेशनल कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस से जुड़ी मदद, इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का मौका और खास इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं देता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार सेना के 28 स्पोर्ट्स नोड्स में लगभग 9 हजार खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें 18 बॉयज स्पोर्ट्स कंपनी, दो गर्ल्स स्पोर्ट्स कंपनी और एक खास पैरालिंपिक नोड का सहयोग मिला है.
पिछली बार की तुलना में कम गोल्ड
भारत ने पिछले एशियन गेम्स यानी हांगझोऊ 2022 में 28 गोल्ड मेडल जीते थे, मगर इस बार आइची-नागोया में यह गोल्ड घट गए. भारत सिर्फ 21 ही गोल्ड जीत पाया. पिछले 28 में से भारत इस बार सिर्फ आठ खिताब बचाने में कामयाब रहा. यानी 20 खिताब भारत ने गंवा दिए. जबकि 13 गोल्ड अलग खेलों में मिले. पिछले एशियाड में जीते शूटिंग के सभी सात गोल्ड मेडल नागोया में भारत के हाथ से निकल गए, जबकि एथलेटिक्स के सभी छह खिताब भी छिन गए. भारत कंपाउंड आर्चरी में भी अपने दोनों व्यक्तिगत गोल्ड मेडल नहीं बचा पाया. हालांकि भारत ने कंपाउंड टीम आर्चरी के तीनों खिताब, कबड्डी के दोनों गोल्ड, क्रिकेट के दोनों खिताब और पुरुषों की हॉकी का खिताब बचाए रखा. बाकी गोल्ड मेडल अलग-अलग इवेंट्स और खिलाड़ियों से भारत के खाते में जुड़े. कुछ खिलाड़ियों ने हांगझोऊ में सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडल जीता था और जापान में गोल्ड जीता. दूसरों ने उन इवेंट्स में खिताब जीते, जहां भारत पिछले एशियन गेम्स में पोडियम तक भी नहीं पहुंच पाया था.
किस स्थान पर रहा भारत
एशियन गेम्स 2026 के लिए भारत ने कुल 506 एथलीटों का दल भेजा था, जिसमें कुल 85 मेडल जीते और मेडल टैली में भारत चौथे स्थान पर रहा. चीन 341 मेडल के साथ टॉप पर रहा, जबकि जापान 269 मेडल के दूसरे स्थान पर और साउथ कोरिया 150 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर रहा. भारत उज्बेकिस्तान से आगे रहा. उज्बेकिस्तान ने 70 मेडल जीते.
भारत का सबसे युवा गोल्ड मेडलिस्ट
वैभव सूर्यवंशी एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए. भारत ने० पुरुषों के क्रिकेट फ़ाइनल में पाकिस्तान को 19 रनों से हराकर गोल्ड जीता था. उस वक्त सूर्यवंशी 15 साल, छह महीने और सात दिन के थे. उन्होंने शूटर सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड तोड़ा. सौरभ ने 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में पुरुषों के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में जब गोल्ड जीता था, उस समय वह 16 साल, तीन महीने और नौ दिन के थे. इस तरह विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं.
ADVERTISEMENT











