सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन ने भारतीय क्रिकेट टीम में कंपीटिशन को लेकर जरूरी बात कही है. उनका कहना है कि टीम इंडिया को चलाना आसान नहीं है. उन्होंने यह बात उनके और वैभव सूर्यवंशी के बीच ओपनिंग स्लॉट को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के संबंध में कही. सैमसन के प्लेइंग इलेवन में होने से 15 साल के बल्लेबाज को बाहर रहना होता है. उन्होंने पिछले दो साल में टी20 क्रिकेट में कमाल का खेल दिखाया है. इसके चलते हाल ही में भारतीय टीम में जगह मिली. लेकिन सैमसन का प्रदर्शन भी कमाल का रहा है. उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में दोनों में से किसी एक को बाहर रहना होता है.
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भारतीय टीम अभी अफगानिस्तान के साथ टी20 सीरीज खेल रही है. पहले दो मैचों में सैमसन को खेलने का मौका मिला. उन्होंने दूसरे टी20 में 22 गेंद में 57 रन की आतिशी पारी खेली. इससे सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में लेना मुश्किल हो गया. सैमसन ने दूसरे टी20 के बाद सूर्यवंशी के रहने से उन पर पड़ने वाले दबाव के बारे में कहा, 'भारतीय टीम को चलाना आसान नहीं है. आप देखिए 15 साल के एक लड़के ने 700-800 रन बनाए हैं. इस टूर्नामेंट से पहले उसने अच्छा खेल दिखाया. उसे किसी न किसी तरह से तो आना ही है. मुझे लगता है कि मैंने दो या तीन मैच में प्रदर्शन नहीं किया था.'
सैमसन ने आगे कहा,
वह फॉर्म में था और वह टीम को मैच जिताना चाहता था. नेतृत्व के नजरिए से यह बात समझी जा सकती है. मुझे लगता है कि जैसे मैंने पहले कहा मैं ऐसे हालात में रहा हूं. मैंने भी बतौर कप्तान मुश्किल फैसले किए हैं तो मैं समझ सकता है. यहीं पर तो कम्युनिकेशन की जरूरत पड़ती है.
सूर्यवंशी-सैमसन के बीच ओपनिंग स्लॉट के लिए मुकाबला
सूर्यवंशी इस आईपीएल सीजन सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे. इसके बाद उन्हें भारतीय टीम में शामिल करने की मांग हुई. उन्हें आयरलैंड सीरीज से ही टीम इंडिया में जगह दी गई. लेकिन प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के लिए इंतजार करना पड़ा. सूर्यवंशी ने इंग्लैंड सीरीज से डेब्यू किया था. फिर जिम्बाब्वे दौरे पर भी खेले थे. मगर सैमसन के वापस आने पर उन्हें फिर से बाहर जाना पड़ा. अब देखना होगा कि सैमसन और सूर्यवंशी दोनों के लिए किस तरह से जगह बनती है.
सैमसन ने लीडरशिप ग्रुप की क्यों की तारीफ
सैमसन ने कहा कि मुश्किल फैसले कम्युनिकेशन के चलते आसान हो जाते हैं. उनकी इस सीरीज से पहले हेड कोच गौतम गंभीर से बात हुई थी. मुश्किल फैसले करना आसान नहीं होता. लोकप्रिय फैसले करना आसान रहता है. मगर नेतृत्व ग्रुप मुश्किल फैसले कर रहा है जो टीम को ध्यान में रखे हुए है. इसका श्रेय उन्हें दिया जाना चाहिए.
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