भारत और वेस्ट इंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज जारी है. इसके चौथे मैच में एक बार फिर से टी20 टीम इंडिया को हार मिली, तो उसके बाद से श्रेयस अय्यर की कप्तानी व टी20 टीम इंडिया के प्रदर्शन पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं. क्योंकि अय्यर जब से कप्तान बने हैं, तब से टी20 टीम इंडिया के लिए कुछ भी सही नहीं चल रहा है. भारत को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर सीरीज में बुरी हार झेलनी पड़ी. इसके बाद अब घर पर भी वेस्ट इंडीज के सामने करो या मरो वाली स्थिति बन गई है. अब वेस्ट इंडीज से कहीं घर में सीरीज हार गए, तो फिर अय्यर के भविष्य पर भी खतरा मंडरा सकता है. हालांकि, टीम इंडिया की हार में सिर्फ अय्यर की गलती नहीं मान सकते हैं, बल्कि उनके बैटर्स और गेंदबाजों का भी हाथ है. लेकिन एक समस्या भारतीय क्रिकेट के बल्लेबाजों के साथ सालों से चलती आ रही है और उसके पीछे का कारण कहीं न कहीं आईपीएल को भी माना जा रहा है. जिसका आईना वेस्ट इंडीज के खिलाफ चौथे टी20 मैच में भी देखने को मिला.
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टीम इंडिया की सबसे बड़ी समस्या या बीमारी क्या है?
वेस्ट इंडीज के खिलाफ जब चौथे मैच में टीम इंडिया को 248 रन के चेज में 24 रन से हार मिली, तो उसके बाद एक बेहद ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. क्रिकबज द्वारा दर्शाए गए आंकड़ों से साफ निकलकर आया कि शॉर्ट बॉल एक ऐसी कमजोरी है, जो आज नहीं, बल्कि भारतीय बैटर्स के लिए काफी पुरानी रही है. लेकिन जब से टीम इंडिया के कप्तान श्रेयस अय्यर बने हैं, तब से ये और उभरकर सामने आई है. वेस्ट इंडीज के गेंदबाजों ने टीम इंडिया की पुरानी नब्ज (शॉर्ट बॉल) को दबाया और चौथे टी20 मैच में 31 शॉर्ट बॉल का इस्तेमाल किया, जिसमें भारतीय बल्लेबाज बस किसी तरह खुद को बचाते नजर आए और 32 रन ही बना सके, जबकि एक विकेट भी गिरा. वहीं, वेस्ट इंडीज के बैटर्स को भारतीय गेंदबाजों ने 28 शॉर्ट बॉल फेंकी और उन्होंने एक विकेट खोने के साथ इन गेंदों पर भारत से दोगुने 57 रन कूटे. यहीं से अंतर साफ समझ आ रहा है कि शॉर्ट बॉल अभी भी टीम इंडिया के लिए एक सबसे बड़ी कमजोर कड़ी बनी हुई है और घंटों तक थ्रो डाउन स्पेशलिस्ट के चलते शॉर्ट बॉल खेलने के बाद भी भारतीय बैटर्स इस बॉल पर कॉन्फिडेंस हासिल नहीं कर पा रहे हैं.
इंग्लैंड और आयरलैंड में क्या हुआ था?
शॉर्ट बॉल वैसे तो पुरानी समस्या रही है और जब से रोहित शर्मा व विराट कोहली जैसे खिलाड़ी टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़कर गए हैं, तब से इस गेंद पर भारत के आंकड़े और खराब होते जा रहे हैं. हम सिर्फ श्रेयस अय्यर की कप्तानी से अगर नजर डालें, तो अभी तक भारत का हाल काफी बुरा रहा है. अय्यर को जब टी20 टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया, तो सबसे पहले टीम इंडिया ने आयरलैंड का दौरा किया और इस दौरे पर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को भी शामिल किया गया. आयरलैंड के गेंदबाजों ने अपनी तेज और स्विंग वाली पिचों पर भारतीय बैटर्स का स्वागत शॉर्ट बॉल से किया. नतीजा ये रहा कि आयरलैंड में भारत के बल्लेबाज चल नहीं सके और भारत को सीरीज हार का सामना करना पड़ा. आयरलैंड दौरे पर दो टी20 मैचों की सीरीज के दौरान शॉर्ट बॉल और बैक ऑफ लेंथ कटर गेंद पर भारत के बल्लेबाज कुल मिलाकर छह बार आउट हुए थे, जिसमें श्रेयस अय्यर और शिवम दुबे जैसे बैटर्स भी शामिल थे.
इंग्लैंड ने 76 पर ढेर करके भारत को दिया जोर का झटका
अब आयरलैंड में सीरीज हार का दर्द झेलने के बाद इंग्लैंड गई टीम इंडिया के लिए कुछ भी नहीं बदला. इंग्लैंड में भी अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया के बैटर्स तेज पिच पर अपना सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे थे. हालात तब बेहाल हो गए, जब जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने मिलकर ट्रेंट ब्रिज यानी नॉटिंघम के मैदान पर शॉर्ट बॉल से भारतीय बैटिंग को तहस-नहस कर डाला. इन दोनों ने मिलकर 64 प्रतिशत शॉर्ट पिच गेंदों का इस्तेमाल किया. इससे टीम इंडिया सिर्फ 76 रन पर ही ढेर हो गई और भारत के आठ में से सात बल्लेबाज शॉर्ट पिच गेंद पर पुल शॉट या फिर हुक शॉट खेलते हुए आउट होकर पवेलियन चले गए. इससे भारत को इंग्लैंड के खिलाफ एक करारी हार झेलनी पड़ी थी.
76 रन पर ढेर होने की बेइज्जती के बाद भी टीम इंडिया के बैटर्स सबक नहीं सीख सके और लगातार इंग्लैंड में शॉर्ट बॉल का शिकार होते रहे. इससे भारत को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर खेले जाने वाले सात टी20 मैचों में छह में हार मिली और एक मैच बारिश के चलते रद्द हो गया था. यानी कुल मिलाकर टीम इंडिया सभी मैच हारकर लौटी, तो बाद में रिव्यू मीटिंग भी रखी गई, लेकिन उसके बाद भी कुछ खास सुधार नजर नहीं आया है.
टीम इंडिया के तमाम बैटर्स की समस्या है शॉर्ट बॉल
टीम इंडिया के बैटर्स की बात करें, तो श्रेयस अय्यर के बारे में जगजाहिर है कि वो शॉर्ट बॉल से घबराते हैं. हालांकि, इस पर उन्होंने काफी काम भी किया. लेकिन अभी भी वो जैसे ही क्रीज पर आते हैं, तो गेंदबाज उनको शॉर्ट बॉल से चेक जरूर करते हैं. इसके अलावा अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और संजू सैमसन भी अक्सर शॉर्ट बॉल पर आउट होते नजर आते हैं. संजू ने चौथे टी20 मैच में ही शॉर्ट बॉल पर सिक्स उड़ाना चाहा, लेकिन हेटमायर ने अद्भुत कैच लेकर उनको चलता कर दिया था. अब टीम इंडिया को अगर टी20 क्रिकेट में अपनी बादशाहत को कायम रखना है, तो शॉर्ट बॉल की घुट्टी पूरी तरह से पीकर उसे आत्मसात करना होगा. वरना हर एक टीम के गेंदबाज इस हथियार को उनके खिलाफ आजमाते रहेंगे और हार मिलने से बैटर्स का आत्मविश्वास भी इस गेंद के प्रति गिर जाएगा. फिर उस स्थिति से निकलकर पार पाना एक खिलाड़ी के लिए काफी कठिन हो जाता है.
आईपीएल कैसे है बर्बादी का कारण?
दरअसल, तमाम पूर्व भारतीय क्रिकेटर्स और दिग्गजों का मानना है कि भारतीय बैटर्स दो महीने तक लगातार भारतीय पिचों पर आईपीएल के दौरान दुनिया के हर एक गेंदबाज का सामना करते हैं. भारत की सपाट पिचों, छोटी बाउंड्री और घरेलू माहौल में लगातार खेलने के कारण भारतीय बैटर्स बहुत तेज गति यानी 145 प्लस की रफ्तार के साथ तीखी उछाल वाली गेंद को खेलने के कम आदी हो गए हैं. यही कारण है कि टीम इंडिया के बैटर्स जब विदेशी धरती पर खेलने जाते हैं, तो वहां की रफ्तार और उछाल से मात खा जाते हैं. जो शॉर्ट पिच गेंद आईपीएल में उनके बल्ले के नीचे रडार में आती है, ठीक वैसी ही गेंद विदेशी पिचों पर हल्की और ऊपर आती है, यानी उनके हिटिंग आर्क से बाहर हो जाती है. इससे बैटर्स को समस्या का सामना करना पड़ता है.
अब वेस्ट इंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज की बात करें, तो उनके तेज गेंदबाज काफी ऊंचे कद के हैं. जब वो काफी अधिक हाइट से शॉर्ट पिच गेंद फेंकते हैं, तो इसमें भी गेंद अधिक बाउंस करती है, जिससे शॉर्ट बॉल को हिट करना एक समस्या नजर आ रही है.
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