IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जा रही है. इस सीरीज के अभी तक चार मैच हो चुके हैं और सीरीज 2-2 की बराबरी पर आ गई है. वेस्टइंडीज की टीम को अब भारत में भारत के खिलाफ पहली बार टी20 सीरीज जीत हासिल करनी है, तो उसे अंतिम मैच में भी जीत दर्ज करनी होगी. वहीं, टीम इंडिया के खिलाड़ी ऐसा नहीं होने देना चाहेंगे. अंतिम मैच के साथ ही करोड़ों की कमाई वाली यह टी20 सीरीज भी समाप्त हो जाएगी. इससे भारत को तो बंपर फायदा होगा, लेकिन वेस्टइंडीज की झोली खाली रह जाएगी. यानी 20 से 30 मिलियन डॉलर की सीरीज से वेस्टइंडीज को कमाई के तौर पर एक भी रुपया नहीं मिलेगा.
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बीसीसीआई को पांच मैचों की सीरीज से कितने सौ करोड़ मिलेंगे?
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच टी20 मैचों की सीरीज का प्रमुख स्पॉन्सर मुथूट फिनकॉर्प है. 4.80 करोड़ रुपये की रकम मुथूट फिनकॉर्प प्रति मैच बीसीसीआई को अदा कर रहा है, जिसे टाइटल स्पॉन्सरशिप के राइट्स मिले हैं. इसके अलावा टीम इंडिया को कैम्पा, एसबीआई लाइफ और चैटजीपीटी जैसे अन्य सहायक स्पॉन्सर्स भी मिले हैं, जिनसे 130 करोड़ के आसपास की डील साइन हुई है. इन सबके अलावा भारत में होने वाले मैचों के टीवी और डिजिटल प्रसारण अधिकारों से भी बीसीसीआई प्रति मैच अरबों की कमाई करती है. यानी स्पॉन्सरशिप और मीडिया राइट्स के अलावा बात की जाए, तो स्टेडियम में होने वाली टिकटों की बिक्री और स्थानीय विज्ञापनों का पूरा हिस्सा भी बोर्ड को मिलता है. इस तरह देखा जाए, तो पांच मैचों की टी20 सीरीज से बीसीसीआई करीब 360 करोड़ से 380 करोड़ की मोटी कमाई कर सकती है.
बीसीसीआई की मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से कितनी कमाई?
बीसीसीआई की मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के तहत जियो सिनेमा और वायकॉम18 से पांच साल, यानी साल 2023 से लेकर साल 2028 तक की डील हुई थी. इसके चलते भारत को हर एक अंतरराष्ट्रीय मैच से ब्रॉडकास्टिंग वैल्यू के तहत 67.75 करोड़ रुपये के करीब मिलते हैं. यानी पांच टी20 मैचों से बीसीसीआई को करीब 338.75 करोड़ की कमाई होगी.
टाइटल स्पॉन्सरशिप और एसोसिएट स्पॉन्सर्स
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का प्रमुख स्पॉन्सर मुथूट फिनकॉर्प है, जिससे प्रति मैच 4.80 करोड़ के आसपास की रकम मिल रही है. इसके अलावा एसोसिएट स्पॉन्सर्स के तहत 3.71 करोड़, तो कुल मिलाकर दोनों को जोड़कर देखें, तो पांच मैचों के बाद बोर्ड के खाते में 44 करोड़ के आसपास की मोटी रकम आती है. इसके अलावा टिकटों की बिक्री और स्टेडियम में लगने वाले विज्ञापनों से बीसीसीआई को पांच मैचों की सीरीज में करीब 10 से 15 करोड़ की कमाई होने वाली है.
| राजस्व स्रोत (Revenue Source) | प्रति मैच कमाई (Approx) | 5 मैचों की सीरीज से कुल कमाई |
|---|---|---|
| मीडिया राइट्स (TV + Digital) | ₹67.75 करोड़ | ₹338.75 करोड़ |
| टाइटल स्पॉन्सरशिप | ₹4.85 करोड़ | ₹24.25 करोड़ |
| एसोसिएट स्पॉन्सर्स (Campa, SBI Life आदि) | ₹3.71 करोड़ | ₹18.55 करोड़ |
| टिकट बिक्री और ग्राउंड विज्ञापन | ₹2 करोड़ से ₹3 करोड़ | ₹10 करोड़ - ₹15 करोड़ |
| कुल संभावित कमाई (Gross Revenue) | ~ ₹78.50 करोड़ | ~ ₹390 करोड़ से अधिक |
वेस्टइंडीज के CEO ने खोला बड़ा राज
अब सवाल यह उठता है कि 360 करोड़ के करीब की होने वाली इस सीरीज से वेस्टइंडीज की टीम को एक भी रुपया क्यों नहीं मिलेगा. उनकी टीम के कप्तान शाई होप अभी तक तीन बार प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीत चुके हैं और सिर्फ उसे ही लेकर घर लौटेंगे. सीरीज जीतने पर ट्रॉफी लेकर जाएंगे. लेकिन इस सीरीज को रोमांचक बनाने और भारत के साथ मैदान पर लोहा लेने वाली वेस्टइंडीज को एक भी रुपया नहीं मिलेगा. इसके पीछे का कारण वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के CEO क्रिस डियरिंग ने विजडन क्रिकेट से बातचीत में खुद बताया है. उन्होंने कहा कि बाइलेटरल सीरीज से होने वाली कमाई का पूरा राजस्व मेजबान बोर्ड ही रखता है, जबकि मेहमान टीम सिर्फ मेहमान की तरह खेलकर घर चली जाती है. उसे कुछ भी फायदा नहीं होता है. भारत को इस सीरीज से जहां करोड़ों की कमाई होने वाली है, वहीं मेहमान वेस्टइंडीज को कुछ भी नहीं मिलेगा. इसके लिए डियरिंग ने ICC के 1997 के एक नियम की याद दिलाई.
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ICC का क्या है नियम?
दरअसल, पिछली सदी में वेस्टइंडीज की टीम सबसे खतरनाक क्रिकेट टीमों में से एक थी. उस समय वेस्टइंडीज को बुलाने के लिए तमाम क्रिकेट बोर्ड उसे पैसा देकर अपने देश में बुलाते थे. लेकिन साल 1997 में ICC ने एक नियम बनाया. ICC के मेंबर्स ने फैसला किया कि बाइलेटरल सीरीज से होने वाली कमाई का पूरा राजस्व मेजबान देश का क्रिकेट बोर्ड रखेगा, जबकि मेहमान टीम को कमाई के तौर पर कुछ भी नहीं मिलेगा. वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के CEO क्रिस डियरिंग ने आगे बताया कि उस समय सिर्फ वेस्टइंडीज ही इस नियम के खिलाफ था और बाकी वोट ICC को मिले, तो 9-1 के अंतर से यह प्रस्ताव पारित हो गया. इसका नतीजा यह रहा कि अधिक आबादी वाले और अधिक फैंस वाले क्रिकेट नेशंस काफी फले-फूले, जबकि वेस्टइंडीज में स्थित एंटीगुआ जैसे क्षेत्र में करीब एक लाख आबादी या सेंट किट्स जैसे क्षेत्र में लगभग 30 हजार की आबादी से होने वाली कमाई काफी सीमित रह गई और वेस्टइंडीज क्रिकेट के पतन का सबसे बड़ा कारण यह नियम बना.
वेस्टइंडीज को भारत आकर क्या मिला?
वेस्टइंडीज की टीम को अगर फायदे के रूप में देखा जाए, तो सबसे पहले उसे भारतीय टीम के साथ टी20 क्रिकेट खेलने का अनुभव मिला. इसके अलावा बीसीसीआई यानी मेजबान क्रिकेट बोर्ड ही वेस्टइंडीज टीम की फ्लाइट्स के खर्च, उनके होटल के खर्च और खिलाड़ियों के दैनिक भत्ते, ये सब कुछ वहन कर रही है. यानी कुल मिलाकर साफ तौर पर कहा जाए, तो वेस्टइंडीज के लिए भारत के खिलाफ सीरीज एक तरह से ‘अतिथि देवो भवः’ की तरह है और उसे इस सीरीज से कोई भी हार्ड कैश या रकम नहीं मिलने वाली है, जिससे वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के वित्तीय कोष को राहत मिल सके. हालांकि, कुछ ऐसा ही टीम इंडिया के साथ भी होता है. जब खिलाड़ी वेस्टइंडीज जाते हैं, तो वहां होने वाली कमाई का पूरा राजस्व वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड रखता है, लेकिन यह भारत में होने वाली कमाई की तुलना में कम होता है.
आईसीसी के नियम के तहत होने वाली कमाई :-
| विवरण | भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) | वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड (CWI) |
|---|---|---|
| भारत में सीरीज होने पर कमाई | 100% (अरबों रुपये) (स्पॉन्सरशिप से ₹4.8 करोड़+ प्रति मैच) | ₹0 (शून्य) (केवल खिलाड़ियों के रहने/खाने का खर्च मेजबान उठाता है) |
| वेस्टइंडीज में सीरीज होने पर कमाई | ₹0 (लेकिन खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू बनी रहती है) | 100% कमाई (भारत के एक दौरे से ही ₹700+ करोड़ तक का बिजनेस होता है) |
| ICC से सालाना कमाई (साझा पूल) | ~ $230 मिलियन (₹1,900+ करोड़) (38.5% शेयर) | ~ $27 मिलियन (₹225+ करोड़) (4.5% शेयर) |
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