INDW vs AUSW Test: मंधाना के रिकॉर्ड शतक से पिंक बॉल टेस्ट का दूसरा दिन भी भारत के नाम

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गोल्ड कोस्ट। जब मुकाबला ऐतिहासिक हो तो उसमें यादगार प्रदर्शन करने का मजा ही कुछ और होता है. स्मृति मंधाना ने अपने सात साल के टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ने के लिए ऐतिहासिक पिंक बॉल टेस्ट को ही चुन रखा था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जहां पहला दिन मंधाना के नाम रहा था, वहीं दूसरे दिन भी 127 रन की शानदार शतकीय पारी खेलकर उन्होंने अपना दबदबा स्थापित किया. वैसे, बारिश और खराब मौसम की आंख मिचौली शुक्रवार को भी जारी रही और बारिश से प्रभावित दूसरे दिन भी आखिरी सत्र का पूरा खेल धुल गया. भारतीय टीम ने दूसरे दिन स्टंप्स तक पांच विकेट खोकर 276 रन बना लिए हैं और अब इस चार दिवसीय टेस्ट का ड्रॉ होना भी लगभग तय नजर आ रहा है.

 

दरअसल, स्मृति मंधाना और पूनम राउत ने दिन की शुरुआत एक विकेट पर 132 रन के स्कोर से आगे की. मंधाना ने खासतौर पर तेज शुरुआत की और जल्द ही अपने टेस्ट करियर का पहला शतक लगा दिया. मंधाना ने पारी का 52वां ओवर करने आईं एलिस पैरी की पांचवीं गेंद पर पुल करके चौका लगाया और इसी के साथ शतक के साथ इतिहास रचने में कामयाबी हासिल की. साल 2014 में टेस्ट डेब्यू करने वाली मंधाना ने अपने करियर के चौथे टेस्ट में पहला शतक लगाया. 25 साल की मंधाना डेनाइट टेस्ट में शतक जड़ने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनीं और साथ ही आस्ट्रेलियाई जमीन पर टेस्ट शतक लगाने वाली भी पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बनीं. मंधाना ने 22 चौके और एक छक्के की मदद से 216 गेंदों में 127 रन बनाए और दूसरे विकेट के लिए पूनम राउत (36) के साथ 102 रन जोड़े जो आॅस्ट्रेलिया में भारतीय रिकॉर्ड है. मंधाना एश्ले गार्डनर की गेंद पर ताहलिया मैक्ग्रा को कैच दे बैठीं.

 

अंपायर के नॉटआउट देने के बावजूद पूनम खुद ही पवेलियन लौट गईं
मंधाना के आउट होने के बाद जल्द ही पूनम राउत भी अपना विकेट गंवा बैठीं. उन्होंने मोलिक्यू की गेंद पर विकेटकीपर एलिसा हीली को कैच दिया. 36 रन के लिए पूनम ने 165 गेंदें खेलीं. हालांकि उनका आउट होना विवादित रहा. विवादित इसलिए क्योंकि उन्होंने रक्षात्मक तरीके से गेंद खेली और बॉल बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के दास्तानों में चली गई. हीली और लैनिंग ने जोरदार अपील की लेकिन अंपायर ने उसे ठुकरा दिया. ऐसे में पूनम खुद ही विकेट छोड़कर चली गईं. अगर पूनम खुद से ये फैसला नहीं करतीं तो वो नॉटआउट ही रहतीं क्योंकि इस मैच में डीआरएस का विकल्प मौजूद नहीं था. तब टीम का स्कोर तीन विकेट पर 217 रन हो गया.

 

मिताली रनआउट होकर लौटीं पवेलियन 
अब जिम्मेदारी कप्तान मिताली राज और डेब्यू कर रहीं यास्तिका भाटिया ने संभाली. दोनों ने स्कोर को 261 रनों तक पहुंचाया और इसी स्कोर पर यास्तिका 19 रन बनाकर पैरी की गेंद पर मूनी को कैच देकर चलतीं बनीं. उनके बाद दीप्ति शर्मा ने क्रीज पर कदम रखा. लेकिन उन्हें अपनी कप्तान का साथ लंबे समय तक नहीं मिल सका और मिताली 86 गेंदों में 30 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रनआउट हो गईं. बिजली चमकने और बारिश के कारण जब खेल रोका गया तब भारतीय टीम ने पांच विकेट गंवाकर 276 रन बना लिए थे. दीप्ति शर्मा 12 रन बनाकर खेल रही थीं जबकि तानिया भाटिया ने अभी खाता नहीं खोला था. आॅस्ट्रेलिया के लिए कुल आठ गेंदबाज आजमाए गए जिनमें से मोलिक्यू ने दो जबकि गार्डनर ने एक विकेट लिया. गार्डनर ने काफी किफायती गेंदबाजी करते हुए 22 ओवर में 26 रन दिए. 
 

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