शेन वॉर्न निकले असली ख‍िलाड़ी, जीते जी खेल गए ऐसा खेल, राजस्थान रॉयल्स के बिकने पर पर‍िवार को मिलेंगे 450 करोड़ रुपये

2008 में IPL के पहले सीजन में जब शेन वॉर्न राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने, तो उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्ट में एक ऐसी शर्त रखी, जिससे करीब दो दशक बाद उनके परिवार को एक बड़ा फायदा हो गया.

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शेन वॉर्न आईपीएल के पहले सीजन में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान थे. (PC: Getty)

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शेन वॉर्न आईपीएल के पहले सीजन में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान थे.

शेन वॉर्न को राजस्थान रॉयल्स में 0.75 प्रतिशत मालिकाना हिस्सा दिया गया था.

ऑस्ट्रेलिया के स्पिन के दिग्गज शेन वॉर्न सिर्फ गेंद के जादूगर ही नहीं थे, बल्कि वह एक दूरदर्शी भी थे, जो जानते थे कि कब और कैसे सही दांव लगाना है. वह भले ही अब इस दुन‍िया में नहीं हैं, मगर उन्होंने अपनी दूर की सोच को सही साबित कर द‍िया. 2008 में IPL के पहले सीजन में जब वॉर्न राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने, तो उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्ट में एक ऐसी शर्त रखी, जिससे करीब दो दशक बाद उनके परिवार को एक बड़ा फायदा हो गया. 

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जब रॉयल्स ने 2008 सीजन से पहले वॉर्न को साइन किया, तो उन्हें न सिर्फ कप्तान की भूमिका दी गई, बल्कि फ्रेंचाइज के क्रिकेट से जुड़े सभी कामों पर पूरा कंट्रोल भी दिया गया. इस सौदे के तहत ऑस्ट्रेलिया के इस दिग्गज को टीम के लिए खेले गए हर साल के बदले 657,000 डॉलर की सैलेरी और 0.75 प्रतिशत मालिकाना हिस्सा दिया गया था. 

15,290 करोड़ रुपये में बिकी फ्रेंचाइज

अब जब बीते दिन राजस्थान रॉयल्स को सोमानी के नेतृत्व वाले अमेरिका स्थित एक ग्रुप को 1.63 अरब डॉलर (लगभग 15,290 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम रकम में बेच दिया गया तो यह शर्त तब लागू हुई, जब राजस्थान रॉयल्स को कल सोमानी के नेतृत्व वाले अमेरिका स्थित एक ग्रुप को 1.63 अरब डॉलर (लगभग 15,290 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम रकम में बेच दिया गया तो 0.75 प्रतिशत मालिकाना हक होने के नाते वॉर्न के हिस्से में 450 करोड़ रुपये आए, जो अब उनके पर‍िवार को मिलेंगे. 

डील का हिस्सा

वॉर्न ने सालों पहले ‘द हेराल्ड सन’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरी डील का एक हिस्सा यह था. उन्होंने मुझसे कप्तान और कोच बनने को कहा और यह भी कि मैं क्रिकेट टीम को अपनी मर्जी से चलाऊं. मैं ही सब कुछ था. वॉर्न ने इस फ्रेंचाइज के साथ चार सीजन बिताए और 2008 में पहले ही सीजन में टीम को चैंपियन बनाया था. इसके साथ ही फ्रेंचाइज की ओनरशिप में उनका कुल हिस्सा बढ़कर 3 फीसदी हो गया. अब जब टीम 1.63 अरब डॉलर में बिक चुकी है, तो वॉर्न का यह हिस्सा 450 से 460 करोड़ रुपये के बराबर हो जाता है. 


वॉर्न का परिवार IPL 2026 सीजन के खत्म होने के बाद अपने शेयर को बेचकर पैसे अपने पास रख सकेगा. हालांकि इस डील को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से मंजूरी मिलना जरूरी है. इस फ्रेंचाइज को असल में 2008 में मनोज बदाले की अगुआई वाली ‘इमर्जिंग मीडिया’ ने सिर्फ़ 6.7 करोड़ डॉलर में खरीदा था. 

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