बारामूला एक्सप्रेस के नाम से मशहूर तेज गेंदबाज आकिब नबी ने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बना दिया है. कभी तीन बार ट्रायल में फेल होने वाले नबी को चौथी कोशिश में चुना गया और फिर उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि जम्मू कश्मीर का 67 सालों का इंतजार खत्म हो गया. जम्मू कश्मीर ने कर्नाटक को पहली पारी के आधार पर हराकर खिताब जीता. नबी प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे.
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पिता गुलाब नबी डार का कहना है कि अभी उसका देश के लिए खेलने का सपना पूरा करना बाकी है। औकिब ने परिस्थितियों को कभी भी हावी नहीं होने दिया और लगातार अपने कौशल को निखारते हुए अपने राज्य जम्मू-कश्मीर को पहला रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
देश के लिए खेलना बाकी
पीटीआई के अनुसार शनिवार को आठ बार के चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ हुबली में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद आकिब के पिता ने बताया कि उनका बेटा एक सपने का हिस्सा बन चुका है, बस एक और सपना बाकी है जो देश के लिए खेलना है.
कॉलेज जाने के बाद मिलीं सही टर्फ
आकिब ने इस टूर्नामेंट में 60 विकेट लिए. उनके पिता ने कहा कि उनके बेटे ने अपना लक्ष्य पाने के लिए कड़ी मेहनत की. डार एक शिक्षक हैं, उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने बस एक ही चीज नहीं की, वह थी हार मानना. वह शीरी के एक स्थानीय स्कूल में पढ़े और यहां धूल भरे ऊबड़-खाबड़ मैदान में खेलने में बहुत समय बिताया. श्रीनगर के अमर सिंह कॉलेज जाने के बाद ही उन्हें अभ्यास करने के लिए सही टर्फ पिच मिलीं.
चौथी कोशिश में चयन
डार ने बताया कि आकिब ने तीन बार ट्रायल में हिस्सा लिया और फेल हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चौथी बार ट्रायल में हिस्सा लिया और चुन लिया गया. नबी पिछले कुछ सालों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. वह 2024-25 सत्र में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. उनकी मेहनत का कुछ इनाम उन्हें पहले ही मिल चुका है क्योंकि आईपीएल की पिछली नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये में खरीदा था.
आकिब नबी के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने तीन बार ट्रायल में हिस्सा लिया और फेल हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चौथी बार ट्रायल में हिस्सा लिया और चुन लिया गया.
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