जम्मू-कश्मीर की टीम रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचकर पहले ही इतिहास रच चुकी है और अब उसकी कोशिश पहली बार इस खितबा को जीतने पर है. इसके लिए उसने कदम भी बढ़ा दिए है. कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में उसने अपनी पहली पारी में 584 रन बनाए. गुरुवार को फाइनल के तीसरे दिन के पहले सेशन में जम्मू-कश्मीर की टीम 584 रन पर ऑलआउट हो गई. उसने कर्नाटक के सामने मजबूत चुनौती पेश कर दी, मगर अब इस फाइनल में सिर्फ ढाई दिन का ही खेल बचा है. ऐसे में इस नतीजा निकलता मुश्किल ही नजर आ रहा है. अगर ऐसा होता है तो पहली पारी में रनों की बारिश करने के बावजूद जम्मू-कश्मीर का खिताब जीतने का सपना चकनाचूर हो सकता है.
ADVERTISEMENT
IPL 2026 : भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाले कोच को LSG ने दी जोंटी रोड्स की जगह
पहले बैटिंग करने का फैसला करने के बाद जम्मू और कश्मीर ने तीसरे दिन के खेल की शुरुआत 527/6 से आगे करते हुए की. शुभम पुंडिर के शतक समेत पांच अर्धशतक ने कर्नाटक पर शुरुआती दबाव बनाया. बोर्ड पर पहले से ही इतना बड़ा टोटल होने के बाद अब फोकस बैटिंग के दबदबे से हटकर इस बात पर आ गया है कि अगर पांच दिन के मैच में समय खत्म हो गया तो क्या होगा.
ड्रॉ होने पर कौन बनेगा चैंपियन?
- अगर दोनों टीमें अपनी पहली पारी पूरी कर लेती हैं, तो पहली पारी में बढ़त लेने वाली टीम को रणजी ट्रॉफी विनर घोषित कर दिया जाता है.
- अगर दूसरी बैटिंग करने वाली टीम आउट नहीं होती है, तो टेक्निकली पहली पारी अधूरी रह जाती है. ऐसी स्थिति में खिताब लीग-स्टेज पॉइंट्स स्टैंडिंग के आधार पर दिया जाता है, न कि मैच में दबदबे के आधार पर. यह नियम इस फाइन तनावपूर्ण बनाता है.
कर्नाटक ने लीग-स्टेज के मजबूत रिकॉर्ड के साथ फाइनल में प्रवेश किया, जिसका मतलब है कि अगर मैच ड्रॉ की ओर बढ़ता है तो सर्वाइवल बैटिंग उनका सबसे बड़ा हथियार बन सकती है. लीग स्टेज में कर्नाटक की टीम 27 पॉइंट्स के साथ एलीट ग्रुप बी में दूसरे नंबर पर थी. जबकि जम्मू-कश्मीर की टीम 24 पॉइंट्स के साथ एलीट ग्रुप डी में दूसरे नंबर पर थी.
कर्नाटक को बढ़त लेने से रोकने की कोशिश
पहली पारी में शानदार स्कोर बनाने के बावजूद जम्मू और कश्मीर चैन से नहीं बैठ सकती. अब ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी खिताब जीतने का उनका रास्ता एक ही लक्ष्य पर निर्भर करता है कि वह कर्नाटक को बढ़त लेने से पहले ही ऑलआउट कर दें.
ADVERTISEMENT










