Exclusive: विराट कोहली- गौतम गंभीर विवाद पर आखिरकार BCCI ने तोड़ी चुप्पी, जानें देवजीत सैकिया ने क्या कहा

बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने कहा कि विराट- गंभीर के बीच सबकुछ ठीक है. बाहर से जो भी कहा जा रहा है वो गलत है.

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गंभीर और कोहली, देवजीत सैकिया (photo: getty)

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देवजीत सैकिया ने बड़ा बयान दिया है

सैकिया ने कहा कि विराट- गंभीर के बीच सबकुछ ठीक है

बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने बड़ा बयान दिया है. देवजीत सैकिया ने आखिरकार उस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है जो कुछ समय पहले खबरों में था. हम यहां विराट कोहली और हेड कोच गौतम गंभीर के रिश्ते की बात कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लगातार फैंस ये सवाल उठा रहे थे कि क्या गंभीर- विराट के बीच सबकुछ ठीक नहीं. क्योंकि दोनों को मैच के दौरान बात करते नहीं देखा जा रहा था. हालांकि अब बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने इंडिया टुडे पॉडकास्ट पर इस मुद्दे पर अपनी राय दी है.

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गंभीर को बनाया गया था निशाना

बता दें कि विराट कोहली ने जैसे ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था, इस दौरान कई सवाल उठे थे. कुछ लोगों ने सीधे गौतम गंभीर पर ही हमला बोला था.  इसके बाद रोहित शर्मा ने भी वनडे कप्तानी छोड़ दी. अंत में इसका भी जिम्मेदार गौतम गंभीर को ही बताया गया. हालांकि ये सारी बातें सोशल मीडिया पर थीं. 

क्या बोले सैकिया?

सैकिया ने अब गंभीर और विराट विवाद पर कहा है कि, दोनों के बीच काफी अच्छा रिश्ता है.  वहीं सैकिया से जब आईपीएल 2023 मुद्दे को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने वो मैच नहीं देखा था. सैकिया ने कहा कि, मैंने आईपीएल का मैच नहीं देखा था. क्योंकि जब वो देश के लिए खेल रहे थे तब मैं उनके साथ था. ऐसे में हर मैच देखना मेरे लिए मुमकिन नहीं था. 

इसके बाद सैकिया से जब ये पूछा गया कि विराट कोहली फिलहाल टीम के कप्तान नहीं हैं. लेकिन उनका फैन बेस सबसे तगड़ा है. ऐसे में उनका फैन बेस चाहता था कि गंभीर सेटअप से हट जाएं. इसपर सैकिया ने कहा कि, हां ऐसा हो सकता है लेकिन विराट कोहली हमेशा टीम का हिस्सा रहे हैं और अभी भी हैं. गौतम गंभीर भी हैं. और हम नतीजे देख रहे हैं. क्या आपने ये देखा है कि विराट कोहली टीम का हिस्सा नहीं हैं. कोई भी शख्स विराट कोहील जैसे खिलाड़ी को फैसला लेने पर मजबूर नहीं कर सकता. उनका लेवल अलग है. वो आम खिलाड़ी नहीं हैं. वो भारतीय क्रिकेट के लेजेंड हैं. जब तक वो अपना फैसला नहीं लेते, उन्हें कोई भी मजबूर नहीं कर सकता. वहीं बोर्ड भी कभी खिलाड़ियों के बीच नहीं जाता.

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