भारत के पूर्व क्रिकेटर और लंबे समय से कमेंट्री कर रहे लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 20 मार्च को बीसीसीआई कमेंट्री से रिटायरमेंट का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि उनके साथ भेदभाव किया गया. टॉस और पोस्ट मैच प्रजेंटेशन से दूर रखा गया. इस वजह से वह कमेंट्री से दूर हो रहे हैं.
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शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया के जरिए कमेंटेटर के तौर पर मिलने वाले मौकों को लेकर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'मैं बीसीसीआई के लिए कमेंट्री से रिटायर हो रहा हूं. मेरा इस्तेमाल टॉस और प्रजेंटेशन के लिए 23 साल से नहीं हो रहा है और नए लोग आकर पिच रिपोर्ट, टॉस प्रजेंटेशन कर रहे हैं. (रवि शास्त्री) जब कोच थे तब भी ऐसा हो रहा था. ऐसे में आपको क्या लगता है कि क्या कारण हो सकता है.'
शिवरामकृष्णन ने आगे लिखा, 'बीसीसीआई ब्रॉडकास्टिंग राइट्स रखने वाली कंपनी कैसे नीचे जा सकती है. कोई अनुमान है. मेरा रिटायरमेंट बड़ा नहीं है. लेकिन टीवी प्रोडक्शन की कहानी बताता है. जल्द ही आप बड़ी तस्वीर देखेंगे.'
एक यूजर ने जब पूछा कि क्या चमड़ी का रंग एक वजह था तो उन्होंने कहा, 'तुमने सही कहा. रंग के आधार पर भेदभाव.'
कैसा रहा लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का करियर
60 साल के शिवरामकृष्णन करीब दो दशक तक कमेंट्री बॉक्स में रहे. उन्होंने भारत के लिए नौ टेस्ट और 16 वनडे मुकाबले खेले जो 1983 से 1986 के बीच आए थे. इसके बाद साल 2000 में वे कमेंटेटर बन गए. वे आईसीसी क्रिकेट कमिटी में खिलाड़ियों के प्रतिनिधि भी रहे हैं. वे अपने पहले टेस्ट में विकेट नहीं ले पाए थे. आगे चलकर इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 1984 में 12 विकेट चटकाए थे.
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भारतीय टीम ने जब 1985 में ऑस्ट्रेलिया में बेंसन एंड हेजेज वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती तब शिवरामकृष्णन का अहम रोल रहा था. सुनील गावस्कर की कप्तानी में खेल रही टीम इंडिया ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था. तब शिवरामकृष्णन ने खिताबी मुकाबले में अहम भूमिका निभाई थी जिससे विरोधी टीम नौ विकेट पर 176 रन बना सकी. उस टूर्नामेंट में शिवरामकृष्णन ने सबसे ज्यादा विकेट लिए थे. ऑस्ट्रेलिया के हालात में यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी.
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