Sports Tak Special: हॉकी गोलकीपर 10 किलो वजनी गियर पहनकर खेलता है, जानिए बल्लेबाज के गियर्स का वजन कितना है?

जब कोई सैनिक युद्ध लड़ने के लिए जाता है तो हथियार के साथ उसका साजो-सामान सबसे जरूरी हिस्सा होता है.

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नई दिल्‍ली. जब कोई सैनिक युद्ध लड़ने के लिए जाता है तो हथियार के साथ उसका साजो-सामान सबसे जरूरी हिस्सा होता है. इसमें कवच, ढाल जैसा सामान होता है. खेल भले ही जंग न हो लेकिन खिलाड़ी जब मैदान पर जाते हैं तो उन्हें भी अपने गियर्स के साथ जाना होता है. इनके बिना खिलाड़ी मुश्किल में फंस जाते हैं. भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल हैं और हम देखते हैं कि जब कोई खिलाड़ी बल्लेबाजी के लिए उतरता है तो पूरी तरह से तैयार होकर उतरता है और वो किसी सैनिक सा ही लगता है. उसके सिर पर हेलमेट, पैरों पर पैड्स, बाजू पर एल्बो गार्ड, हाथों पर ग्लव्स जैसे बाहरी उपकरण होते हैं. इनके अलावा वह अंदर एब्डॉमिनल गार्ड, चेस्ट गार्ड, थाई गार्ड जैसे प्रोटेक्टिव गियर भी पहनता है जो बाहर से दिखते नहीं है लेकिन खेल के दौरान काफी अहम भूमिका निभाते हैं.

 

समय के साथ खेलों के प्रोटेक्टिव गियर्स में तब्दीली भी देखने को मिली है. जैसे- आज के 35-40 साल पहले बल्लेबाज बिना किसी हेलमेट के खेला करते थे. आज की तारीख में बल्लेबाजों को हेलमेट पर नेक गार्ड लगाना भी जरूरी होता है. ऐसा ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाज फिल ह्यूज की गर्दन पर गेंद लगने से हुई मौत के बाद हुआ है. लेकिन क्या क्रिकेटर्स ही खेलने के लिए जाते समय सैनिक बनकर जाते हैं या फिर किसी और खेल में भी ऐसा होता है? स्पोर्ट्स तक की पेशकश में आज यही पड़ताल करेंगे.

 

क्रिकेटर कैसे बनता है सैनिक!

पहले क्रिकेट के बारे में ही जान लेते हैं कि इसमें एक खिलाड़ी कौन-कौन से गियर पहनता है. क्रिकेट आधी या पूरी बाजी की टीशर्ट और लॉअर पहनकर खेला जाता है. कपड़ों में मौसम के हिसाब से बदलाव होता है. जैसे सर्दी होने पर खिलाड़ी स्वेटर भी डालते हैं. वहीं धूप में फील्डिंग करने पर आंखों को तेज रोशनी से बचाने के लिए सनग्लासेज भी पहनते हैं. फील्डिंग करते समय सिर पर टोपी भी होती है. यह एक क्रिकेटर के बेसिक कपड़े होते हैं. शुरुआत में क्रिकेट केवल सफेद कपड़ों में ही खेला जाता था. 1992 के वर्ल्ड कप से रंगीन कपड़े पहने जाने लगे और वनडे व टी20 क्रिकेट में रंगीन यूनिफॉर्म ही होती है. टेस्ट में सफेद कपड़े ही होते हैं.

 

कपड़ों से आगे बढ़ते हैं और प्रोटेक्टिव गियर्स पर आते हैं. बल्लेबाज जब बैटिंग के लिए जाता है तब वह सिर पर हेलमेट पहनता है. इसमें सामने की तरफ लोहे की जालीनुमा ग्रिल लगी होती है. साथ ही गर्दन के बचाव के लिए नेक गार्ड होता है. हेलमेट मोल्डेड प्लास्टिक और फाइबर का बना होता है. इसके बाद बल्लेबाज चेस्ट गार्ड पहनते हैं जो टीशर्ट के नीचे होता है और ये उन्हें गेंद के आघात से बचाता है. वहीं कोहनी को बचाने के लिए एल्बो गार्ड पहना जाता है. इसके अलावा दोनों हाथों में कपड़े, फोम के बने ग्लव्स होते हैं. ये हाथ की उल्टी तरफ उभरे हुए होते हैं और बल्लेबाज को चोट से बचाते हैं. फिर बल्लेबाज जांघों को गेंदों की चोटों से बचाने के लिए थाई गार्ड पहनते हैं. साथ ही प्राइवेट पार्ट की सुरक्षा के लिए एब्डॉमिनल गार्ड इस्तेमाल करते हैं. दोनों पैरों की सुरक्षा के लिए पैड्स होते हैं. ये उन्हें पैरों पर चोट लगाने से बचाते हैं.


क्रिकेट के प्रोटेक्टिव गियर
हेलमेट- सिर को बचाने के लिए.
नेक गार्ड- गर्दन की सुरक्षा के लिए.
एल्बो गार्ड- कोहनी और बाजू के बचाव के लिए.
चेस्ट गार्ड- छाती और पसलियों की सुरक्षा के लिए.
एब्डॉमिनल गार्ड- प्राइवेट पार्ट का बचाव करता है.
थाई गार्ड- जांघों की सुरक्षा.
ग्लव्स- हाथों की सुरक्षा.
पैड्स- पैरों की सुरक्षा.
विकेटकीपर पैड्स और ग्लव्स- हाथ और पैरों के बचाव के लिए.

 

फुटबॉल में क्या होता है?

क्रिकेट की तुलना में अगर बाकी खेलों को देखा जाए तो फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन में कोई एथलीट काफी कम या न के बराबर प्रोटेक्टिव गियर पहनता है. एक सामान्य फुटबॉलर जर्सी, शॉर्ट्स और जूतों के अलावा पैरों के बचाव के लिए शिन गार्ड ही पहनता है. इन्हें शिन पैड्स भी कहा जाता है. इनकी खोज 1874 में सेम्युअल विडॉसन नाम के एक खिलाड़ी ने की थी. शिन गार्ड फुटबॉलर को पैरों की चोट से सुरक्षा देता है. फुटबॉलर में गोलकीपर भी लगभग यही गियर पहनता है. अक्सर उन्हें ग्लव्स पहने हुए भी देखा जाता है जो तेजी से आने वाली फुटबॉल से उनके हाथों की अंगुलियों को सुरक्षा देते हैं.

 

टेनिस और बैडमिंटन 

टेनिस और बैडमिंटन की बात की जाए तो दोनों ही खेलों में सामान्य यूनिफॉर्म और जूते ही होते हैं. खिलाड़ी शॉर्ट्स और हाफ बाजू की टीशर्ट पहनते हैं. टेनिस में कई खिलाड़ी बैंडाना और टोपी लगाकर खेलते हैं. साथ ही कई बार खिलाड़ी हाथों पर आर्म स्लीव या हैंड बैंड पहनते हैं जो पसीना पोंछने के काम आता है. हॉकी में जरूर खिलाड़ी प्रोटेक्टिव गियर पहनते हैं. यहां सामान्य खिलाड़ी पैरों के बचाव के लिए शिन गार्ड और दांतों की सुरक्षा के लिए माउथ गार्ड पहनते हैं. कुछ खिलाड़ी ग्लव्‍स भी पहनते हैं. हालांकि हॉकी गोलकीपर को काफी प्रोटेक्टिव गियर पहनने होते हैं.

 

हॉकी गोलकीपर का सामान
हेलमेट- यह गोलची को सिर और चेहरे की चोट से बचाता है. इसमें केवल आंखों और नाक के सामने ही जाली होती है. बाकी पूरा एरिया कवर होता है.
एब्डॉमिनल गार्ड- प्राइवेट पार्ट की सुरक्षा के लिए.
बॉडी-थ्रॉट प्रोटेक्टर- गले और शरीर के ऊपरी हिस्से की सुरक्षा के लिए.
किकर-जूतों की जगह पहने जाते हैं.
लेग गार्ड-पैरों की सुरक्षा के लिए.
ग्लवसेट -इनमें से एक ग्लव्‍स हॉकी स्टिक पकड़ने के लिए होता है. दूसरा सामने से फ्लैट होता है जो गेंद को रोकने के लिए होता है.

 

प्रोटेक्टिव गियर के फैक्ट्स
- क्रिकेट में हेलमेट से पहले एब्डॉमिनल गार्ड आए थे. एब्डॉमिनल गार्ड 1860 से पहने जाने लगे ते,
- इंटरनेशनल क्रिकेट में पहला हेलमेट 1977 में पहना गया. इंग्लैंड के डेनिस एमिस ने इसे पहना. तब उनकी हंसी उड़ाई गई.
- टेस्ट क्रिकेट में पहली बार हेलमेट 1978 में ऑस्ट्रेलिया के ग्राहन यलॉप ने पहना.
- क्रिकेट पैड 18वीं सदी में पहने जाने लगे. इनके चलते ही एलबीडब्ल्यू के नियम की शुरुआत हुई क्योंकि बल्लेबाज गेंद को रोकने के लिए पैड इस्तेमाल करने लगे थे.
- फुटबॉल में शिन गार्ड्स की शुरुआत 1874 में सेम्युअल विडॉसन नाम के एक खिलाड़ी ने की थी. 
- एक हॉकी गोलकीपर के प्रोटेक्टिव गियर्स का वजन आठ से 20 किलो के बीच होता है.

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