संजू सैमसन ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के आखिरी सुपर 8 मुकाबले में कमाल कर दिया. उन्होंने 50 गेंदों में नॉटआउट 97 रन ठोककर टीम को पांच विकेट से जीत दिलाने के साथ ही सेमीफाइनल में भी पहुंच दिया. इस टूर्नामेंट में सैमसन का यह तीसरा ही मैच था. ग्रुप स्टेज में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला था, जबकि उसके बाद वह सुपर आठ में जिम्बाब्वे और अब वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेले. इस टूर्नामेंट में वह ज्यादातर समय बेंच पर ही बैठे रहे.
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उन्हें प्लेइंग इलेवन में नहीं चुना गया था, जिस पर अब हेड कोच गौतम गंभीर ने चुप्पी तोड़ी. उनका कहना है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ मुश्किल सीरीज जाने के बाद बतौर कोच उन्हें सैमसन को ब्रेक देने की जरूरत महसूस हुई, क्योंकि वह उन्हें दबाव वाली स्थिति से बाहर निकालना चाहते थे.
दबाव वाली स्थिति से बाहर निकालने की जरूरत
गंभीर के लिए जो बात सबसे खास थी, वह थी सैमसन की पारी में उनका कंट्रोल. उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग में इसके संकेत मिल रहे थे, भले ही सैमसन ने वर्ल्ड कप से पहले बड़े स्कोर नहीं बनाए थे. मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय हेड कोच ने कहा कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज उनके लिए काफी मुश्किल थी. इसलिए कभी-कभी ब्रेक देना भी जरूरी होता है, क्योंकि आप उस खिलाड़ी को उस प्रेशर वाली सिचुएशन से भी बाहर निकालना चाहते हैं. गंभीर ने कहा कि हम हमेशा जानते थे कि जब भी हमें वर्ल्ड कप मैच में उनकी जरूरत होगी, वह आएंगे और हमारे लिए काम करेंगे.
सैमसन का प्रदर्शन
न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच टी20 मैचों की सीरीज में सैमसन ने 10, 6, 0, 24 और छह रन बनाए थे. इसके बाद वर्ल्ड कप में अमेरिका के खिलाफ बेंच पर बैठने के बाद अभिषेक शर्मा के बीमार होने की वजह से वह नामीबिया के खिलाफ अपना पहला मैच खेले, जिसमें 22 रन बनाए. इसके बाद उन्हें पाकिस्तान और नेदरलैंड्स के खिलाफ मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया. सुपर 8 में भी वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ बेंच पर बैठे और अगले मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ महज 24 रन ही बना सके. जिस वजह से उनकी काफी आलोचना हो रही थी, मगर वेस्ट इंडीज के खिलाफ करो या मरो वाले मुकाबले में उन्होंने हर किसी का मुंह बंद करा दिया है.
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