भारत एशियन गेम्स 2026 में मेडल की संख्या में इजाफा करने की कोशिश में जुटा हुआ है. नागोया में मेडल और ऐतिहासिक पलों के बीच, एशियन गेम्स की बड़ी तस्वीर में हॉकी भले ही थोड़ी पीछे छूट गई हो, लेकिन यह खेल लगातार चर्चा में बना रहा. मैदान पर भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए मेजबान जापान को 3-1 से हराया. अपने पिछले कुछ मैचों के उलट इस बार भारत को जीत के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन टीम अपनी अजेय शुरुआत को बनाए रखने में कामयाब रही. अब सेमीफाइनल में जगह बनाने की उम्मीद के साथ टीम मेडल की दौड़ में मजबूती से बनी हुई है.
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हालांकि देश में हॉकी को लेकर हालात उतने अच्छे नहीं थे.हॉकी इंडिया के अंदर चल रही सत्ता की लड़ाई का असर टीम के मैदान पर किए गए प्रदर्शन पर भी पड़ सकता था. हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट दिलीप टिर्की और सेक्रेटरी जनरल भोला नाथ सिंह के बीच तीखी खींचतान के कारण यह खेल काफी चर्चा में आ गया है. बीते दिन यह दबी हुई नाराज़गी खुलकर सामने आ गई, जब भारत के पूर्व कप्तानों और हॉकी के दिग्गजों ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उनका संदेश साफ था कि हॉकी इंडिया में सुधार की जरूरत है.
पुलिस में शिकायत दर्ज
हॉकी वर्ल्ड कप से पहले जर्सी बदलने को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही और बढ़ गया. बाद में टिर्की ने डायरेक्टर जनरल आर के श्रीवास्तव को हटा दिया और भोला नाथ को फ़ेडरेशन में अपनी ताकत की याद दिलाई.हालात तब और बदल गए जब हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट ने श्रीवास्तव और फेडरेशन के दूसरे अधिकारियों के ख़िलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने भरोसा तोड़ने (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट), चोरी, जान को खतरे में डालने और गलत तरीके से काम छोड़ने जैसे आरोप लगाए. हॉकी के दिग्गज खिलाड़ियों प्रमोद बाटला, अशोक दीवान, रोमियो जेम्स और असुंता लाकरा के लिए यह बर्दाश्त से बाहर की बात थी. उनका मानना था कि इस खेल को नए सिरे से शुरू करने की जरूरत है और इसकी शुरुआत फ़ेडरेशन के अंदर से ही होनी चाहिए. उनकी मुख्य मांग यह थी कि फ़ैसले लेने में पूर्व खिलाड़ियों की भूमिका ज़्यादा हो और जो लोग हॉकी से नहीं जुड़े हैं, उनका बढ़ता हुआ दखल बंद हो.
दिग्गजों की मांग
गर्मी और उमस भरे मौसम में दिग्गज एक साथ मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम।पहुंचे. उनके हाथों में प्लेकार्ड थे और वे बिना ज़्यादा शोर-शराबे के अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे. उन्हें स्टेडियम के अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली, इसलिए वे अपनी मांगें रखने के लिए स्टेडियम के बाहर ही जमा हुए. सुरक्षाकर्मियों ने बार-बार उनसे अपनी पहचान बताने को कहा। असुंता लाकड़ा ने जवाब दिया कि हमारे खेल की हालत ऐसी है कि पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी होने के बावजूद हमें बताना पड़ रहा है कि हम कौन हैं. इन दिग्गजों की मुख्य मांगें खेल मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपे गए एक ज्ञापन में बताई गई थीं. इंडिया टुडे के अनुसार ज्ञापन में पूर्व खिलाड़ियों ने हॉकी इंडिया में कथित तौर पर कामकाज में खामियों और 'नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट कोड 2025' का पालन न किए जाने को लेकर चिंता जताई.
उन्होंने मौजूदा एग्जीक्यूटिव कमेटी को भंग करने और एक एड-हॉक कमेटी बनाने की मांग की. इस कमेटी में भारत के पूर्व खिलाड़ी और ओलंिपियन शामिल हों, साथ ही एक रिटायर्ड जज या कानूनी विशेषज्ञ और युवा मामले और खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि ऑब्ज़र्वर के तौर पर रहें. प्रस्तावित कमेटी फेडरेशन के कामकाज की देखरेख करेगी और छह महीने के भीतर नए चुनाव कराएगी.
स्पोर्ट्स कोड को सख्ती से लागू करने की मांग
पूर्व खिलाड़ियों ने स्पोर्ट्स कोड को सख्ती से लागू करने की भी मांग की, जिसमें उम्र और कार्यकाल की सीमा, एग्जीक्यूटिव बॉडी में खिलाड़ियों का अनिवार्य 25 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, सालाना नियमों का पालन और मान्यता की शर्तें और एक स्वतंत्र चुनाव अधिकारी द्वारा चुनाव कराना शामिल है. उन्होंने मंत्रालय से 'कूलिंग-ऑफ' नियमों के उल्लंघन की समस्या को हल करने का भी आग्रह किया.मंत्रालय से यह भी कहा गया कि हॉकी इंडिया को मान्यता और फ़ंडिंग तभी दी जाए, जब वह स्पोर्ट्स कोड का पूरी तरह से पालन करे. अगर इन मांगों को मान लिया जाता है, तो हॉकी इंडिया के मौजूदा पावर स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आएगा.
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