FIH World Cup में भारतीय महिला टीम का कैसा रहा है प्रदर्शन, 15 में से 8 ही एडिशन में लिया है हिस्सा

भारतीय महिला टीम का महिला हॉकी वर्ल्ड कप में सबसे अच्छा प्रदर्शन चौथे स्थान के रूप में आया है जो उसने 1974 में पहले एडिशन में किया था. बीच में तो लगातार तीन वर्ल्ड कप के लिए यह टीम क्वालिफाई तक नहीं कर पाई थी.

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indian women hockey team

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अभी तक महिला हॉकी वर्ल्ड कप चार ही टीमों ने जीता है.

नेदरलैंड्स ने सबसे ज्यादा नौ बार महिला हॉकी वर्ल्ड कप का खिताब जीता है.

भारतीय महिला हॉकी टीम बेल्जियम और नेदरलैंड्स में होने वाले एफआईएच वर्ल्ड कप 2026 में सलीमा टेटे की कप्तानी में खेलने उतरेगी. वह नौवीं बार इस इवेंट में खेलेगी. 1974 से महिला हॉकी वर्ल्ड कप का आगाज हुआ लेकिन भारतीय टीम लगातार इस इवेंट में नहीं खेल पाई है. कुछ इवेंट में वह क्वालिफाई नहीं कर पाई तो कुछ में उसे पैसों की वजह से बाहर रहना पड़ा. 1974 में जब पहली बार महिला हॉकी वर्ल्ड कप हुआ तब भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही थी. 

Hockey WC : 1971 से शुरू होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप में भारत कितनी बार जीता खिताब?

अभी तक महिला हॉकी वर्ल्ड कप चार ही टीमों ने जीता है. नेदरलैंड्स ने सबसे ज्यादा नौ, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी के नाम दो-दो खिताब है. भारतीय टीम 2022 में वह नौवें स्थान पर रही. अब आगामी एडिशन से पहले जान लेते हैं कि अभी तक महिला वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का प्रदर्शन कैसा रहा है.

हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय महिला टीम का प्रदर्शन

1974 फ्रांस
अजिंदर कौर की कप्तानी में भारतीय टीम खेली. उसने ग्रुप स्टेज में नेदरलैंड्स जैसी टीम को हराया जिसने आगे जाकर खिताब जीता. भारतीय टीम ने चार में से तीन मैच जीते और सेमीफाइनल में जगह बनाई. वहां अर्जेंटीना ने मात दी. कांस्य पदक के मैच में वेस्ट जर्मनी से 2-0 से हार झेलनी पड़ी. 

1976, बर्लिन
भारतीय टीम वित्तीय समस्याओं के चलते दूसरे एडिशन में नहीं खेल सकी. 

1978, मेड्रिड
रुपा सैनी की कप्तानी में भारतीय टीम दूसरी बार वर्ल्ड कप का हिस्सा बनी. 10 टीमों में वह सातवें स्थान पर रही. वह पूल ए में थी और एक ही मैच जीत सकी. मेजबान स्पेन को हराकर उसने सातवां स्थान हासिल किया. 

1981, ब्यूनस आयर्स
भारतीय टीम एक बार फिर वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना सकी. एक साल पहले 1980 मॉस्को ओलिंपिक में टीम चौथे स्थान पर रही थी. 

1983, कुआला लंपुर
भारत ने 1982 में एशियन गेम्स गोल्ड जीतते हुए वर्ल्ड कप में जगह बनाई. सलमा डिसिल्वा की कप्तानी में खेलते हुए टीम इंडिया अपने ग्रुप में सबसे नीचे रही. उसे कोई जीत नहीं मिली. वह 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही. 

1986, एम्सटेलवीन
भारतीय टीम 1985 में वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स में पांचवें स्थान पर रही और वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना सकी. 

1990, सिडनी
भारत एक बार फिर से क्वालिफायर्स में ही बाहर हो गया. इस बार दिल्ली में ही क्वालिफिकेशन मैच हुए थे लेकिन निराशा ही मिली.

1994, डबलिन
भारत लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना सका. 1993 में हुए क्वालिफायर्स में भारतीय टीम छठे स्थान पर रही जबकि टॉप-5 टीमों को वर्ल्ड कप का टिकट मिला.

1998, यूट्रेख्त
प्रीतम रानी सिवाच की कप्तानी में भारतीय टीम वर्ल्ड कप में पहुंची. टीम को पूल ए में सभी पांच मैच में हार मिली और 12वें व आखिरी स्थान पर रही.

2002, पर्थ
भारतीय टीम एक बार फिर से क्वालिफायर्स में हार गई और वर्ल्ड कप में खेलने का मौका हाथ से फिसल गया.

2006, मेड्रिड
भारतीय टीम के लिए एक बार फिर से निराशाजनक परिणाम. वह 12 टीमों में 11वें पायदान पर रही. 

2010, रोजारियो
भारत को अपने पूल में केवल एक जीत मिली जो जापान के सामने थी. टूर्नामेंट का अंत नौवें स्थान के साथ किया.

2014, हेग
भारतीय टीम वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई. वह एशियन गेम्स में सेमीफाइनल में हारी और इससे वर्ल्ड कप भी छूट गया.

2018, लंदन
रानी रामपाल की कप्तानी में भारतीय टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंची. वह पूल बी में तीसरे स्थान पर रही. क्वार्टर्स में उसे आयरलैंड के सामने पेनल्टी शूटआउट में हार मिली. 

2022, एम्सटेलवीन और टेरासा
सविता पूनिया की कप्तानी में भारतीय टीम खेली. एक बार फिर से निराशाजनक अभियान रहा. टीम नौवें नंबर पर रही.

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