भारतीय हॉकी टीम पिछले कुछ समय से काफी कमाल का प्रदर्शन कर रही है. बीते दिनों टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और 2028 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक का टिकट भी हासिल कर लिया. हालांकि इसके बाद भारतीय मैंस टीम को यह ऐतिहासिक सफलता दिलाने वाले चार खिलाड़ियों के मजबूरन संन्यास की खबरें आने लगी थी. ऐसी चर्चा होने लगी कि भारत के कुछ ओलिंपिक मेडलिस्ट के लिए एशियन चैंपियंस ट्रॉफी शायद आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार मनदीप सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और नीलाकांता शर्मा के लिए भारतीय टीम की जर्सी में आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है.
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हालांकि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को ओपनिंग मैच में जीत दिलाने के बाद नीलाकांता ने संन्यास का भी ऐलान कर दिया. उन्होंने साफ कर दिया कि यह उनका आखिरी टूर्नामेंट हैं. संन्यास की इन खबरों के बीच पांच बार की चैंपियन भारत ने टूर्नामेाट में अपने खिताब के बचाव की शानदार शुरुआत की और ओलिंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने गोलों की बारिश करके बांग्लादेश को 13-0 से मात दे दी. मनदीप सिंह ने हैट्रिक लगाकर टीम की कमान संभाली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और हार्दिक सिंह ने दो-दो गोल किए.
पहला क्वार्टर: भारत ने शुरुआत से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा और खेल का ज़्यादातर हिस्सा बांग्लादेश के हाफ में ही रखा. दूसरे मिनट में हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर पर एक जबरदस्त फ़्लिक के जरिए गोल करके खाता खोला. एक मिनट बाद कप्तान के एक बेहतरीन पास पर मंदीप ने गोल करके बढ़त को दोगुना कर दिया. 10वें मिनट में मंदीप ने एक और गोल किया, जबकि पहले क्वार्टर के खत्म होने से ठीक पहले शिलानंद लकड़ा ने गोल करके स्कोर 4-0 कर दिया.
दूसरा क्वार्टर: भारत ने दूसरे क्वार्टर में भी अपना आक्रामक खेल जारी रखा. 18वें मिनट में अभिषेक ने गोल किया और 26वें मिनट में नीलाकांता शर्मा ने एक और गोल जोड़ा. बांग्लादेश के गोलकीपर अशरफुल शाद के कुछ अच्छे बचावों के बावजूद भारत हाफ-टाइम तक 6-0 की मजबूत बढ़त के साथ पहुंचा.
तीसरा क्वार्टर: तीसरे क्वार्टर में भारत ने दबाव और बढ़ा दिया. दिलप्रीत सिंह ने एक मिनट के भीतर दो गोल किए. पहले उन्होंने रिबाउंड पर गोल दागा और फिर एक जोरदार 'टोमाहॉक' शॉट से गेंद को नेट में पहुंचाया. हरमनप्रीत ने जल्द ही पेनल्टी कॉर्नर से मैच का अपना दूसरा गोल किया, जिससे भारत के गोलों की संख्या नौ हो गई.
चौथा क्वार्टर: आखिरी क्वार्टर की शुरुआत में जुगराज सिंह ने गोल किया और फिर 54वें मिनट में मनदीप ने डाइव लगाकर गेंद को डिफ्लेक्ट करते हुए अपनी हैट्रिक पूरी की. इसके बाद हार्दिक सिंह ने खेल के आखिरी पलों में दो गोल किए, जिसमें एक रिबाउंड से और दूसरा ओपन प्ले से, जिससे भारत ने 13-0 से बड़ी जीत दर्ज की.
भारत का अगला मुकाबला किससे होगा?
टूर्नामेंट में अपनी शानदार शुरुआत को बरकरार रखने के इरादे से भारत का अगला मुकाबला गुरुवार को चीन से होगा. वहीं बांग्लादेश का सामना मलेशिया से होगा.
नीलाकांता ने किया संन्यास का ऐलान
बांग्लादेश पर जीत के बाद ओलिंपिक मेडलिस्ट नीलाकांता शर्मा ने संन्यास का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि वह चैंपियनशिप के समापन के बाद इंटरनेशनल हॉकी से संन्यास ले लेंगे. नीलाकांता ने 26वें मिनट में गोल करके इस मौके को यादगार बनाया. भारतीय हॉकी टीम के लिए अपने 163वें मैच में यह उनका 20वां गोल था. उन्होंने 2017 में भारत के यूरोप दौरे के दौरान बेल्जियम के खिलाफ अपना सीनियर इंटरनेशनल डेब्यू किया और आगे चलकर भारतीय मिडफील्ड में खुद को एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि टोक्यो 2020 ओलिंपिक में रही, जहां उन्होंने भारत के ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाले अभियान के दौरान टीम के सभी आठ मैचों में हिस्सा लिया. उन्होंने टूर्नामेंट में अपना एकमात्र गोल ग्रुप चरण में मेज़बान जापान के खिलाफ भारत की 5-3 की जीत के दौरान किया. उन्होंने जर्मनी के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल वाले मैच में भी अहम भूमिका निभाई. भारत के 1-0 से पीछे रहने के दौरान उन्होंने जवाबी हमला किया और 17वें मिनट में सिमरनजीत सिंह को गोल करने का मौका दिया, जिससे स्कोर बराबर हो गया और फिर भारत ने 5-4 से जीत दर्ज की और 41 सालों में अपना पहला ओलंपिक हॉकी पदक हासिल किया.
ये खिलाड़ी भी ले सकते हैं संन्यास
27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक चलने वाली एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के आगाज से पहले एक रिपोर्ट के अनुसार मनदीप सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और नीलाकांता शर्मा के लिए भारत के लिए आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है. जिसमें से नीलाकांता संन्यास का ऐलान कर चुके हैं. अब देखना होगा कि बाकी के खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर क्या फैसला लेते हैं. हॉकी इंडिया की सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन आरपी सिंह ने खिलाड़ियों के नाम तो नहीं बताए थे, मगर उन्होंने यह कन्फर्म किया था कि कम से कम छह खिलाड़ी चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के लिए अपने आखिरी मैच खेल सकते हैं. उनका कहना था कि कि अब टीम में नए खिलाड़ियों को लाने का समय आ गया है. उनका मानना था कि वे खिलाड़ी सम्मानजनक विदाई के हकदार हैं. उनका कहना था कि ओलिंपिक में दो साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में कोचिंग स्टाफ को उन्हें तैयार करने के लिए काफ़ी समय मिल जाएगा.
संन्यास का दबाव नहीं
ऐसा कहा जा रहा था कि इन खिलाड़ियों को संन्यास के लिए मजबूर किया जा रहा है. हालांकि नीलाकांता का कहना है कि उन्होंने बिना किसी दबाव के संन्यास का फैसला लिया है. उनका कहना है कि संन्यास का फैसला उनका खुद का है. उन्होंने एशियन गेम्स के बाद ही यह फैसला ले लिया था और कोच ग्रेग फुल्टन को बताया दिया था. उन पर किसी ने दबाव नहीं डाला. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने संन्यास के बाद की अपनी योजनाएं भी बना ली है. उन्होंने खेल विभाग में नौकरी चुनी, ताकि अगले पीढ़ी के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग कर सकें.
भारत की नजर खिताब बचाने पर
भारतीय टीम की नजर खिताब बचाने पर है. भारत ने 2024 में चीन को 1-0 से हराकर खिताब जीता था.
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के अब तक के विजेता
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