तीन पोल वॉल्टर और दो हेप्टाथलीट समेत कुल पांच भारतीय खिलाड़ियों के लिए 12 घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. इंडियन इंडोर ओपन कंबाइंड इवेंट्स एंड पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद भुवनेश्वर से सेलम लौटते वक्त 22 घंटे की इस यात्रा के शुरुआती बारह घंटे तो उन सभी के लिए सही रहे, जब यह यात्रा समाप्त हुई, तब तक उनमें से दो एथलीट एक दूसरी ट्रेन में सवार गए, तीन आंध्र प्रदेश के एक रेलवे स्टेशन पर फंस गए और उन सभी ने अपनी आंखों के सामने चलती हुई ट्रेन से अपने पोल पटरियों पर गिरते हुए देखे थे.
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इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार रिजर्वेशन की भीड़ के कारण यह ग्रुप दो सीटों पर सफर कर रहा था. उनके पास आठ पोल थे, जिनमें से हर एक की कीमत एक लाख रुपये से ज़्यादा थी और अंदर जगह कम होने की वजह से उन्होंने उन्हें अपने रिज़र्व्ड स्लीपर कोच की खिड़की से बांध दिया था. कुछ घंटे तो सब सही रहा, मगर परेशानी आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी स्टेशन पर शुरू हुई. एक यात्री ने शिकायत की और रेलवे पुलिस बल के जवानों ने पोल्स को बांधने वाली रस्सियां काट दीं. जैसे ही ट्रेन स्टेशन से आगे बढ़ने लगी, खंभे फिसलकर पटरी पर गिरने लगे.
चलती ट्रेन से कूदे
मौजूदा U20 फेडरेशन कप चैंपियन और ग्रुप के तीन पोल वॉल्टर्स में से एक कविनराजा ने सोचने में जरा भी देर नहीं की और पोल्स को टूटने से बचाने के लिए चलती ट्रेन से कूद गए. दो और एथलीटों भी उसे देखकर कूद गए. डिब्बे के अंदर चौथे खिलाड़ी ने इमरजेंसी चेन खींच दी और खिलाड़ियों ने अपना सामान पहियों के नीचे आकर खराब होने से पहले ही निकाल लिया.
तीन खिलाड़ी घंटों स्टेशन पर रहे
रिपोर्ट के अनुसार कविन राजा का कहना है कि RPF के जवानों और रेलवे अधिकारियों ने खिलाड़ियों से उनकी जानकारी मांगी. जानकारी देने के बाद केविन, विशाल और शक्ति को अधिकारियों के साथ प्लेटफ़ॉर्म पर बने रेलवे पुलिस स्टेशन चलने को कहा गया. उन्होंने अपना सामान लेने की इजाजत मांगी, जो अभी भी ट्रेन में ही था. उनकी यह गुजारिश ठुकरा दी गई. ट्रेन उनके बैग और बाकी दो खिलाड़ियों को लेकर सलेम के लिए रवाना हो गई.
छह घंटे बाद जाने की इजाजत
कविन राजा का कहना है कि अधिकारी उनके साथ बदतमीजी से पेश आए. उनके सीनियर खिलाड़ी शक्ति उन्हें लगातार समझाते रहे कि पोल क्यों बांधे गए थे और वे कहां से लाए गए थे, लेकिन उन्होंने उनकी एक भी बात नहीं सुनी. वह सभी वहां अपने पोल लिए खड़े रह गए. वह बार बार अपना सामान लेने की गुजारिश कर रहे थे. मगर अधिकारी उन पर जुर्माना लगाने की बात कर रहे थे. इसके बाद भारतीय रेलवे के सेलम डिवीजन में कमर्शियल-कम-टिकट क्लर्क शक्ति ने रेलवे कर्मचारी के तौर पर अपने पहचान पत्र दिखाया तो अधिकारियों का रवैया बदल गया. लगभग छह घंटे और अधिकारियों को एक लिखित जवाब सौंपने के बाद उन तीनों को जाने की इजाजत मिली और फिर वह एक दूसरी ट्रेन से चेन्नई लौटे.
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