खेल के मैदान पर भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कुछ खास अच्छे नहीं है. क्रिकेट में तो दोनों टीमें ना तो एक दूसरे से हाथ मिलाती है और ना ही सालों से बाइलेटरल सीरीज खेल रही है. यहां तक कि दोनों आईसीसी इवेंट के लिए भी एक दूसरे के देश नहीं जाती और उनके मैच न्यूट्रल वेन्यू पर खेल जाते हैं. हॉकी में भी कुछ ऐसी ही है. पंजाब में होने वाले एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान ने भारत आने से मना कर दिया और टूर्नामेंट से टीम हट गई. उनकी जगह बांग्लादेश को शामिल किया गया. जहां दूसरे खेलों में भारत और पाकिस्तान के रिश्ते खराब है, वहीं टेनिस कोर्ट पर भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने मिलकर खिताब जीत लिया. भारतीय टेनिस खिलाड़ी अमृत वत्स और पाकिस्तान के मोहम्मद याह्या ने जिबूती में ITF वर्ल्ड टेनिस टूर जूनियर्स J30 टूर्नामेंट में लड़कों का डबल्स खिताब जीता है. इस जोड़ी ने थाईलैंड के डेविड अवायो और सऊदी अरब के अहमद बहा सरोजी को सीधे सेटों में 6-2, 6-4 से हराया. अमृत और याह्या टेनिस टूर्नामेंट के लिए टीम बनाने वाले अपने-अपने देशों के पहले टेनिस खिलाड़ी नहीं हैं. भारत के रोहन बोपन्ना और पाकिस्तान के ऐसाम-उल-हक कुरैशी की जोड़ी टेनिस की सबसे मशहूर डबल्स जोड़ियों में से एक थी. उनकी जीत से रोहन बोपन्ना और ऐसाम-उल-हक कुरैशी की मशहूर भारत-पाकिस्तान डबल्स जोड़ी की यादें ताज़ा कर दी, जिन्हें इंटरनेशनल टेनिस सर्किट पर उनकी कामयाबी के लिए "इंडो-पाक एक्सप्रेस" का निकनेम मिला था.
ADVERTISEMENT
सानिया के 22 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने वाली कौन हैं 17 साल की खिलाड़ी?
'इंडो-पाक एक्सप्रेस'
बोपन्ना और कुरैशी टेनिस की सबसे मशहूर डबल्स टीमों में से एक बन गए थे. वे 2010 के US ओपन के मेन्स डबल्स फाइनल तक पहुंचे थे, जहां उन्हें ब्रायन ब्रदर्स से हार का सामना करना पड़ा था. इस जोड़ी ने साथ मिलकर पांच ATP टाइटल जीते, जिनमें 2011 का पेरिस मास्टर्स और दुबई, जोहानिसबर्ग, हाले और स्टॉकहोम के टूर्नामेंट शामिल हैं. दोनों खिलाड़ी डबल्स रैंकिंग में टॉप 10 में भी पहुंचे थे. टेनिस के अलावा
उन्होंने अपनी पार्टनरशिप का इस्तेमाल भारत और पाकिस्तान के बीच शांति को बढ़ावा देने के लिए किया. इसके लिए उन्होंने 'स्टॉप वॉर, स्टार्ट टेनिस' कैंपेन चलाया. अपना संदेश फैलाने के लिए उन्होंने खास तौर पर डिज़ाइन की गई टी-शर्ट पहनीं और अपनी कोशिशों के लिए 2010 में 'आर्थर ऐश ह्यूमैनिटेरियन ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड जीता. अमृत और याह्या की हालिया कामयाबी उस दौर की याद दिलाती है जब दोनों पड़ोसी देशों के खिलाड़ी राजनीतिक तनाव के बावजूद एक साथ मुक़ाबला कर सकते थे. रोहन बोपन्ना और ऐसाम-उल-हक कुरैशी आखिरी बार 17 मार्च 2021 को अकापुल्को में मैक्सिकन ओपन में एक टीम के तौर पर खेले थे, जहां वे राउंड ऑफ़ 16 में हार गए थे.
बोपन्ना और कुरैशी ने साथ मिलकर जीते खिताब
- साउथ अफ्रीका टेनिस ओपन- 2010
- हाले ओपन- 2011
- स्टॉकहोम ओपन- 2011
- पेरिस मास्टर्स- 2011
- दुबई टेनिस चैंपियनशिप- 2014
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख अपनाया. यहां तक कि क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच आम तौर पर होने वाली हैंडशेक (हाथ मिलाना) की रस्म भी चर्चा का विषय बन गई. भारत ने पाकिस्तान से हाथ मिलाने से इंकार कर दिया. वहीं पाकिस्तान ने भी अलग-अलग खेलों में भारत में मैच खेलने से इनकार किया है.
हाथ मिलाने की रस्म खत्म
अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमले और उसके बाद सैन्य तनाव बढ़ने के कारण दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए. 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई थी. जिसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक सैन्य अभियान से इस हमले का जवाब दिया और आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया. भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तहस नहस कर दिया था, जिससे पाकिस्तान बौखला गया था. इस एक्शन के बाद 14 सितंबर 2025 को एशिया कप के मुकाबले में सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा ने हाथ नहीं मिला. यहां तक कि जीत के बाद भी टीम इंडिया ने पाकिस्तान से हाथ नहीं मिलाया था. इसके बाद तो भारत की हर क्रिकेट टीम ने इस सिलसिले को बरकरार रखा. एशिया कप में भारत और पाकिस्तान की टीम तीन बार आमने सामने हुई थी और तीनों ही बार भारत के हाथ नहीं मिलाया. एशिया कप के बाद 15 फरवरी 2026 को आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप मैच और फिर एशियन गेम्स में भी भारत अपने रुख पर कायम रहा.
मैंस टीम के बाद भारत की वीमेंस टीम ने भी पाकिस्तान से हाथ ना मिलाने का सिलसिला जारी रखा. दोनों टीमें जब पांच अक्टूबर 2025 को महिला वर्ल्ड कप में आमने- सामने हुई थी तो नो हैंडशेक की पॉलिसी जारी रही. सितंबर में महिला एशिया कप में भी यह पॉलिसी जारी रही. सिर्फ भारत की सीनियर पुरुष और महिला टीम ने ही पाकिस्तान से हाथ ना मिलाने का सिलसिला जारी नहीं रखा, बल्कि अंडर 19 टीम ने भी यही रुख अपनाया. दिसंबर 2025 में हुए अंडर-19 एशिया कप और इस साल के अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत की युवा टीम ने पाकिस्तान से हाथ नहीं मिलाया था. जिबूती में अमृत और याह्या की जीत दोनों देशों के बीच के बड़े मतभेदों को खत्म तो नहीं करती, लेकिन यह दिखाती है कि खेल किस तरह सीमाओं के पार सहयोग के पल बना सकता है.
पाकिस्तान टीम टूर्नामेंट से हटी
17 साल बाद पंजाब में इंटरनेशनल हॉकी की वापसी हो रही है और इस महीने के आखिर एशियन चैंपियंस ट्रॉफी खेली जाएगी. यह टूर्नामेंट छह टीमों के बीच खेला जाता है. पाकिस्तान पहले इस टूर्नामेंट का हिस्सा था, मगर भारत के मेजबान होने के कारण वह इस टूर्नामेंट से हट गया और टूर्नामेंट में बांग्लादेश ने उसे रिप्लेस किया, जो इतिहास में दूसरी बार इस टूर्नामेंट में खेलेगा. 2021 में बांग्लादेश की टीम 5वें स्थान पर रही थी. भारत ने सबसे ज्यादा पांच बार तो पाकिस्तान ने तीन बार इस खिताब को जीता है. 2018 में दोनों ने संयुक्त रूप से इस खिताब को जीता था, क्योंकि फाइनल बारिश के कारण धुल गया था और दोनों देशों को संयुक्त विजेता घोषित किया गया था. भारत की अब नजर अपने छठे खिताब पर है.
ADVERTISEMENT











