माया राजेश्वरन रेवती..., 11 अक्टूबर के बाद से ही ये नाम काफी चर्चा है. 17 साल की इस खिलाड़ी ने वो कामल करके दिखा दिया, जो पिछले दो दशकों से कोई नहीं कर पाया. माया ने ITF W35 लागोस टूर्नामेंट में अपना पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीतकर भारतीय टेनिस में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. 17 साल की इस खिलाड़ी ने फ़ाइनल में स्पेन की सेलिया सर्विनो रुइज़ को 6-4, 6-2 से हराया और W35 लेवल पर सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बन गईं. ऐसा करके उन्होंने पूर्व भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के 22 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया. माया की कामयाबी की तुलना सानिया की 2004 की उस बड़ी सफलता से की जा सकती है, जब उन्होंने 17 साल और 10 महीने की उम्र में नाइजीरिया के लागोस में एक टाइटल जीता था. माया ने 17 साल और तीन महीने की उम्र में पुर्तगाल में टाइटल जीतकर वह रिकॉर्ड तोड़ दिया. उन्होंने डबल्स में भी कामयाबी हासिल की और यूक्रेन की येलीज़ावेता कोट्लियार के साथ मिलकर टाइटल जीता, जिससे यह युवा भारतीय खिलाड़ी के लिए एक यादगार टूर्नामेंट बन गया.
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कौन हैं माया राजेश्वरन रेवती?
12 जून 2009 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में जन्मीं माया राजेश्वरन रेवती का टेनिस का सफर आठ साल की उम्र में शुरू हुआ था. उनके पिता ने उन्हें पहली बार इस खेल से परिचित कराया. उनका मकसद उनमें अनुशासन और फिटनेस की आदत डालना था. हालांकि जल्द ही माया की इस खेल में गहरी दिलचस्पी हो गई और 10 साल की उम्र तक उन्होंने टेनिस को गंभीरता से अपनाने का फैसला कर लिया. उनके परिवार ने इस लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई. जैसे-जैसे ट्रेनिंग का दबाव बढ़ा, माया ने होम-स्कूलिंग अपना ली, जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई और कोर्ट पर घंटों की प्रैक्टिस के बीच संतुलन बनाने में मदद मिली.
उन्होंने भारत में 'प्रो सर्व टेनिस अकादमी' में ट्रेनिंग ली और 2025 मुंबई ओपन में सबका ध्यान खींचने से पहले कई ITF जूनियर खिताब जीते. 15 साल की उम्र में वाइल्डकार्ड एंट्री के तौर पर खेलते हुए उन्होंने WTA 125 इवेंट के सेमीफाइनल में पहुंचकर जाने-माने खिलाड़ियों को चौंका दिया. इस बड़ी कामयाबी ने उन्हें इंटरनेशनल पहचान दिलाई और स्पेन के मैलोर्का में 'राफा नडाल अकादमी' में ट्रेनिंग करने का मौका भी दिया. जूनियर ग्रैंड स्लैम में हिस्सा लेने और यूरोपियन क्ले कोर्ट पर शानदार प्रदर्शन के साथ उनकी आगे बढ़ने का सफर जारी रहा. अक्टूबर 2026 में उन्होंने ITF W35 लागोस टूर्नामेंट में अपना पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की. इस जीत के साथ वह उस लेवल पर यह उपलब्धि हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी बनीं और सानिया मिर्ज़ा के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
मेन ड्रॉ में नहीं गंवाया एक भी सेट
माया राजेश्वरन रेवती ने जूनियर और प्रोफेशनल टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके भारत की सबसे टैलेंटेड युवा खिलाड़ियों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक अक्टूबर 2026 में मिली, जब 17 साल की इस खिलाड़ी ने पुर्तगाल में ITF W35 लागोस सिंगल्स का खिताब जीता. टूर्नामेंट से पहले दुनिया में 1038वें नंबर पर रहने वाली माया ने मेन ड्रॉ के लिए क्वालिफ़ाई किया, फिर पहले राउंड में नंबर वन सीड जस्टिना मिकुल्स्किते को हराया और उसके बाद ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को भी मात दी. उन्होंने मेन ड्रॉ में एक भी सेट नहीं गंवाया. माया ने यूक्रेन की येलीज़ावेता कोट्लियार के साथ मिलकर चीन की मिन लियू और इटली की कार्लोटा मोसिया को 0-6, 6-2, 10-7 से हराकर डबल्स का खिताब भी जीता और टूर्नामेंट में सिंगल्स और डबल्स दोनों जीतकर शानदार कामयाबी हासिल की. उनकी यह सफलता एक बेहतरीन जूनियर सीजन के बाद मिली, जिसमें उन्होंने J300 बोलियो सुरमे इवेंट में अपना आठवां जूनियर सिंगल्स खिताब जीता और ITF जूनियर रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर 16 की अपनी अब तक की सबसे ऊंची रैंकिंग हासिल की.
माया राजेश्वरन की उपलब्धियां
माया ने पहली बार 2025 में टेनिस की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था, जब 15 साल की उम्र में बिना किसी रैंकिंग वाली वाइल्डकार्ड खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने WTA 125 मुंबई ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. इस दौरान उन्होंने कई ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को हराया था. इस शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें स्पेन की राफ़ा नडाल एकेडमी में ट्रेनिंग का मौका मिला, जिससे उन्हें इंटरनेशनल लेवल के टेनिस का अहम अनुभव मिला. इसके बाद से वह जूनियर सर्किट में लगातार आगे बढ़ती रही हैं. उन्होंने 2026 US ओपन में डबल्स के सेमीफाइनल और विंबलडन में क्वार्टर फाइनल तक का सफ़र तय किया. जर्मनी में यूरोपियन क्ले कोर्ट पर ग्रेड 2 जूनियर टूर्नामेंट में उनकी जीत ने अलग-अलग तरह की सतहों पर खेलने की उनकी काबिलियत को और साबित किया, जिससे उनके करियर की शुरुआती उपलब्धियों की लिस्ट और भी शानदार हो गई.
माया ने सानिया के लिए क्या कहा
माया का मानना है कि उनका पहला प्रोफ़ेशनल सिंगल्स टाइटल सीनियर सर्किट में उनके सफर की बस शुरुआत है. साथ ही उनका यह भी कहना है कि पूर्व वर्ल्ड नंबर एक डबल्स खिलाड़ी सानिया मिर्जा से आगे निकलने का तो सवाल ही नहीं उठता, जिन्हें वह अपना आदर्श मानती हैं. जीत के बाद माया ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि असल में सानिया मिर्जा से आगे निकल सकते हैं, क्योंकि वह एक लेजेंड हैं और हमेशा लेजेंड ही रहेंगी. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए वह अब भी कई मायनों में उन्हें अपना आदर्श मानती हैं, क्योंकि उन्होंने ही इतने सालों बाद देश में टेनिस को पहचान दिलाई है. माया दिग्गज टेनिस स्टार सानिया के सभी पॉडकास्ट और इंटरव्यू सुनती हैं.
सानिया मिर्जा की उपलब्धियां
देश में महिला टेनिस को एक अलग मुकाम तक पहुंचाने का सबसे बड़ा क्रेडिट सानिया मिर्जा को दिया जाता है. वह डबल्स में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी भी रह चुके हैं. जबकि सिंगल्स में वह 27वीं रैंकिंग तक पहुंची थी, जो उनके सिंगल्स करियर की सबसे ऊंची रैंकिंग रही. हालांकि उन्होंने डबल्स में अपना दबदबा बनाया. उन्होंने डबल्स में 43 खिताब जीते. वह तीन- तीन बार डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में ग्रैंड स्लैम जीत चुकी हैं.
ग्रैंड स्लैम डबल्स में बेस्ट परिणाम
ऑस्ट्रेलियन ओपन- विजेता (2016)
फ्रेंच ओपन- फाइनल (2011)
विंबलडन- विजेता (2015)
यूएस ओपन- विजेता (2015)
ग्रैंड स्लैम मिक्स्ड डबल्स में बेस्ट परिणाम
ऑस्ट्रेलियन ओपन-विजेता (2009)
फ्रेंच ओपन- विजेता (2012)
विंबलडन- सेमीफ़ाइनल (2022)
यूएस ओपन- विजेता (2014)
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