जिस उम्र में बच्चों को नए- नए खिलौनों से खेलने का शौक होता, उस उम्र में कुछ चैंपियन बन गए है. हाल में आइची नागोया में हुए एशियन गेम्स में कुछ सबसे बड़ी जीतें युवा खिलाड़ियों ने हासिल की हैं. इस खिलाड़ियों की उम्र में हर किसी को हैरान कर दिया. एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाला कोई खिलाडी 11 तो काई 12 साल का था. बचपन में ही इन खिलाड़ियों ने अपने देशों को ऐतिहासिक गोल्ड मेडल दिला दिए, कई बड़े रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया और खेल के मैदान में अपनी मजबूत पहचान बनाई. कहने को ये बच्चे अपने से दोगुनी या तिगुनी उम्र के खिलाड़ियों को देखकर घबराए नहीं, बल्कि शांत और बेफिक्र रहे. एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में भारतीय खिलाड़ी भी शामिल हैं.
कू योंग-यान: पुरुषों के स्केटबोर्डिंग पार्क इवेंट में ताइपे के कू योंग-यान ने 87.33 पॉइंट्स के साथ सिल्वर मेडल जीता. वह उन कई टीनएजर्स (और उनके मामले में, टीनएज से भी कम उम्र के बच्चों) में से एक थे, जिन्होंने इन गेम्स में स्केटबोर्डिंग में मेडल जीते. जापान के 15 साल के इज़ुरु नागाहारा ने इस इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. चीन की 15 साल की झू युआनलिंग ने महिलाओं की स्ट्रीट स्केटबोर्डिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता. चीन की काओ शिकी महिलाओं के स्केटबोर्डिंग पार्क इवेंट में चौथे स्थान पर रहीं और इन गेम्स में चीन की टीम की सबसे कम उम्र की एथलीट थीं.
यू ज़िडी: सिर्फ 13 साल की उम्र में चीन की यू ज़िडी को महिला 'मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर' (MVP) चुना गया. उन्होंने अपने शानदार डेब्यू में तीन गोल्ड मेडल जीते और उतने ही एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी तोड़े. इस स्कूली छात्रा ने महिलाओं की 200 मीटर बटरफ़्लाई, और 200 मीटर व 400 मीटर इंडिविजुअल मेडले (IM) इवेंट्स में शानदार जीत हासिल की और अपनी प्रतिद्वंद्वियों पर बड़ी बढ़त बनाए रखी. 200 मीटर IM में उनका समय 2 मिनट 6.10 सेकंड (2:06.10) रहा, जो एक वर्ल्ड जूनियर रिकॉर्ड है और अब तक का दूसरा सबसे तेज समय है. MVP चुने जाने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वह कोई 'प्रॉडिजी' (असाधारण प्रतिभा वाली) हैं. जैसा कि लोग कहते हैं. वह कड़ी ट्रेनिंग करती रहेंगी, खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करेंगी और पूरे एशिया के युवा एथलीटों के साथ मिलकर काम करेंगी, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं को खेलों, खासकर तैराकी, से जुड़ने और उसमें हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर सकें.
चोई जी-उन: कोरिया के टीनएज सेलर चोई जी-उन ने लड़कों के डिंगी इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. वह महज 15 साल के हैं. इसके साथ ही वे कोरिया के
सबसे कम उम्र के गोल्ड मेडलिस्ट बन गए. चोई ने मुख्य मेजबान शहर नागोया से लगभग 50 किलोमीटर (31 मील) दक्षिण-पूर्व में स्थित गामागोरी के काइयोह यॉट हार्बर में हुए इवेंट के फ़ाइनल में पहला स्थान हासिल किया. 15 साल के इस एथलीट ने एशियन गेम्स में कोरियाई दल के सबसे कम उम्र के गोल्ड मेडलिस्ट होने का रिकॉर्ड बनाया.
इन खेलों में रचा इतिहास
- निशानेबाज नीरू ढांडा ने महिलाओं का ट्रैप व्यक्तिगत का गोल्ड जीता. 1978 में रणधीर सिंह के बाद व्यक्तिगत ट्रैप गोल्ड के लिए भारत का 48 साल का इंतजार खत्म किया.
- भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 के बाद पहली बार गोल्ड जीता और ओलिंपिक 2028 के लिए क्वालिफिकेशन पक्का किया.
- भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पहली बार सफलतापूर्वक खिताब का बचाव किया.
- अंकिता भकत, कीर्ति, कुमकुम अनिल मोहोड की तिकड़ी ने महिला टीम रिकर्व में गोल्ड जीता. एशियाड में महिला टीम के लिए यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है.
- कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता.
- प्रणवी उर्स व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर हैं.
- अनाहत सिंह स्क्वॉश में महिला सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.
- बरनिका एलंगोवन महिलाओं की पोल वॉल्ट ने ब्रॉन्ज जीता और वह महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.
- शूटिंग में राइज़ा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान और परिनाज़ धालीवाल की तिकड़ी ने महिलाओं की स्कीट टीम ब्रॉन्ज जीता, एशियाई खेलों के इतिहास में महिलाओं की स्कीट टीम का यह भारत का पहला पदक था.
- शूटिंग में अनंतजीत सिंह नरुका, परिनाज़ धालीवाल का ब्रॉन्ज भारत का पहला मिक्स्ड टीम मेडल था.
- मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में सुचिका तरियाल का महिलाओं के ट्रेडिशन में ब्रॉन्ज एशियाई खेलों में MMA में भारत का यह पहला मेडल था.
- सतनाम सिंह, सलमान खान का पुरुषों के डबल स्कल्स में ब्रॉन्ज इस इवेंट में भारत का पहला रोइंग मेडल था.




