भारत की 36 साल की सुचिका तारियाल ने रविवार को एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया.सुचिका ने मिक्सड मार्शल आर्ट्स में मेडल पक्का किया. सुचिका जब 12 साल की थी, तब छेड़छाड़ की एक घटना ने उनको परेशान कर दिया और उन्होंने उसी समय कसम खा ली थी कि उन्हें लड़ना सीखना होगा.इस घटना के 24 साल बाद उन्होंने जूडो मैट से एशियन गेम्स के पोडियम तक सफर तय किया. उन्होंने रविवार को मंगोलिया की अल्तांचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर महिलाओं के पारंपरिक मिक्स्ड मार्शल आर्ट (एमएमए) के 60 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश करके भारत के लिए पदक पक्का किया.
आत्मरक्षा के लिए सीखना शुरू किया जूडो
उनका यह सफर हरियाणा के रोहतक से शुरू हुआ.जब वह 12 साल की थी, तब छेड़छाड़ की एक घटना ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने आत्मरक्षा के लिए जूडो सीखना शुरू किया.सुचिका ने इसके बाद जूडो में करियर बनाया. उन्होंने 20 से अधिक इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया और आठ बार नेशनल चैंपियन बनी. 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने जूडो में हिस्सा था. इसके अगले साल यानी 2023 एशियन गेम्स में सुचिका ने कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.सुचिका ने जिउ-जित्सु में भी हाथ आजमाए और इस खेल में भी अपनी विशेष छाप छोड़ी. उन्होंने 2024 जेजेआईएफ जिउ-जित्सु विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं के 63 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता.
एमएमए में उनका सफर काफी पहले 2017 में शुरू हो गया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने सात साल का ब्रेक लिया और इस दौरान जूडो और जिउ-जित्सु में प्रतिस्पर्धा करना जारी रखा. कॉम्पिटिटिव स्पोर्ट्स से दूर होने के बाद दोस्तों के कहने पर उन्होंने वापसी की और MMA को चुना और अपने करियर का एक नया अध्याय शुरू किया.




