कभी प्रैक्टिस के लिए समय पर पहुंचने के लिए सुबह सवा पांच बजे की बस के हिसाब से अपनी ज़िंदगी चलाने वाले मुंबई के क्लब क्रिकेटर विनय अय्यर शुक्रवार को आइची-नागोया एशियन गेम्स में जापान की महिला क्रिकेट टीम के कोच के तौर पर बाउंड्री रोप के दूसरी तरफ होंगे और उनके सामने होगी भारतीय महिला टीम. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मुंबई मेंर रहते हुए उनकी दिनचर्चा प्रैक्टिस, कॉलेज, काम और क्रिकेट के आसपास ही घूमती रहती थी.कुछ समय तक तो अय्यर ने यह सब जारी रखा,लेकिन दूरी की वजह से उन्हें यह छोड़ना पड़ा. लगभग दो दशक बाद क्रिकेट उन्हें एक और सफर पर, एक और देश में और ऐसी स्थिति में ले आया है, जिसकी कल्पना उन्होंने मुंबई के मैदानों में खेलने वाले एक युवा खिलाड़ी के तौर पर शायद ही कभी की होगी.
काफी लंबा रहा सफर
ठाणे के रहने वाले और मुंबई क्रिकेट के कड़े माहौल में पले-बढ़े अय्यर के लिए यह सफर काफी लंबा रहा. अय्यर ने सुंदर क्रिकेट क्लब के लिए कांगा लीग खेली और अपनी कॉलेज टीम को इंटर-कॉलेज टूर्नामेंट जिताने में कप्तानी की.उनके बचपन के कोचों में से एक भारत के पूर्व क्रिकेटर अशोक मंकड ने उन्हें रणजी में खेलने के मौकों के लिए प्रेरित किया.नेवी के जरिए आगे बढ़ने का एक रास्ता देर से शुरू हुआ और घर पर पैसे कमाने का दबाव भी था.मंकड ने इसके बजाय केरल जाने का सुझाव दिया, जहां अय्यर को स्टेट क्रिकेट में खेलने का मौका मिल सकता था. उनके माता-पिता इस बात से सहमत नहीं थे.अय्यर हंसते हुए कहते हैं कि उनके पिता का कहना था कि वह यहां से वहां जाएंगे तो राशन कार्ड भी बदलना पड़ेगा.
खेल के ऊपर नौकरी चुनी
आखिरकार मांकड़ ने उन्हें 'रोज़ी ब्लू' के बारे में बताया, जो एक डायमंड ट्रेडिंग कंपनी थी और 'टाइम्स शील्ड' में खेलती थी.उन्हें खेलने के कॉन्ट्रैक्ट और नौकरी में से एक को चुनने का मौका मिला, तो अय्यर ने नौकरी चुनी.वे कहते हैं कि उस दिन उन्होंने काम करना शुरू किया. वह अभी भी उसी कंपनी में हैं.इस फैसले से उनका क्रिकेट का सफर खत्म नहीं हुआ.बल्कि यह उन्हें एक अलग रास्ते पर जापान ले गया. 'रोज़ी ब्लू' ने अय्यर को सबसे पहले 2009 में तीन महीने के लिए जापान भेजा.फिर 2011 में टोक्यो में आए भूकंप से सुरक्षित बचने के बाद 2013 में उन्हें पक्की नौकरी का ऑफर दिया.भूकंप के बाद उन्होंने शुरू में कहा था कि मैं वापस नहीं आएंगे,लेकिन वे वापस आए और उन्हें पता चला कि जापान में भी क्रिकेट खेला जाता है.वे कहते हैं कि जब उन्हें पता चला कि जापान में क्रिकेट होता है तो उन्होंने नेशनल टीम में जगह बनाने की कोशिश करले के बारे में सोचा.
सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी
उन्होंने टोक्यो के एक क्लब मैक्स CC को जॉइन किया. 2015 में वह लीग में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना गया. जब नेशनल टीम में जगह मिलने की उम्मीद जगी, तो जापान क्रिकेट एसोसिएशन ने नियम बदलकर विदेशियों के खेलने पर रोक लगा दी.हार मानने के बजाय अय्यर ने 'कावासाकी नाइट राइडर्स' टीम बनाई.सीनियर टीम बनाने के लिए पहले युवा टीमें तैयार करना जरूरी था और अंडर-12, अंडर-15 और अंडर-19 खिलाड़ियों को कोचिंग देते हुए उन्हें अपना अगला करियर मिल गया. कोविड के बाद जापान ने फिर से पात्रता के नियम बदले और 2021 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया.जल्द ही कंधे की चोट के कारण उनका खिलाड़ी के तौर पर करियर खत्म हो गया और उन्होंने कोचिंग शुरू कर दी.पहले जापान की पुरुषों की अंडर-16 टीम के साथ, और फिर असिस्टेंट के तौर पर अंडर-19 टीम के साथ.




