पेर‍िस ओल‍िंप‍िक में विनेश फोगाट से लेकर एश‍ियन गेम्स 2026 में वरुण सान्याल तक, कॉम्बैट स्पोर्ट्स में वजन कम करना क्यों होता है मुश्किल?

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 वरुण सान्याल को मेडिकल तौर पर अनफिट घोषित कर दिया गया. (PC: Varun Sanyal Instagram/ getty)
वरुण सान्याल को मेडिकल तौर पर अनफिट घोषित कर दिया गया. (PC: Varun Sanyal Instagram/ getty)

Story Highlights:

वरुण सान्याल को मेडिकल तौर पर अनफिट घोषित कर दिया गया.

सान्याल वजन कम करने की कोशिश के दौरान सॉना में बेहोश हो गए थे.

कॉम्बैट ख‍िलाड़‍ियों के लिए मुकाबला सिर्फ रिंग या मैट पर कदम रखने के बाद ही शुरू नहीं होता, बल्क‍ि असली मुकाबला तो इससे पहले शुरू होता है और हर ख‍िलाड़ी इस बात को बखूबी जानता है. एश‍ियन गेम्स 2026 से बाहर होने वाले मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइटर वरुण सान्याल भी यह बात जानते हैं. सान्याल का एश‍ियन गेम्स में सफर सही से शुरू होने से ठीक पहले अचानक खत्म हो गया, क्योंकि क्वार्टर-फाइनल मुकाबले से पहले उन्हें मेडिकल तौर पर अनफिट घोषित कर दिया गया. बताया जा रहा है कि सान्याल वजन कम करने की कोशिश के दौरान सॉना में बेहोश हो गए थे. इस सेशन के लगभग 30 मिनट बाद उन्हें हल्का सिरदर्द, चक्कर आना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी तकलीफें हुईं. मेडिकल जांच में हल्की डिहाइड्रेशन का पता चला और उनके ब्लड टेस्ट में ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) का स्तर नॉर्मल रेंज के ऊपरी छोर पर पाया गया.


वजन क्यों और कैसे कम करते हैं?

वेट-इन (वज़न की जांच) से पहले एथलीट जॉगिंग करते हैं, कई परत वाले कपड़े पहनते हैं, कार्डियो करते हैं, भारी कंबल ओढ़कर सोते हैं या सॉना में बैठते हैं ताकि शरीर का पानी कम हो सके, क्योंकि इस तरीके से फ़ैट, कार्बोहाइड्रेट या मसल्स तेज़ी से बर्न नहीं होते.इससे वज़न तो कम हो जाता है, लेकिन शरीर पर बहुत ज़्यादा दबाव भी पड़ता है. एशियन गेम्स के दौरान कई एथलीट इस प्रक्रिया से गुजरते हैं क्योंकि वे रेसलिंग, जूडो, MMA, वुशु, बॉक्सिंग और ताइक्वांडो जैसे कॉम्बैट स्पोर्ट्स में हिस्सा लेते हैं. 

निखिल लाटे ने कहा कि अगर आप 52 किग्रा कैटेगरी में हिस्सा ले रहे हैं और आपका सामान्य वजन 56kg है, तो आपको लगभग चार किलो वज़न कम करना होगा. ए‍क रात में इतना वजन कम करना नामुमकिन होता है.बेहतर तरीका यह है कि वजन कम करने की प्रक्रिया जल्दी शुरू की जाए और इसे धीरे-धीरे किया जाए.4 किलो वजन कम करने के लिए लगभग तीन सप्ताह का समय लेना चाहिए, जिसमें हर सप्ताह लगभग 1 से 1.25 किलो वज़न कम करने का लक्ष्य हो, न कि मुक़ाबले से ठीक पहले कई किलो वजन कम करने की कोशिश की जाए.


नुकसान जानते हुए भी तेजी से वजन कम क्यों करते हैं ख‍िलाड़ी  

अगर तेजी से वजन कम करने के असर के बारे में सबको पता है, तो भी कॉम्बैट स्पोर्ट के एथलीट ऐसा क्यों करते हैं? धीरे-धीरे वजन कम करने की प्रक्रिया में एथलीट अपने ट्रेनिंग कैंप का ज़्यादातर समय कैलोरी की कमी (यानी अपनी ज़रूरत से कम कैलोरी लेना) में बिताता है, जिससे वह थक सकता है और कमज़ोर हो सकता है. लाटे ने आगे कहा कि जब जल्दी वज़न कम करना शुरू करते हैं, तो कमजोरी आ जाती है.कैलोरी की कमी से एनर्जी कम हो जाती है, जिसका असर ट्रेनिंग, कॉन्फिडेंस और आक्रामकता पर पड़ता है. इसीलिए कोच और एथलीट इसे टालने की कोशिश करते हैं.भले ही उन्हें पता हो कि आख़िरकार उन्हें वजन कम करना ही होगा.