18 साल की भारतीय वुशु एथलीट दिव्यांशी ने एशियाई खेलों की भारतीय टीम से आखिरी समय में हटाए जाने के बाद आत्महत्या करने की धमकी दी है.उन्होंने आरोप लगाया है कि जापान के लिए टीम के रवाना होने से कुछ दिन पहले ही उन्हें 60 किग्रा सांडा कैटेगरी से गलत तरीके से हटा दिया गया. 11 सितंबर को पोस्ट किए गए लगभग नौ मिनट के वीडियो में 18 साल की एथलीट ने कहा कि उन्हें महीनों से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और अब उन्हें जीने का कोई मकसद नहीं दिखता.एशियन गेम्स की टीम में दिव्यांशी की जगह रोशिबिना देवी को शामिल किया गया, जो 2022 एशियन गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट हैं और जिन्हें दिव्यांशी ने सिलेक्शन ट्रायल में हराया था.
परेशान करने के आरोप
दिव्यांशी के लिए सबसे बड़ी शिकायत सिर्फ़ यह नहीं है कि उन्हें एशियन गेम्स की टीम से हटा दिया गया, बल्कि यह है कि उन्हें यह फ़ैसला किस तरह बताया गया.अपने वीडियो में उन्होंने कहा कि टीम से उनका नाम हटाने से पहले उन्हें ठीक से जानकारी नहीं दी गई और उन्हें अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखाने या अपनी स्थिति के बारे में बताने का मौका भी नहीं दिया गया.उन्होंने कहा कि आप मेरा नाम हटा रहे हैं और मुझे बता भी नहीं रहे हैं। क्यों? कम से कम मुझे बता तो देते.मैं अब 18 साल की हो गई हूं और मुझे बोलने का हक है. उस समय मुझे अपनी बात रखनी थी. मुझे ऐसा करने क्यों नहीं दिया गया? मुझे डॉक्टर की रिपोर्ट भी दिखानी थी.
जान-बूझकर चोट पहुंचाने का आरोप
दिव्यांशी के मुताबिक स्क्वाड में अचानक हुए बदलाव से वह उलझन में पड़ गई थी कि आखिर एशियन गेम्स के लिए चुने जाने के बाद उन्हें टीम से क्यों हटा दिया गया. उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि आखिरी फ़ैसला लेने से पहले उन्हें अधिकारियों के सामने अपनी मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का मौका क्यों नहीं दिया गया.दिव्यांशी के वीडियो में विवाद ने एक नया मोड़ तब लिया, जब उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कैंप में उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया गया.उन्होंने कहा कि यह स्थिति जून और जुलाई से बनी हुई थी और इससे वह भावनात्मक रूप से थक चुकी थी. उन्होंने कहा कि उन्हें यह सब करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें नहीं लगता कि अब जीने का कोई मतलब है.




