एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय निशानेबाज जमकर पसीना बहा रहे हैं, मगर उनकी तैयारियों को उस समय झटका लगा, जब बुलेट की कमी के कारण भारतीय निशानेबाजों को पुरानी गोलियों से ट्रेनिंग करनी पड़ रही है, ताकि आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के लिए नए स्टॉक (जो एक साल पुराना है) को बचाया जा सके. 50 मीटर राइफल 3-पोजीशन शूटर्स के लिए यह समस्या खास तौर पर गंभीर है. ज़्यादातर शूटर्स लापुआ की बनाई .22 लॉन्ग राइफल (5.6mm) रिमफ़ायर एम्युनिशन के दो प्रीमियम वर्शन Midas Plus और X-ACT का इस्तेमाल करते हैं.
खरीद की प्रक्रिया अब और भी कठिन
खरीद की जो प्रक्रिया पहले से ही मुश्किल थी, वह अब और भी कठिन हो गई है. शूटर्स सबसे पहले बैरल टेस्टिंग के लिए लापुआ से अपॉइंटमेंट लेते हैं. इस दौरान यह पता लगाने के लिए कि कौन सा एम्युनिशन लॉट किसी खास राइफल के साथ सबसे अच्छा काम करता है, कई लॉट से फायरिंग की जाती है. जब पसंदीदा लॉट की पहचान हो जाती है, तो उस एम्युनिशन को नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के ज़रिए भारत भेजने के लिए मार्क किया जाता है. जो प्रक्रिया पहले लगभग तीन से चार महीनों में पूरी हो जाती थी, उसमें अब एक साल से ज़्यादा का समय लग रहा है. वैसे भारतीय फेडरेशन ने जून 2025 में जो ऑर्डर दिया था, वह इस अगस्त में सिर्फ कुछ ही खिलाड़ियों तक और सीमित मात्रा में पहुंचा है. इस बीच भारत के टॉप शूटर अक्सर जिस टेस्टिंग सेंटर लापुआ की बर्लिन फ़ैसिलिटी का इस्तेमाल करते हैं, वहां अपॉइंटमेंट के लिए अभी दिसंबर 2026 का स्लॉट मिल रहा है.
कोई दूसरा विकल्प?
इसका सबसे आसान समाधान यही होगा कि कोई दूसरा विकल्प ढूंढा जाए, लेकिन ऐसा करना मुश्किल है.स्पोर्ट्स स्टार के अनुसार भारत के 50 मीटर राइफल हेड कोच मनोज कुमार का कहना है कि NRAI ने Eley (बर्मिंघम, UK) और RWS (फ्यूर्थ, जर्मनी) जैसे विकल्पों के बारे में सोचा था.भारतीय शूटर्स के लिए Eley आसानी से उपलब्ध है, लेकिन इसके परफॉर्मेंस को लेकर कुछ चिंताएं हैं. एक्यूरेसी (सटीकता) मायने रखती है. किसी खास बैरल की टेस्टिंग के दौरान 11-12 mm की ग्रुपिंग (टारगेट पर औसत निशान से विचलन) का मतलब आमतौर पर यह होता है कि एमो (गोला-बारूद) बहुत अच्छी क्वालिटी का है, लेकिन जब Eley पर टेस्ट किए, तो 15-16 mm की ग्रुपिंग मिली. स्कोरशीट पर अगर इंसानी गलती को हटा दिया जाए तो इसका मतलब होगा कि आपके 10.1, 10.2 या 10.0 स्कोर घटकर 9.9 या 9.8 हो जाएंगे.
RWS का R50 को भारत लाना मुश्किल
मेघालय राज्य टीम के मुख्य राइफल कोच बिबस्वान गांगुली का कहना है कि RWS का R50 एम्युनिशन (गोला-बारूद) भले ही आसानी से मिल जाता हो, लेकिन NRAI से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट और इम्पोर्ट से जुड़ी दिक्कतों के कारण इसे भारत लाना मुश्किल है. उनका कहना है कि उन्होंने पिछले 15 सालों में भारत में R50 नहीं देखा है. RWS का इस्तेमाल करने का एकमात्र तरीका है विदेश जाकर उसे खरीदना, शूट करना और वापस आने से पहले खाली कारतूस वहीं जमा कर देना. आशी चौकसे इसे अच्छी तरह जानती हैं. एशियन गेम्स में हिस्सा लेने जा रही शूटर आशी ने भारत की बेहतरीन 3P कॉम्पिटिटर्स में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है.हाल में हांगझोऊ में हुए वर्ल्ड कप में न्हें तीन साल पुराने बुलेट का इस्तेमाल करना पड़ा,क्योंकि नया स्टॉक उपलब्ध नहीं था.इवेंट के दौरान इसके नतीजे साफ दिखे.




