भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में पदक जीतकर 28 साल के लंबे सूखे को समाप्त कर दिया है। इससे पहले साल 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी ने इस स्पर्धा में देश के लिए पदक हासिल किया था। मीराबाई ने अपनी बातचीत में बताया कि उनके पास ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक मौजूद थे, लेकिन केवल एशियन गेम्स का मेडल बाकी था। चोटों और पिछली असफलताओं के बावजूद उन्होंने पूरी तैयारी के साथ वापसी की और इस बार देश के लिए पदक सुनिश्चित किया। मीराबाई ने अपनी कड़ी ट्रेनिंग, डाइट पर नियंत्रण और सोशल मीडिया से दूरी को अपनी सफलता का अहम आधार बताया। इसके अलावा उन्होंने अपने कोच विजय शर्मा की रणनीतियों और मार्गदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने उनके प्रदर्शन को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई।
एशियन गेम्स में खत्म हुआ 28 साल का सूखा, मीराबाई चानू ने सपना किया पूरा
भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में पदक जीतकर 28 साल के लंबे सूखे को समाप्त कर दिया है। इससे पहले साल 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी ने इस स्पर्धा में देश के लिए पदक हासिल किया था। मीराबाई ने अपनी बातचीत में बताया कि उनके पास ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक मौजूद थे, लेकिन केवल एशियन गेम्स का मेडल बाकी था। चोटों और पिछली असफलताओं के बावजूद उन्होंने पूरी तैयारी के साथ वापसी की और इस बार देश के लिए पदक सुनिश्चित किया। मीराबाई ने अपनी कड़ी ट्रेनिंग, डाइट पर नियंत्रण और सोशल मीडिया से दूरी को अपनी सफलता का अहम आधार बताया। इसके अलावा उन्होंने अपने कोच विजय शर्मा की रणनीतियों और मार्गदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने उनके प्रदर्शन को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई।
SportsTak
अपडेट:

