नई दिल्ली। साल 2019 तक जिस केएलल राहुल की टेस्ट टीम हो या फिर सीमित ओवरों की टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन में जगह पर सवाल उठ रहे थे. उसी केएल राहुल ने विदेशी दौरों पर शतक दर शतक ठोकते हुए न सिर्फ अपनी जगह पक्की की बल्कि अब टेस्ट टीम इंडिया की कप्तानी भी वहीं करते नजर आ रहे हैं. ऐसे में पिछले दो सालों के अंतराल में राहुल ने अपनी बल्लेबाजी में क्या बदलाव किए और कैसे उनकी खोयी फॉर्म वापस लौटी. जिसके चलते टेस्ट के बाद साउथ अफ्रीका में वह वनडे कप्तानी भी रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में करते नजर आएंगे. इसके बारे में उनके बचपन के कोच सैमुएल जयराज ने दिलचस्प खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि कैसे असफलताओं से सीखने के लिए राहुल उनके पास आए और टाइममशीन में जाते हुए 15 साल की उम्र में खेली गई तीन पारियों को याद करके उन्होंने सफलता की राह खोज निकाली.
इंग्लैंड दौरे से पहले बचपन के कोच से मिले थे राहुल
दरअसल, भारत में कोरोना महामारी के आने से पहले राहुल का बल्ला खामोश पड़ा हुआ था. कभी इनस्विंग तो कभी आउट स्विंग पर गेंद उके बल्ले का बाहरी किनारा ले रही थी. जिसके चलते उनके टीम इंडिया में रहने पर सवाल उठने लगे थे. इसके बाद अपनी बल्लेबाजी में सुधार करने के लिए वह बचपन के कोच सैमुएल जयराज के पास गए. जिसके बारे में जयराज ने विजडन से बातचीत में कहा, "राहुल जब मेरे पास आए तब उनकी मानसिकता में काफी बदलाव आ चुका था. वह काफी ज्यादा सुनने लगे थे. इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज से पहले हमारे बीच काफी बातचीत हुई. मैं तब उनको अतीत में ले गया और कहा कि याद करो तुमने कर्नाटक अंडर-15 के लिए खेलते कैसे तीन पारियों में लगातार तीन शतक जड़े. राहुल ने उन तीन पारियों को याद किया और कोच से कहा कि मुझे कारण पता चल गया है. राहुल ने कहा कि मुझे अपनी बल्लेबाजी में बल्ला शरीर के समीप रखकर खेलना होगा. इसी मंत्र पर राहुल आगे बढे और अब उन्होंने इसे साबित करके दिखा दिया है."
इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका में जड़ा शतक
अपने बचपन के कोच जयराज से सफलता का मंत्र पाकर राहुल ने इंग्लैंड दौरे पर 12 अगस्त को लॉर्ड्स के मैदान में 129 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली. जिसके बाद हाल ही में साउथ अफ्रीका दौरे पर सेंचुरियन में खेल गए पहले मैच में सलामी बल्लेबाजी करते हुए राहुल ने 123 रानों की बेजोड़ शतकीय पारी खेली. इस दौरान राहुल की बल्लेबाजी तकनीक को सभी दिग्गजों ने सराहा. क्योंकि इस पारी के दौरान राहुल ने बल्ला शरीर के समीप रखा और तमाम बाहर जाती गेंदों को खाली छोड़ा. जिससे न सिर्फ उन्हें सफलता मिली बल्कि भारत ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त भी हासिल कर डाली. अब अगर राहुल इसी तरह की शानदार फॉर्म जारी रखते हैं तो भारत साउथ अफ्रीका में तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में कब्ज़ा भी जमा सकता है. इसके अलावा राहुल ने साउथ अफ्रीका में अपने टेस्ट कारियर का 7वां शतक जड़ा, जिसमें विदेशी सरजमीं पार उनका 6वां टेस्ट शतक था. ये इस बात की प्रमाणिकता देता है कि राहुल तकनीक रूप से कितने मजबूत खिलाड़ी हैं.

