भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में पहला टेस्ट मैच खत्म हो गया. भारत ने 165 रन से मुकाबला जीता. मैच खत्म होने के बाद जैसे ही औपचारिकताएं पूरी हुई. सभी अपना काम समेटने लगे और स्टेडियम से जाने लगे, मगर गॉल के 130 ग्राउंडस्टाफ का काम इसके बाद शुरू हुआ. दरअसल मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के हाथ मिलाने के तुरंत बाद बारिश शुरू हो गई,लेकिन पिछले सप्ताह के उलट इस बार स्क्वायर या मैदान को ढकने की कोई जल्दबाजी नहीं थी. पहला टेस्ट बारिश से प्रभावित रहा था और इस दौरान मंजुला और उनकी टीम को लगातार सतर्क रखा गया. वे सभी श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के कर्मचारी नहीं हैं.
पांच मिनट से भी कम समय
तैयारी से लेकर काम पूरा करने तक ग्राउंडस्टाफ अपने तरीकों पर डटे रहे और भारी बारिश के दौरान भी कोई अफरा-तफरी नहीं होने दी. पूरे मैदान को ढकने में उन्हें औसतन पांच मिनट से भी कम समय लगता है और वे हालात के हिसाब से तेजी से काम करते हैं. वे संकेतों पर नजर रखते हैं, बादलों की चाल देखते हैं.
कवर करने के लिए लगभग 28 टुकड़े
ग्राउंडस्टाफ चारों तरफ से कवर को खींचते हुए दौड़ते हैं तो उनका तालमेल देखने लायक होता है. पहला ग्रुप,जो पिच और स्क्वायर को कवर करता है. ये कवर हल्के नहीं होते और 100x100 के एक टुकड़े का वजन 650 किलोग्राम से ज़्यादा हो सकता है. इसमें हवा और बारिश की चुनौतियां भी जुड़ जाती हैं. पूरे मैदान को कवर करने के लिए लगभग 28 टुकड़े होते हैं और यह सुनिश्चित करना होता है कि आउटफील्ड को कोई नुकसान न हो.
300 से ज़्यादा टायर
हालांकि कवर इतने भारी होते हैं कि वे अपने आप जमीन पर टिके रहते हैं, लेकिन तेज हवाएं एक चुनौती पेश करती हैं और अगला कदम कवर को अपनी जगह पर बनाए रखने के लिए भारी रबर के टायर सावधानी से रखना होता है. बारिश शुरू होते ही मैदान पर रखने के लिए 300 से ज़्यादा टायर तैयार रहते हैं.




