आईपीएल 2022 के बाद से केएल राहुल (KL Rahul) लगातार चोटिल हो रहे हैं और अब तक टीम इंडिया (Team India) से बाहर थे. लेकिन जिम्बाब्वे (Zimbabwe) के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए वो पूरी तरह फिट हो चुके हैं. टीम का जब ऐलान किया गया था तब केएल राहुल का नाम टीम के भीतर नहीं था लेकिन बाद में बीसीसीआई (BCCI) की मेडिकल टीम ने उन्हें फिट करार दे दिया. ऐसे में राहुल ने धवन को कप्तान के तौर पर रिप्लेस किया और अब टीम इंडिया की कमान उन्हीं के हाथों में हैं. भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले पहले वनडे मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें राहुल ने कई अहम सवालों के जवाब दिए.
राहुल से जब ये पूछा गया कि पिछले 2 साल उनके लिए कैसे रहे और बायो बबल में उन्हें कैसा लगा. इसपर राहुल ने कहा कि, मुझे अच्छा लगा. हमने दुनिया घूमी. पिछले 2 साल सभी के लिए मुश्किल थे. लेकिन हमारे पास ट्रैवल और क्रिकेट खेलने का मौका था. हां सफर करना थोड़ा मुश्किल था लेकिन हमने अच्छी क्रिकेट खेली. मैंने कुछ मुश्किल परिस्थितियों में प्रदर्शन किया. ट्रेनिंग आपको यही सिखाती है कि, आप अपनी टीम को अच्छी शुरुआत दें और जितना हो सके उतना मैच जीतें. हां हर खेल में इंजरी रहता है और ये खेल का हिस्सा है. ये खेल पिछले कुछ समय से मुझपर मेहरबान नहीं था. ऐसे में आपको अच्छा और बुरा दोनों साथ लेकर चलना होता है.
मेरी तुलना किसी से नहीं
अपनी कप्तानी और राहुल- धोनी से तुलना को लेकर राहुल ने कहा कि, रोहित शर्मा और एमएस धोनी से मेरी कोई तुलना नहीं. एक लीडर के रूप में मैं उनके सामने भी नहीं ठहरता. उनके आंकड़े और उपलब्धियां काफी ज्यादा हैं. उन्होंने जो देश के लिए किया है, ऐसे में किसी को भी आप उस ब्रैकेट में नहीं रख सकते. आपको किसी से उनकी तुलना नहीं करनी चाहिए. मैं अभी भी युवा हूं और ये मेरे लिए कप्तान के रूप में दूसरी सीरीज है.
अपनी कप्तानी को लेकर राहुल ने कहा कि, मैं खुद को पहले एक खिलाड़ी के रूप में देखता हूं. आप जब बाउंड्री लाइन पार कर लेते हैं तब आप कप्तान और लीडर बनते हैं. पिछले 2 महीने मैं क्रिकेट से दूर था, ऐसे में भारतीय ड्रेसिंग रूम में आकर अच्छा लग रहा है. राहुल ने आगे कहा कि, एक लीडर के रूप में आपके सामने कई बड़े चैलेंज होते हैं. एक खिलाड़ी को खुद के प्रदर्शन से सेलेक्टर्स, कोच और कप्तान को भरोसा दिलाना होता है. वहीं जब आप क्रिकेट से दूर रहते हो और वापस आने पर आपको पता चलता है कि आपकी टीम आपका साथ दे रही है तो आपके लिए ये और आसान हो जाता है. इससे आपको आत्मविश्वास हासिल होता है और यही जरूरी है.

