भारत के कोच गौतम गंभीर के पास अफगानिस्तान सीरीज में वैभव सूर्यवंशी को ना खिलाने की एक सीधी-सी वजह थी.गंभीर ने कहा कि इस युवा टैलेंटेड खिलाड़ी को भारत की T20I प्लेइंग XI में अपने अगले मौके का इंतजार करना होगा. सूर्यवंशी जबरदस्त फ़ॉर्म में इस सीरीज़ में आए थे.ज़िम्बाब्वे दौरे पर वे 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' रहे थे और उन्होंने 196.10 की शानदार स्ट्राइक रेट से 151 रन बनाए थे.फिर भी जब संजू सैमसन टीम में वापस आए, तो सूर्यवंशी को बाहर बैठना पड़ा. बीते दिन खेले गए तीसरे मैच से पहले ही सीरीज का फैसला हो गया था, इसके बाद भी सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में नहीं चुना गया और सैमसन सीरीज का आखिरी मैच खेले.
सूर्यवंशी के बजाय सैमसन क्यों?
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने कहा कि सैमसन ने पिछले कुछ सालों में भारत के लिए अपनी काबिलियत साबित की है. भारत के कोच ने इंग्लैंड सीरीज का ज़िक्र किया जब उन्होंने सूर्यवंशी के लिए सैमसन को टीम से बाहर कर दिया था और कहा कि यह उनके कोचिंग करियर का सबसे मुश्किल फैसला था, लेकिन गंभीर ने कहा कि उनका मकसद हमेशा उसी कॉम्बिनेशन पर लौटना था, जिसने उन्हें T20 वर्ल्ड कप जिताने में मदद की थी. गंभीर ने कहा कि मुझे लगता है कि सैमसन ने अपनी काबिलियत दिखाई है. कोई बिना टैलेंट के वर्ल्ड कप में 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' नहीं बनता, इसलिए उन्होंने काफी कुछ किया है. जाहिर है कि यह मुश्किल था,शायद मेरे कोचिंग करियर का सबसे मुश्किल फैसला उन्हें इंग्लैंड सीरीज से बाहर करना था, क्योंकि उससे पहले उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था.
वर्ल्ड कप कॉम्बिनेशन
गंभीर ने आगे कहा कि कभी-कभी आपको खिलाड़ियों की फ़ॉर्म को भी देखना पड़ता है. उनके नजरिए से वह उसी कॉम्बिनेशन के साथ जाना चाहते था, जो वर्ल्ड कप के दौरान था, क्योंकि तीन या चार बार नाकाम होने से खिलाड़ी बुरे नहीं हो जाते.अगर कोई टीम एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक बिना हारे जाती है और वर्ल्ड कप जीतती है, तो सिर्फ़ एक सीरीज़ के बाद वह अचानक खराब टीम नहीं बन जाती और न ही खिलाड़ी बुरे हो जाते हैं. सैमसन की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ सीरीज़ में दो अर्धशतक लगाए और तीन मैचों में कुल 117 रन बनाए.




