हार्दिक पंड्या की कप्तानी पर संकट! मुंबई के कोच बोले- हम लोग जैसा चाहते थे वैसा नहीं हुआ

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हार्द‍िक पंड्या पर मैच फीस का 10 फीसदी जुर्माना लगा. (PC: X)
हार्द‍िक पंड्या पर मैच फीस का 10 फीसदी जुर्माना लगा. (PC: X)

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मुंबई इंडियंस आईपीएल 2026 में 14 में से चार ही मैच जीत सकी.

Kieron Pollard on Hardik Pandya captaincy: आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के सफर का अंत भी हार के साथ हुआ. उसे आखिरी लीग मैच में राजस्थान रॉयल्स ने मात दी. इस नतीजे के साथ मुंबई आईपीएल 2026 में नौवें पायदान पर रही. लगातार छठे सीजन खाली हाथ रहने और पिछले तीन में से दो सीजन में प्लेऑफ पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद अब हार्दिक पंड्या की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है. वे 2024 में कप्तान बने थे और तब यह टीम सबसे नीचे रही थी. पिछले सीजन में तीसरे पायदान पर रही मगर आईपीएल 2026 में फिर से खेल बिगड़ गया.

मुंबई के बैटिंग कोच काइरन पोलार्ड ने आईपीएल 2026 का आखिरी मैच होने के बाद कहा कि हार्दिक का नेतृत्व वैसा नहीं रहा जैसा फ्रेंचाइज ने उम्मीद की थी. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,  'नेतृत्व के नज़रिए से हार्दिक को देखें तो हां, यह ठीक नहीं रहा और व्यक्तिगत रूप से भी जैसा वह चाहते होंगे वैसा नहीं हुआ. मैनेजमेंट के रूप में हम लोग जैसा चाहते शायद वैसा नहीं हुआ. लेकिन एक बात आपको पता होनी चाहिए कि हमने उन्हें फ्रेंचाइज का नेतृत्व करने और अच्छा प्रदर्शन करने का पूरा मौका देने की हर संभव कोशिश की है.'

मुंबई के सभी धुरंधर रहे फेल

मुंबई के पास हार्दिक के साथ ही जसप्रीत बुमराह, सूर्यकुमार यादव, रोहित शर्मा, ट्रेंट बोल्ट, तिलक वर्मा जैसे धुरंधर खिलाड़ी थे. लेकिन इनमें से कोई भी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया. इस वजह से टीम आईपीएल 2026 में 14 में से चार ही मैच जीत सकी. हार्दिक और रोहित को टूर्नामेंट के दौरान चोटों की वजह से कुछ मुकाबलों से बाहर भी रहना पड़ा.

पोलार्ड बोले- सामूहिक नाकामी से हारी मुंबई

पोलार्ड ने कहा कि यह नतीजा मुंबई इंडियंस की सामूहिक नाकामी है. उन्होंने कहा, 'कोई भी यहां बैठकर एक-दूसरे पर दोषारोपण नहीं करेगा. खासकर जब आप हारते हैं, तो आपको इसे सामूहिक नजरिए से देखना होगा. कभी जीत होती है, कभी हार. लेकिन आखिर में मैं कुछ चीजों पर सवाल नहीं उठाऊंगा. वह (पंड्या) कोशिश कर रहे थे; हम सब कोशिश कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बनी. आप बैठते हैं, बात करते हैं, और देखते हैं कि क्या बेहतर है. कभी पता नहीं चलता कि आगे क्या होगा. हमारे लिए, इस समय अपने घावों को भरने दीजिए और उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में हम और भी मजबूत होकर लौटेंगे.'