राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की रेस में पराग के साथ थे ये 5 खिलाड़ी, रियान ने इस वजह से मारी बाजी

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रियान पराग राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने.
रियान पराग राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने.

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संजू सैमसन के चेन्नई सुपर किंग्स में जाने से राजस्थान को नए कप्तान की जरूरत पड़ी.

रवींद्र जडेजा भी राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की रेस में थे.

आईपीएल 2026 में राजस्थान का पहला मैच चेन्नई सुपर किंग्स के साथ है.

आईपीएल 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स ने रियान पराग को कप्तान बनाने का ऐलान किया. इस फैसले पर काफी हैरानी हुई थी. कई लोगों का कहना था कि उन्हें किस वजह से यह जिम्मेदारी दी गई जबकि आईपीएल 2025 में जब आठ मैच में वे कप्तान थे तब राजस्थान को केवल दो ही जीत मिली थी. रॉयल्स के हेड कोच कुमार संगकारा ने 29 मार्च को इस बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि किस तरह से रियान पराग को कप्तानी मिली और कौन-कौनसे खिलाड़ी इसकी दावेदारी में थे.

संगकारा ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच से पहले कहा कि परिपक्वता और टीम को लेकर विजन के चलते पराग कप्तानी के लिए उपयुक्त थे. उनके अलावा रवींद्र जडेजा भी कप्तानी की रेस में थे. संगकारा ने कहा, 'कप्तानी के लिए पांच दावेदार थे. इनमें संदीप शर्मा और रवींद्र जडेजा शामिल थे. हमने कड़े पैरामीटर रखे थे कि हम कैसे चुनेंगे, क्या प्रोसेस होगा. इसलिए हमारी सभी दावेदारों के साथ काफी बात हुई और हमें अहसास हुआ कि सभी हमारी टीम की कप्तानी करने की काबिलियत रखते हैं. रियान का दावा सबसे ऊपर रहा क्योंकि उसके साथ ही सभी बातचीत में वह काफी परिपक्व दिखा.'

संगकारा ने बताया कैसे पराग को मिली कप्तानी

 

संगकारा ने आगे कहा, वह सभी सवालों के जवाब देने में विचारशील था और सवाल काफी मुश्किल और लक्ष्य से जुड़े हुए थे. कुछ सवाल तो उन सबके लिए काफी असहज करने वाले थे. रियान अपनी परिपक्वता, 'टीम के लिए विजन के चलते आगे रहा. वह न केवल कप्तान बनना चाहता था बल्कि उसे टीम का नेतृत्व करना है. इससे वह मजबूत दावेदार बना. हम खुले दिमाग के साथ गए और सभी खिलाड़ियों को पूरा सम्मान, पूरा मौका देने के बाद सबसे अच्छे उम्मीदवार को चुना.'

संगकारा बोले- रियान को मिलेगा सीनियर्स का साथ

 

राजस्थान के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट ने कहा कि रियान को कप्तानी के दौरान टीम के सीनियर खिलाड़ियों का पूरा सहयोग मिलेगा. उन्होंने कहा, 'कप्तानी और नेतृत्व दो अलग चीजें हैं. दोनों आसान नहीं हैं. हमने मैच्योरिटी को देखा, हमने आलोचक की तरह सोचने की क्षमता को जाना, हमने देखा कि वे अपने जवाबों को लेकर कितने ऑथेटिंक थे. हमने देखा कि आप अपने साथी खिलाड़ियों को किस तरह से प्रभावित कर सकते हैं.'