क्रिकेट के नियमों का संरक्षक मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने गुरुवार को आईपीएल 2026 के दौरान अंपायरों के उस विवादास्पद फैसले का बचाव किया, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' (फील्ड में बाधा डालने) के कारण आउट दिया गया था. 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' से संबंधित एक नियम स्पष्टीकरण जारी करते हुए लंदन स्थित इस क्लब ने कहा कि रघुवंशी को आउट दिए जाने का फैसला उन मानदंडों के अनुरूप था, जिनके अनुसार कोई भी बल्लेबाज जो दौड़ते समय अपनी दिशा बदलता है, विशेष रूप से वह जो पिच पर दौड़ने के लिए अपनी दिशा बदलता है, या कोई ऐसा रास्ता अपनाता हैं जो दूसरे छोर तक पहुंचने का सबसे तेज़ तरीका नहीं होता तो यह माना जाएगा कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है.
क्या है नियम?
फील्ड में बाधा डालने (Obstructing the field) से जुड़े नियम को समझाते हुए MCC ने कहा है कि नियम 37.1.1 कहता है कि कोई भी बल्लेबाज 'फील्ड में बाधा डालने' के कारण तब आउट माना जाएगा, जब वह 'जान-बूझकर अपने शब्दों या हरकतों से फील्डिंग करने वाली टीम को रोकने या उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करता है. इसका मतलब है कि बाधा जान-बूझकर डाली गई होनी चाहिए, जिसका पता लगाना कई बार मुश्किल हो सकता है.
नियम के अनुसार लिया गया था फैसला
MCA ने कहा कि 'फील्ड में रुकावट डालने' के कारण रघुवंशी को आउट दिए जाने का मामला इसी नियम के अनुसार था, क्योंकि विकेटों के बीच दौड़ते समय उन्होंने जान-बूझकर अपनी दिशा ऑफ-साइड से बदलकर पिच के लेग-साइड की ओर कर ली थी. रघुवंशी इन शर्तों को साफ तौर पर पूरा करते हैं. जब वह दौड़ना शुरू करते हैं, तो वह विकेट के ऑफ-साइड में होते हैं. जैसे ही गेंद फील्डर तक पहुंचती है, वह पिच के बीच में आ जाते हैं, जहां उन्हें किसी भी हाल में नहीं दौड़ना चाहिए था और फिर मुड़कर लेग-साइड की ओर वापस दौड़ते हैं, जिससे वह गेंद और विकेट के बीच आ जाते हैं. यह एक जान-बूझकर किया गया काम है. अगर वह पिच से बाहर रहते, यानी ऑफ-साइड में ही बने रहते, तो गेंद उन्हें नहीं लगती और रुकावट डालने का कोई सवाल ही नहीं उठता.अगर उन्होंने लेग-साइड की ओर दौड़ना शुरू किया होता और फिर गेंद लगने से पहले उसी तरफ अपने क्रीज में वापस लौट आए होते, तो भी उन्हें 'नॉट आउट' दिया जाता, वह रास्ते में तो होते, लेकिन जान-बूझकर नहीं. पिच को जान-बूझकर पार करना ही उनके आउट होने का कारण बना.

