राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पर बीसीसीआई ने ड्रेसिंग रूम में वेपिंग का इस्तेमाल करने पर मैच फीस का 25 फीसदी जुर्माना लगाया है. हालांकि बीसीसीआई से सजा मिलने के बावजूद रियान पराग की मुसीबत कम नहीं हुई, बल्कि अब महिलाओं के एक ग्रुप ने उन विज़ुअल्स की जांच की मांग की, जिनमें कथित तौर पर IPL मैच के दौरान उन्हें वेप जैसे किसी डिवाइस का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है. ग्रुप ने सवाल भी उठाया कि क्या यह घटना प्रतिबंधित उत्पादों को सामान्य बनाने की किसी कोशिश का हिस्सा थी. वेप और ई-सिगरेट जैसे नए ज़माने के निकोटीन डिवाइस के प्रचार के खिलाफ आवाज उठाने वाली मदर्स के एक ग्रुप ने इस घटना की जांच की मांग की है.
ग्रुप का बयान
'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019' के प्रावधानों का हवाला देते हुए ग्रुप ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध है. इसमें इनका उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन भी शामिल है. ग्रुप ने कुछ रिपोर्टों में किए गए उन दावों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि घर के अंदर वेपिंग करना एक ग्रे जोन (अस्पष्ट क्षेत्र) के तहत आता है. ग्रुप ने ऐसे दावों को गलत जानकारी करार दिया. ग्रुप ने अपने बयान में कहा कि यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने यह भी साफ किया है कि किसी भी रूप या मात्रा में ई-सिगरेट रखना कानून का उल्लंघन है.
सबसे ऊपर होना चाहिए कानून
व्यापक प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर एक साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं और बार-बार अपराध करने पर ज़्यादा सज़ा मिल सकती है. ग्रुप ने कहा कि भारत में कानून सबसे ऊपर होना चाहिए. चाहे कोई सेलिब्रेटी हो या आम नागरिक, नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए. ग्रुप ने कहा कि भारतीय क्रिकेट ऐसा कोई काम नहीं कर सकता, जो युवा दर्शकों के सामने किसी प्रतिबंधित उत्पाद को सामान्य बना दे. बोर्ड को तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए, जवाबदेही तय करनी चाहिए और एक स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि कानून और भारत के बच्चों का स्वास्थ्य सबसे पहले आता है.

