आईपीएल ऐसी लीग है, जो रातोंरात किसी भी गुमनाम खिलाड़ी को स्टार बना देती है. आईपीएल में कई बल्लेबाज तो चौके-छक्कों की बारिश कर छा गए. स्टार बल्लेबाज भी इस लीग में एक अलग ही रंग में नजर आते हैं. हालांकि रनों की बारिश कर बल्लेबाज तो छा जाते हैं, मगर उनकी बैटिंग में जिसका अहम रोल होता है, उसे कोई जान नहीं पाता. यहां बात हो रही है उन नेट गेंदबाजों की, जो मैच के दिन चकाचौंध से काफी दूर होते हैं, मगर मैदान पर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
नेट गेंदबाजों की कमाई
कई खिलाड़ियों के लिए यह क्रिकेट का सबसे अनोखा प्रशिक्षण होता है. उन्हें इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ियों को लगातार गेंदबाजी करनी होती है. इस दौरान उन्हें अक्सर जसप्रीत बुमराह के यॉर्कर, सुनील नारायण की रहस्यमयी स्पिन या मिचेल स्टार्क की बाएं हाथ की तूफानी गेंदों की नकल करने के लिए कहा जाता है. इसके लिए उन्हें आईपीएल की मानकों के हिसाब से दैनिक भत्ता मिलता है. आईपीएल फ्रेंचाइज आमतौर पर अपने साथ तीन से पांच विशेषज्ञ नेट गेंदबाज रखती हैं. इसके अलावा मेजबान राज्य संघों और क्लब भी विभिन्न स्थानों पर स्थानीय गेंदबाजों की व्यवस्था करते हैं. पीटीआई के अनुसार आईपीएल मानकों के हिसाब से आम तौर पर नेट्स पर बिताए गए हर दिन के उन्हें लगभग 5 से 7 हजार रुपये मिलते हैं.
कैसे होता है नेट गेंदबाजों का चयन?
जिस तरह से किसी खिलाड़ी को टीम में अपने चयन के लिए काफी पसीना बहाना पड़ता है, उसी तरह से नेट गेंदबाजों का चयन भी आसानी से नहीं होता. आखिरकार नेट गेंदबाजी भी तो टीम में एंट्री करने का एक जरिया है. गुरनूर बराड़, चेतन सकारिया, उमरान मलिक, कुमार कार्तिकेय, आकाश मधवाल समेत न जाने कितने ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने आईपीएल में एंट्री नेट गेंदबाज के रूप में की और फिर टीम में जगह बनाई. इतना ही नहीं, यही से उनके लिए भारतीय टीम में जगह बनाने का भी रास्ता बना. बीसीसीआई के घरेलू टूर्नामेंटों जैसे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में प्रदर्शन, राज्यों की लीग में प्रभावशाली खेल और प्रतिभा खोजने वाले कोच की सिफारिशें अक्सर यह निर्धारित करती हैं कि नेट गेंदबाज के रूप में किसे मौका मिलेगा.
खिलाड़ियों पर नजर रखती है फ्रेंचाइज की टीम
केकेआर के हेड स्काउट और जाने-माने फील्डिंग कोच बिजू जॉर्ज ने नेट गेंदबाजों के चयन की प्रक्रिया के बारे में बताया कि वह विभिन्न राज्य स्तरीय प्रीमियर लीग के दौरान खिलाड़ियों पर नजर रखते हैं. देश भर में लगभग 19 राज्य स्तरीय लीगें चल रही हैं. एक बार जब उन्हें कोई ऐसा गेंदबाज मिल जाता है जिसमें अच्छी गति, विविधता और जज्बा हो तो वह इसकी जानकारी टीम के कोचिंग स्टाफ को दे देते हैं. इसके बाद उस गेंदबाज को ट्रायल के लिए बुलाया जाता है.

