इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने खुलासा किया कि आईपीएल में उनकी भागीदारी को लेकर इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के साथ उनका लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने उनके इंटरनेशनल करियर को जल्द खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी. रणवीर अल्लाहबादिया के साथ एक पॉडकास्ट में पीटरसन ने कहा कि उन्होंने जो रुख अपनाया यानी ऐसे समय में फ्रेंचाइज क्रिकेट को प्राथमिकता देना, जब इसे अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता थी, उसकी उन्हें निजी तौर पर कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन आखिरकार इसने भविष्य के खिलाड़ियों के लिए इंटरनेशनल कमिटमेंट्स और मोटी कमाई वाली T20 लीग्स के बीच संतुलन बनाने का रास्ता साफ करने में मदद की.
मैंने बहुत बड़ी कुर्बानियां दीं, इसकी वजह से मेरा करियर ही खत्म हो गया. 100%, यही एकमात्र वजह थी कि उस पूरे सिस्टम में हर कोई मेरे खिलाफ हो गया.
तीन सप्ताह की परमिशन
2009 में IPL के दूसरे सीजन के दौरान इंग्लैंड ने अपने कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ियों को तीन सप्ताह की सीमित अवधि के लिए फ्रेंचाइज क्रिकेट में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी. ECB ने इससे पहले सीजन के दौरान अपने केंद्रीय रूप से कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोक दिया था.
आईपीएल को प्राथमिकता
साउथ अफ़्रीका में जन्मे इंग्लैंड के इस बल्लेबाज ने 2009 में अपनी नेशनल ड्यूटी के ऊपर इस लीग को प्राथमिकता देते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को जॉइन किया. वह पहले से ही तत्कालीन कोच पीटर मूर्स के साथ हुए मनमुटाव से जूझ रहे थे, जो बाद में मामला ECB तक पहुंच गया. यहीं से पीटरसन और उनके इंग्लैंड करियर के लिए मुश्किलें और बढ़ गई थी. उन्होंने कहा कि
जब मेरा इंग्लैंड करियर खत्म हुआ, तब मैं 33 साल का था और 104 टेस्ट मैच खेल चुका था. मुझे 150–160 टेस्ट खेलने चाहिए थे और 12–13 हजार रन बनाने चाहिए थे. यही वह चीज थी, जो मुझे हासिल करनी चाहिए थी.
पीटरसन ने अपना टेस्ट करियर 47.3 की औसत से 8,181 रनों के साथ खत्म किया, जिसमें 35 अर्धशतक और 23 शतक शामिल थे. इंग्लैंड के सबसे कामयाब आधुनिक बल्लेबाजों में से एक का बोर्ड के साथ संघर्ष क्रिकेट जगत में एक बहुत ज़्यादा चर्चित विवाद बन गया था.

