लखनऊ सुपर जायंट्स को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ आखिरी गेंद पर जीत दिलाकर मुकुल चौधरी रातोंरात स्टार बन गए. उन्होंने 27 गेंदों में नॉटआउट 54 रन की मैच विनिंग पारी खेली. उन्होंने अपनी पारी से सिर्फ लखनऊ को तीन विकेट से जीत ही नहीं दिलाई, बल्कि हेड कोच जस्टिन लैंगर की भविष्यवाणीको भी सच कर दिया.
मुकुल की बेखौफ पारी
182 रनों का पीछा करते हुए लखनऊ 16 ओवरों में 128/7 के स्कोर पर मुश्किल में थी. इसके बाद अपना तीसरा आईपीएल मैच खेलते हुए मुकुल ने विस्फोटक बैटिंग की. इस 21 साल के बल्लेबाज ने 27 गेंदों में नाबाद 54 रन बनाए, जिसमें सात छक्के जड़े. उन्होंने अपनी आखिरी 19 गेंदों में 52 रन बनाए और आखिरी गेंद पर टीम को तीन विकेट से शानदार जीत दिलाई. उन्होंने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से केकेआर के मुंह से जीत को छीन लिया.
मुकुल के सफर की बात करें तो यह उनके लिए आसान नहीं था. राजस्थान के झुंझुनू से आने वाले मुकुल ने सीमित संसाधनों के कारण 12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. सीकर की एक एकेडमी में ट्रेनिंग लेने के बाद वे जयपुर चले गए और बाद में T20 के तेज-तर्रार फॉर्मेट के हिसाब से खुद को ढालने के लिए उन्होंने गुरुग्राम में अपनी स्किल्स को और निखारा.

