सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और पंजाब किंग्स (PBKS) के बीच मैच का नतीजा फील्डिंग से तय हुआ. हालांकि दोनों टीमों ने कैच छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मेहमान टीम ने SRH के कुछ अहम और फॉर्म में चल रहे बल्लेबाजों को जीवनदान दिया. हेनरिक क्लासेन को एक बार और इशान किशन को दो बार जीवनदान देना उन्हें आखिर में काफी महंगा पड़ा. क्लासेन ने 43 गेंदों में 69 रन बनाए, जबकि इशान ने 32 गेंदों में 55 रन बनाए.
रोशनी में फील्डिंग करना आसान नहीं
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुतुले ने कहा कि रोशनी (lights) में फील्डिंग करना आसान नहीं होता, क्योंकि गेंद रोशनी के साथ-साथ भीड़ में से भी निकलकर आती है और आप जानते ही हैं कि गेंद जितनी ऊपर जाएगी, ज़ाहिर है कि वह उतनी ही तेजी से नीचे भी गिरेगी, और ऐसे में गुरुत्वाकर्षण का असर तो होगा ही.
इशान बच निकले
बहुतुले ने बताया कि उन्होंने टॉप तीन बल्लेबाजों के लिए योजना बनाई थी और उसे अच्छे से लागू भी किया, लेकिन इशान बच निकले. उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से कैच छूट गए और मुझे लगता है कि इससे नुकसान हुआ. उन्होंने आगे कहा कि उन कैचों को पकड़ना बहुत जरूरी था, क्योंकि वे ऐसे खिलाड़ी हैं कि अगर आप उनके कैच छोड़ देते हैं, तो वे रन बनाएंगे और तेजी से रन बनाएंगे. अगर कैच पकड़े जाते तो मैदान पर नए बल्लेबाज होते और फिर उनकी टीम अपनी योजनाओं को ज़्यादा असरदार तरीके से लागू कर पाती, जिससे शायद 50 रन कम बनते.
मन में शक
बहुतुले ने कहा कि अगर आप कैच छोड़ते रहते हैं, तो मन में एक तरह का शक पैदा हो जाता है कि क्या मैं सही से कैच पकड़ पा रहा हूं या मैं दबाव ले रहा हूं या मैं बहुत ज्यादा घबरा रहा हूं, इस तरह की बातें मन में आने लगती हैं. कोच ने अपने प्लेयर्स पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनके खिलाड़ी दबाव को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं. पहले हाफ में उनकी शानदार फ़ील्डिंग परफ़ॉर्मेंस से यह साबित भी होता है. इसलिए उन्हें लगता है कि वापस जाकर चीजों पर सोच-विचार करना जरूरी है कि कैसे यह पक्का कर सकते हैं कि सही खिलाड़ी सही जगह पर हो या इसमें थोड़ा बदलाव कर सकें, क्योंकि सभी खिलाड़ी अच्छे क्रिकेटर और अच्छे फ़ील्डर हैं.

