13 की उम्र में क्रिकेट छोड़ा, धोनी की बायोपिक देखी, फिर खेलना किया शुरू, 2 ट्रायल छूटे, अब मिला IPL कॉन्ट्रेक्ट

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शिवांग कुमार (बाएं) ने केकेआर के खिलाफ मैच से आईपीएल डेब्यू किया. (Photo: BCCI)
शिवांग कुमार (बाएं) ने केकेआर के खिलाफ मैच से आईपीएल डेब्यू किया. (Photo: BCCI)

Story Highlights:

शिवांग कुमार मध्य प्रदेश टी20 लीग में जबरदस्त प्रदर्शन के जरिए आईपीएल तक पहुंचे.

शिवांग कुमार के पिता भी क्रिकेटर बनना चाहते थे.

शिवांग कुमार ने आईपीएल 2026 ऑक्शन से पहले मुंबई-राजस्थान के लिए ट्रायल दिए थे.

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक ने कई क्रिकेटर्स को प्रेरणा दी है. इनमें एक नाम उभरते हुए खिलाड़ी शिवांग कुमार भी शामिल हैं. उन्होंने वर्ल्ड चैंपियन कप्तान की बायोपिक देखने के बाद फिर से क्रिकेट खेलना शुरू किया और अब आईपीएल का हिस्सा हैं. शिवांग कुमार सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा हैं. वे पहली बार इस लीग में शामिल हुए हैं. शिवांग कुमार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर से आते हैं लेकिन घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हैं. उन्होंने आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ डेब्यू किया.

शिवांग बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर हैं. साथ ही निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी हैं. वे पिता प्रवीण कुमार के क्रिकेटर बनने के अधूरे सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं. उनके पिता भारतीय रेलने में टिकट कलेक्टर हैं. वे बंगाल की ओर से अंडर 19 क्रिकेट खेले. लेकिन पारिवारिक हालात के चलते खेल से दूर हो गए. अब शिवांग अपना व पिता का सपना पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.

शिवांग कुमार ने एमपीएल से ध्यान खींचा

 

शिवांग मध्य प्रदेश टी20 लीग में जबरदस्त प्रदर्शन के जरिए आईपीएल तक पहुंचे. उन्होंने एमपीएल 2025 में छह पारियों में 197 की स्ट्राइक रेट से 120 रन बनाए और चार पारियो में 7.21 की इकॉनमी से पांच विकेट लिए. इसके बाद मध्य प्रदेश की ओर से विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेले.

धोनी की बायोपिक ने बदली शिवांग की कहानी

 

शिवांग ने खुद भी 13 साल की उम्र में खेलना छोड़ दिया था. ऐसा इसलिए किया क्योंकि कहीं पर भी उनका सेलेक्शन नहीं हो रहा था. इससे वे निराश हो गए. फिर एमएस धोनी की बायोपिक देखी. यह देखने के बाद फिर से क्रिकेट का चस्का लग गया. उन्होंने पिता को भी धोनी की बायोपिक दिखाई. वे यह फिल्म देखकर भावुक हो गए. उन्हें अपने संघर्ष के दिन याद आ गए. उन्होंने अपने साथ जो हुआ वह बेटे के साथ न होने देने का फैसला किया और उन्हें सारी सुविधाएं मुहैया कराईं.