दिग्वेश राठी 30 लाख रुपये में ही LSG के लिए खेलने को क्यों हुए राजी, किस वजह से नहीं छोड़ा साथ

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 दिग्वेश राठी घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेलते हैं.
दिग्वेश राठी घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेलते हैं.

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दिग्वेश राठी पहले ही आईपीएल सीजन में रवि बिश्नोई जैसे बॉलर पर भारी पड़ गए थे.

दिग्वेश राठी विकेट लेने के अपने सेलिब्रेशन के चलते भी सुर्खियों में रहे थे.

दिग्वेश राठी 2025 सीजन के जरिए पहली बार आईपीएल का हिस्सा बने थे. उन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने 30 लाख रुपये की बेस प्राइस पर लिया था. दिग्वेश राठी ने अच्छा खेल दिखाया और 13 मैच में 8.25 की इकॉनमी के साथ 14 विकेट लिए थे. इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने लखनऊ की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की कर ली थी. उनका प्रदर्शन रवि बिश्नोई जैसे स्थापित स्पिनर पर भी भारी पड़ा था. कमाल का प्रदर्शन करने के बाद भी दिग्वेश लखनऊ के साथ बने रहे. उन्होंने इस टीम का साथ नहीं छोड़ने का फैसला किया.

दिग्वेश ने लखनऊ के साथ ही बने रहने और ऑक्शन में नहीं जाने का कारण बताया. उन्होंने ईएसपीएनक्रिकइंफो से बात करते हुए कहा, 'मैं पिछले दो सीजन से छह या सात टीमों के लिए ट्रायल दे रहा था. वे ट्रायल अच्छे गए थे. लेकिन किसी ने मुझे आईपीएल 2023 या 2024 में नहीं लिया. सच कहूं तो उन सालों में मेरा नाम तक ऑक्शन में नहीं आया. जिस टीम ने मुझे खरीदा उसे जाकर मैं यह नहीं कह सकता कि मैं अब आपके लिए नहीं खेलूंगा. मेरे बुरे दिनों में एलएसजी साथ थी इसलिए मेरे अच्छे दिनों में भी मैं उनके साथ रहूंगा. इस वजह से मेरे दिमाग में कभी यह बात नहीं आई कि मैं छोड़ दूं या ऑक्शन में चला जाऊं. फिर भले ही मेरी कीमत 30 लाख रुपये रहे.'

दिग्वेश राठी ने बताया कैसे खुद को IPL लायक बनाया

 

दिग्वेश ने कहा कि दिल्ली के मैदानों पर खेल-खेलकर वे आईपीएल के लिए तैयार हो गए थे. उन्होंने कहा, 'मैंने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि दिल्ली के लड़कों को हारना पसंद नहीं है. मैं आईपीएल की कठोरता के लिए फौरन तैयार हो गया क्योंकि मैं दिल्ली क्रिकेट की पृष्ठभूमि से आता हूं. दिल्ली के मैदान बड़े नहीं हैं और आईपीएल के सबसे खतरनाक बल्लेबाज दिल्ली से आते हैं. इसलिए जब मैंने खेलना शुरू किया तो वे बल्लेबाज हमारी काफी पिटाई किया करते थे. 40 ओवर में ही 400-500 रन बन जाते थे. इसलिए जब किसी गेंदबाज को छक्का लगता है तो वह नेट्स में जाकर पहले से ज्यादा मेहनत करता है. मेरी भी यही कहानी रही है. इसलिए जब कोई बैकग्राउंड में कड़ी मेहनत करता है तो डर के बजाए जीतने की मानसिकता खुद ब खुद आ जाती है.'

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