भारतीय पुरुष क्रिकेटर विदेशी टी20 लीग्स में नहीं खेलते हैं. आईपीएल के अलावा किसी दूसरी लीग में वे तभी हिस्सा ले पाते हैं जब रिटायर हो जाते हैं. यही वजह है कि ऑस्ट्र्लेयि की बिग बैश लीग, साउथ अफ्रीका की SA20, अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट और इंग्लैंड की दी हंड्रेड में अभी तक भारत का कोई भी सक्रिय खिलाड़ी नहीं खेला है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) उन्हें विदेशी टी20 लीग्स में खेलने की अनुमति नहीं देता है. पर ऐसा क्यों है और किस वजह से बीसीसीआई यह फैसला करता है.
आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के बाहरी टी20 लीग में नहीं खेलने के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए कहा, इसकी वजह यह है कि भारत में ही काफी क्रिकेट होता है. फिर समय की बात आ जाती है. अगर एक भारतीय खिलाड़ी सभी फॉर्मेट और टूर्नामेंट खेलने वाला है तो उसके पास दूसरी लीग में खेलने का समय कहां पर है.
टीम इंडिया से बाहर खिलाड़ी क्यों विदेशों में नहीं खेलने जाते?
धूमल से पूछा गया कि जो खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं उन्हें विदेश में मौके मिल सकते हैं. क्या उन्हें बाहर खेलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. इस बारे में आईपीएल चेयरमैन ने कहा, उनके लिए भी भारत में घरेलू क्रिकेट में काफी मुकाबले हैं. बीसीसीआई की प्रतियोगिताओं और स्टेट लीग के अलावा खिलाड़ी दूसरी एक्टिविटी में सक्रिय होते हैं. बीसीसीआई टूर्नामेंट के बाद स्टेट लीग होती है. इन टूर्नामेंट के जरिए खिलाड़ियों को आईपीएल के लिए स्काउट किया जाता है.
भारतीय महिला क्रिकेटर्स खेलती हैं विदेशी टी20 लीग
भारतीय खिलाड़ियों में दिनेश कार्तिक, हरभजन सिंह, अंबाती रायडू, सुरेश रैना, शिखर धवन, यूसुफ पठान ऐसे रहे हैं जिन्होंने विदेशी टी20 लीग्स में हिस्सा लिया है. लेकिन ये सभी भारतीय क्रिकेट और आईपीएल से रिटायर होने के बाद बाहर टी20 खेलने गए हैं. हालांकि भारतीय महिला क्रिकेटर को विदेशी टी20 लीग में खेलने की अनुमति मिलती है. अभी तक हरमनप्रीत कौर, स्मृति मांधना, शिखा पांडे, जेमिमा रॉड्रिग्स, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष जैसी क्रिकेटर्स इंग्लैंड की दी हंड्रेड, ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और वेस्ट इंडीज की कैरेबियन प्रीमियर लीग में खेली हैं.ॉ

