बांग्लादेश हाई कोर्ट ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को महिला क्रिकेटरों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई न करने के लिए फटकार लगाई. द डेली स्टार के अनुसार सबरीना सुल्ताना की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने BCB से पूछा कि उसे 'गैर-कानूनी, बिना कानूनी अधिकार के और जनहित के खिलाफ' क्यों घोषित नहीं किया जाना चाहिए.
बिचौलियों का इस्तेमाल
आलम ने कई अधिकारियों के नाम बताए और आरोप लगाया कि उन्होंने उनसे संपर्क करने के लिए बिचौलियों का इस्तेमाल किया और जब उसने उन्हें नजरअंदाज़ किया तो उन्हे अपमानित किया गया. उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया. जहानारा ने यह मामला बोर्ड के सामने उठाया था और कई बार सीनियर अधिकारियों को बताया था, लेकिन सिर्फ़ कुछ समय के लिए राहत मिली.
जांच करने का वादा
BCB ने मामले की जांच करने का वादा किया और तीन लोगों की एक कमेटी बनाई, जिसे बाद में बढ़ाकर पांच कर दिया गया. हालांकि बोर्ड ने रिपोर्ट जमा करने की तारीख दो बार आगे बढ़ा दी. दो दिसंबर को, जब उसने कहा कि जहानारा ने कमेटी से लिखित शिकायत जमा करने के लिए कुछ समय मांगा है और फिर 21 दिसंबर को, जब उसने कहा कि कमेटी 31 जनवरी तक रिपोर्ट जमा कर देगी.
एंटी-सेक्सुअल हैरेसमेंट पॉलिसी लागू करने का आदेश
रिट याचिका के जवाब में हाई कोर्ट ने BCB से यह भी पूछा कि उसने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं या उठाएगा. इसके अलावा उसने बोर्ड को आदेश दिया कि जब तक नियम पेंडिंग है, तब तक वह अपने फैसले की गाइडलाइंस के अनुसार एंटी-सेक्सुअल हैरेसमेंट पॉलिसी लागू करें.क्रिकबज के अनुसार कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद BCB को इस मामले की जांच रिपोर्ट मिल गई थी. यह साफ नहीं था कि जांच के नतीजों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं. फिर भी BCB में पिछले कुछ महीनों से चल रही उथल पुथल में एक और परेशानी जुड़ गई है.

