रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ बड़ौदा के लिए खेलते हुए प्रियांशु मोलिया ने इतिहास रच दिया. वह 492 गेंदों पर 321 रन बनाकर नाबाद रहे. इसी के साथ मोलिया 21 साल 132 दिन की उम्र में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले सातवें सबसे युवा भारतीय बन गए हैं. वह तिहरा शतक लगाने वाले बड़ौदा के दूसरे बल्लेबाज भी बन गए. वह 1946-47 के फाइनल में होल्कर के खिलाफ गुल मोहम्मद के बनाए गए 319 रनों से आगे निकल गये. इसके अलावा वह रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले खिलाड़ी बन गए.
रणजी ट्रॉफी में गुजरात के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज
- 359- समित गोहेल
- 352- चेतेश्वर पुजारा
- 331- रवींद्र जडेजा
- 321- प्रियांशु मोलिया
वडोदरा के रिलायंस क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे मुकाबले में मोलिया ने 36 चौके और एक छक्का लगाया. पहले बल्लेबाजी करने उतरी बड़ौदा की टीम 169 ओवर में 616 रनों पर ऑल आउट हो गई और दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू-कश्मीर का स्कोर बिना किसी नुकसान के 6 रन था.
एक समय बड़ौदा का स्कोर 3 विकेट पर 63 रन था. इसके बाद मोलिया और महेश पिठिया (जिन्होंने 102 रन बनाए) ने सातवें विकेट के लिए 238 रनों की साझेदारी की. इस साझेदारी ने बड़ौदा को मुकाबले का रुख पलटने और जम्मू-कश्मीर को काफी दबाव में लाने में मदद की.
बड़ौदा की पहली पारी 616 रनों पर समाप्त
2024 में भारत के अंडर-19 सेटअप का हिस्सा रहे मोलिया ने बहुत संयम दिखाते हुए अपनी टीम को पहली पारी में एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. जहां मोलिया ने लंबी पारी खेलकर टीम को संभाले रखा, वहीं पिठिया ने मिले मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अपने फर्स्ट-क्लास करियर का पहला शतक जड़ा. डिफेंडिंग चैंपियंस के खिलाफ यह वापसी काफी अहम साबित हुई. बड़ौदा ने अपनी पहली पारी 616 रनों पर समाप्त की. उन्होंने पहले दिन 113 रन बनाए थे. मंगलवार सुबह मुख्य कोच आर प्रसन्ना के साथ हुई बातचीत ने आगे बढ़ते रहने की ज़रूरत को और मज़बूत कर दिया. कोच ने उनसे डटे रहने के लिए कहा कि और टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाने के लिए जितना हो सके उतना योगदान देने के लिए कहा. उनका लक्ष्य बल्लेबाजी जारी रखना था और धीरे-धीरे वह 300 के स्कोर तक पहुंच गए.
राजकोट से वडोदरा
बड़ौदा के इस युवा खिलाड़ी के लिए यह एक यादगार पल था. उनके इस सफर की शुरुआत कई साल पहले मोहिंदर अमरनाथ की अकादमी में हुई थी. उनके पिता सुरेश राजकोट से वडोदरा आ गए थे, ताकि उनका बेटा क्रिकेट को गंभीरता से आगे बढ़ा सके. मोहिंदर लाला अमरनाथ क्रिकेट अकादमी में मोलिया ने लगातार दो सीजन में 1,100 और 1,500 रन बनाए. रन बनाने के साथ ही मोलिया ने काफी कुछ सीखा भी.
मोहिंदर अमरनाथ की गाइडेंस
स्पोर्टस्टार के अनुसार मोलिया का कहना है कि अमरनाथ सर ने बहुत सहयोग किया. वे उनकी प्रैक्टिस में मदद करते थे और जब भी बड़ौदा आते, तो अकादमी जरूर जाते थे. उन्होंने उन्हें बल्लेबाजी करने के तरीके के बारे में मार्गदर्शन दिया और उनके करियर की शुरुआती दौर में वे उनके लिए बहुत बड़े मददगार साबित हुए. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि कोविड-19 की वजह से अकादमी बंद हो गई. 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के अहम सदस्य अमरनाथ से उन्हें जो सलाह मिली, वह बहुत सरल थी, लेकिन उसका उन पर गहरा असर पड़ा. उन्होंने मोलिया को कड़ी मेहनत जारी रखने, अपने खेल को बेहतर बनाने और अपने स्तर को ऊंचा उठाने की सलाह दी. मोलिया का मानना है कि सीनियर क्रिकेट के हिसाब से खुद को ढालना इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है. तीन साल पहले रणजी ट्रॉफी खेल चुके होने के कारण वह इस फॉर्मेट की जरूरतों से पूरी तरह अनजान नहीं थे.
बड़ौदा के बल्लेबाजों का प्रदर्शन
मोलिया और महेश पिठिया के अलावा बड़ौदा के किसी भी बल्लेबाज का पहली पारी में बल्ला नहीं चल पाया. उन दोनों के लिए रसीख सलाम ही तीसरे ऐसे बल्लेबाज रहे, जिन्होंने थोड़े बहुत रन बनाए. सलाम ने 47 रन बनाए. दीपक हुड्डा ने 45 रन बनाए. शिवालिक शर्मा ने 29 रन, ध्रुव पटेल ने 21 रन और कप्तान अतीत सेठ ने 20 रन बनाए. जम्मू-कश्मीर के गेंदबाज साहिल लोतरा ने कमाल की गेंदबाजी की. उन्होंने 39 ओवर में 4.10 की इकॉनमी से 160 रन पर चार विकेट लिए. उनके अलावा उमर नजीर और वंशज शर्मा को दो-दो सफलता मिली. डिफेंडिंग चैंपियन जम्मू-कश्मीर को अगर मुकाबले में वापसी करनी है तो एक बड़ी पार्टनरशिप करने की जरूरत है.
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