भारत की टेस्ट और वनडे टीम का अहम हिस्सा बन चुके केएल राहुल ने अपने करियर को लेकर विस्फोटक बयान दिया है. उनका मानना है कि रिटायरमेंट का फैसला ज्यादा मुश्किल नहीं होने वाला है है. साल 2014 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ऑस्ट्रेलिया में अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज करने वाले राहुल को वनडे मिडिल-ऑर्डर में एक स्थिर भूमिका में नई जान मिली है और 2023 में पिछले वर्ल्ड कप के बाद से वह इस फॉर्मेट में सबसे भरोसेमंद नंबर 5 बल्लेबाजों में से एक बनकर उभरे हैं. वह दुनिया के इकलौते ऐसे नंबर 5 बल्लेबाज हैं जिनका इस दौरान इस फॉर्मेट में 60 से ज़्यादा का औसत और लगभग 100 से ज़्यादा का स्ट्राइक रेट है. 33 की उम्र में वह वनडे में और बेहतर हो रहे हैं. राहुल भारत के पहले पसंदीदा टेस्ट ओपनर बने हुए हैं.
मानसिक पहलू के बारे में भी बात
राहुल ने अपने करियर में कई चोटों से जूझने के मानसिक पहलू के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा हुआ है जब मैं चोटिल था और मैं कई बार चोटिल हुआ हूं और यह सबसे मुश्किल लड़ाई है जिसका आपको सामना करना पड़ता है. यह वह दर्द नहीं है जो फिजियो या सर्जन आपको देते हैं. यह मानसिक लड़ाई है जहां आपका दिमाग हार मान लेता है. आप जानते हैं, जब ऐसा कई बार होता है तो आपका दिमाग कहता है, तुमने काफी कर लिया है. तुम काफी भाग्यशाली रहे हो कि क्रिकेट ने तुम्हें काफी पैसे दिए हैं. तुम अगले कितने भी सालों तक ज़िंदा रह सकते हो.
जिंदगी में और भी जरूरी चीजें
राहुल ने कहा कि वह खुद को नेशनल टीम के लिए बहुत जरूरी नहीं मानते, जिससे भविष्य में रिटायरमेंट का फैसला लेना आसान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि बस छोड़ दो. जो कुछ तुम्हारे पास है, उसका आनंद लो और तुम्हारा परिवार है, बस वही करो. यह सबसे मुश्किल लड़ाई है. इसलिए मैं खुद से कहता हूं कि मैं उतना जरूरी नहीं हूं. हमारे देश में क्रिकेट चलता रहेगा. दुनिया में क्रिकेट चलता रहेगा. जिंदगी में और भी जरूरी चीजें हैं और मुझे लगता है कि यह सोच मेरे पास हमेशा से थी, लेकिन जब से मेरा बच्चा हुआ है, तब से आप जानते हैं, ज़िंदगी को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया है. तो हां, मैं ऐसा ही हूं. न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खत्म होने के बाद अब राहुल गुरुवार को मोहाली में पंजाब के खिलाफ कर्नाटक के लिए रणजी ट्रॉफी मैच खेलेंगे.

