भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि 'द हंड्रेड' ऑक्शन में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को साइन करने के लिए सनराइजर्स लीड्स को जिस तरह की आलोचना का सामना करना पड़ा है, वह समझ में आने वाली बात है. काव्या मारन की सह-मालिकाना हक वाली टीम सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को लगभग 2.3 करोड़ रुपये में साइन किया था. हालांकि इस फैसले को सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा. लोगों ने SRL पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल पहलगाम में जो कुछ भी हुआ था, उसके बावजूद उन्होंने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को क्यों चुना.
गोला-बारूद खरीदती पाक सरकार
मिड-डे के लिए लिखे अपने कॉलम में गावस्कर ने कहा कि हंड्रेड (The Hundred) टूर्नामेंट में एक फ्रेंचाइज के भारतीय मालिक एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को टीम में शामिल किए जाने पर जो हंगामा मचा है, वह कोई हैरानी की बात नहीं है. नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद से ही भारतीय फ्रेंचाइज मालिकों ने IPL के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है. भले ही यह बात देर से समझ में आई हो, लेकिन अब यह एहसास हो गया है कि वे पाकिस्तानी खिलाड़ी को जो फीस देते हैं और वह खिलाड़ी उस पैसे पर अपनी सरकार को इनकम टैक्स देते हैं, जिससे वह सरकार हथियार और गोला-बारूद खरीदती है. वह अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत का कारण बनती है. इसी वजह से भारतीय संस्थाएं अब पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने के बारे में सोचना भी छोड़ चुकी हैं.
अबरार अहमद को खरीदे जाने के कुछ ही घंटों बाद SRL का X हैंडल डीएक्टिवेट कर दिया गया था और आलोचनाओं का सैलाब थमने के बाद ही उसे वापस चालू किया गया. यह बात और भी ज़्यादा हैरान करने वाली थी जब कोच डेनियल विटोरी ने बताया कि पाकिस्तान के एक और स्पिनर उस्मान तारिक पर भी उनकी नजर थी.

