इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में 2023 में 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम का डेब्यू हुआ था और उसके बाद से ही इन नियम काफी आलोचना हो रही है. कप्तान और कोचेज भी इस नियम की आलोचना कर चुके हैं. इसकी कमी बता चुके हैं. डेब्यू के बाद से ही इस पर काफी बहस होती रही है. इसके बावजूद 2027 सीज़न में भी इस नियम के लागू रहने की संभावना है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अगस्त में सभी 10 फ्रेंचाइज से इस नियम पर उनकी राय मांगी थी. हालांकि चूंकि टीमें पहले से ही आने वाले मिनी-ऑक्शन के लिए अपनी रणनीतियां तैयार कर रही हैं, इसलिए इस दौर में इस नियम को हटाने से फ्रेंचाइज के लिए काफी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इम्पैक्ट प्लेयर नियम के कम से कम एक और सीजन तक जारी रहने की उम्मीद है. अगले सीजन अगले साल होने वाले मेगा-ऑक्शन साइकिल से पहले का आखिरी सीजन होगा.
स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करना मुश्किल
मिनी ऑक्शन में टीम के स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करना मुश्किल होता है. पिछले साल हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण रोहित शर्मा पांच मैच नहीं खेल पाए थे. इम्पैक्ट प्लेयर नियम की मदद से वे केवल एक बल्लेबाज के तौर पर वापसी कर सके. चेन्नई सुपर किंग्स के लिए चोट की वजह से एमएस धोनी सीजन में भी एक भी मैच नहीं खेल पाए, लेकिन 'इम्पैक्ट प्लेयर' के रूप में उनकी संभावित वापसी ने पूरे 2026 सीज़न के दौरान लोगों में काफी दिलचस्पी जगाए रखी. अगर यह नियम ना होता, तो पूरी तरह फिट ना होने वाले स्टार खिलाड़ियों के खेलने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती.
कितना बढ़ा 2023 से पहले और बाद में स्कोरिंग रेट?
हालांकि इम्पैक्ट प्लेयर नियम से रणनीतिक स्तर पर कोई खास नयापन नहीं आया है, लेकिन इसने स्कोरिंग रेट को काफी बढ़ा दिया है, क्योंकि बल्लेबाजों को खुलकर आक्रमण करने की एक अतिरिक्त छूट मिल गई है. 2022 तक IPL के पहले 15 सीजन में केवल 133 बार टीमों ने 200 से ज़्यादा रन बनाए थे. 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम लागू होने के बाद 2023 से लेकर अब तक के चार सीज़न में यह आंकड़ा बढ़कर 195 तक पहुंच गया है. स्कोरिंग रेट 2008 में 7.48 से बढ़कर 2022 में 8.54 हो गया था. IPL 2026 में यह 9.85 रन प्रति ओवर था.
इम्पैक्ट प्लेयर नियम की आलोचना क्यों हो रही है?
IPL 2023 में लागू किए गए इस नियम के तहत टीमें मैच के दौरान एक सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी को मैदान पर उतार सकती हैं, जिससे उन्हें रणनीति बनाने में अतिरिक्त लचीलापन मिलता है. हालांकि खिलाड़ियों, कोचेज और क्रिकेट स्पेशलिस्ट के बीच इस नियम को लेकर अलग-अलग राय है. खिलाड़ियों की ओर से अक्सर यह शिकायत आती रही है कि इस नियम की वजह से गेंदबाजों के पास बहुत कम विकल्प रह गए हैं और ऑलराउंडर्स का विकास भी रुक गया है. भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली पहले भी इस नियम को लेकर अपनी चिंताएं जता चुके हैं. खासकर ऑलराउंडर्स पर इसके असर और बल्ले और गेंद के बीच संतुलन को लेकर वे चिंताएं जता चुके हैं. रोहित इस नियम के बहुत बड़े फैन नहीं हैं.
शुभमन गिल: गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल भी इस नियम के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि यह नियम क्रिकेट स्किल को खत्म कर देता है और इस फॉर्मेट को एकतरफा बना देता है.
अक्षर पटेल: दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल को भी यह नियम पसंद नहीं है. उनका मानना है कि इससे क्रिकेट में असली ऑलराउंडरों की भूमिका और अहमियत को नुकसान पहुंचता है.
सचिन तेंदुलकर: भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने भी इम्पैक्ट प्लेयर नियम को खत्म करने की मांग की है. उनका तर्क है कि यह नियम बल्लेबाजों को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाता है और गेंदबाजों के खिलाफ एक अनुचित असंतुलन पैदा करता है.
दो साल पहले BCCI और IPL की दस टीमों के मालिकों के बीच हुई बैठक में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के सह-मालिक पार्थ जिंदल ने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर चर्चा की थी. वह चाहते हैं कि 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम को खत्म कर दिया जाए. जिंदल भी इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर रोहित के नजरिए से सहमत थे.



