संजू सैमसन ने कैसे वर्ल्ड कप के बीच हासिल की फॉर्म, खुलासा करते हुए बोले - मैं प्लेयर्स से लड़ रहा था कि...

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर संजू सैमसन ने की शिरकत (Photo: ITG)
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर संजू सैमसन ने की शिरकत (Photo: ITG)

Story Highlights:

संजू सैमसन को शुरुआत में टीम की प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला

संजू ने तीन मैचों में 97, 89 और 89 रन की पारियां खेलीं

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत में संजू सैमसन को टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया था. संजू की जगह इशान किशन को चुना गया और उन्हें ओपनिंग में आजमाया गया. हालांकि इशान और अभिषेक की जोड़ी हिट नहीं रही. वर्ल्ड कप जीतने के लिए जब भारत को चार मैचों में लगातार जीत दर्ज करनी थी, तभी संजू सैमसन ने तीन मैचों में 97, 89 और 89 रन की पारियां खेलकर ट्रॉफी भारत की झोली में डाल दी. अब संजू ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि कैसे माइंडसेट में बदलाव करने से उनकी बल्लेबाजी पर असर पड़ा.

वर्ल्ड कप के लिए मैं बहुत ज्यादा उत्साहित था और न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान मैं कुछ ज्यादा करने की कोशिश कर रहा था. मैं टीम के खिलाड़ियों से लड़ रहा था कि मैं यह कर दूंगा और मैं वह कर दूंगा. इसलिए मैं बहुत ज्यादा पंप-अप था. क्योंकि मेरा नेचर ऐसा है कि मैं अपने लिए बेहतर करने से ज्यादा दूसरों के लिए बेहतर करना चाहता हूं. इसलिए उस सीरीज में मैं अपने साथियों से कह रहा था कि नहीं-नहीं, मैं खेलूंगा. लेकिन बाद में मुझे एहसास हुआ कि क्या टीम को मेरी जरूरत है.

संजू को माइंडसेट बदलने से मिला फायदा

संजू सैमसन ने आगे कहा,

जब जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच आया तो स्थिति यह थी कि अगर वर्ल्ड कप जीतना है तो चारों मैच जीतने होंगे. उस समय लगा कि अब मुझे टीम के लिए करके दिखाना है, क्योंकि टीम को मेरी जरूरत है. उससे पहले मैं पूरी तरह टूट चुका था कि मुझे वर्ल्ड कप खेलना है और टीम को जिताना है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि आप किसी के लिए क्या कर सकते हैं और लोग आपसे क्या चाहते हैं. इसी बदलाव के बाद मुझे लगा कि अब टीम को मुझसे कुछ चाहिए तो मुझे करके दिखाना है. पांच से छह दिन बाद मैंने खुद पर काम किया और खुद को तैयार किया, जिसके बाद नतीजा मिला.

संजू ने दिलाई भारत को ट्रॉफी

संजू सैमसन टीम इंडिया की शुरुआती प्लेइंग इलेवन में नहीं थे. लेकिन अभिषेक शर्मा लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए और इशान किशन के साथ ओपनिंग जोड़ी भी सफल नहीं रही. ऐसे में करो या मरो के मुकाबलों में संजू सैमसन को मौका मिला.

संजू ने अंतिम चार मैच भारत के लिए खेले और चारों में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे टीम इंडिया वर्ल्ड चैंपियन बन गई. संजू सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में 5 मैचों में 321 रन बनाए और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया.