नई दिल्ली। उम्मीद...एक ऐसा शब्द जिसके बिना हर मैच और उसकी हर पारी अधूरी है. इसका जीता जागता सबूत एशेज के चौथे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच सिडनी टेस्ट के आखिरी दिन देखने को मिला. ऑस्ट्रेलिया को क्लीन स्वीप और इतिहास बनाने के लिए विकेटों की जरूरत थी तो वहीं मैच बचाने के लिए इंग्लैंड के बल्लेबाजों को क्रीज पर खड़ा होना था. डग आउट में बैठे इंग्लैंड के खिलाड़ी भावना उजागर करने से बस कुछ गेंद दूर थे तो वहीं ऑस्ट्रेलियाई दर्शक जश्न में डूबने के लिए तैयार हो चुके थे. लेकिन इन सबके बीच निचले क्रम में बल्लेबाजी करने आए स्टुअर्ट ब्रॉड और जैक लीच की जोड़ी आ गई. दोनों बल्लेबाजों ने यहां ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और फैंस की उम्मीदों पर पारी फेर दिया तो वहीं बाकी का बचा काम जेम्स एंडरसन ने किया.
क्लीन स्वीप होने से बचा इंग्लैंड, 2 ओवरों तक जमे अंग्रेज
लीच के आउट होने के बाद इंग्लैंड को दिन की अभी 12 गेंदे और खेलनी थी. मैदान पर रोशनी कम होने लगी थी, अंपायर ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को इशारा कर कहा कि, अब सिर्फ स्पिनर्स ही गेंदबाजी कर सकते हैं. ऐसे में स्पिनर नाथन लॉयन यहां 100वां ओवर डालने आए जिसे ब्रॉड ने बिना किसी रन के आसानी से खेल लिया और ऑस्ट्रेलिया को विकेट लेने नहीं दिया जबकि अगली 6 गेंदे क्रीज पार आए जेम एंडरसन ने खेलते हुए विकेट नहीं गिरने दिया. जिससे सिडनी का अंतिम टेस्ट मैच रोमांचक मोड़ पर ड्रॉ हो गया. ब्रॉड 35 गेंद का सामना करके 8 रन बनाकर जबकि एंडरसन 6 गेंद में बिना खाता खोले वापस आए. इस तरह ब्रॉड और लीच ने अंत में इंग्लैंड की साख बचाते हुए उसे हार से बचा लिया. सिडनी टेस्ट को अगर इंग्लैंड कभी याद करेगा तो इसमें लीच, ब्रॉड और एंडरसन का नाम जरूर शामिल किया जाएगा.

