ब्रिस्बेन. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज का रोमांच प्रशंसकों के लिए हर बार नई सौगात लेकर आता है. इस ऐतिहासिक सीरीज में हमेशा दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलती है. लेकिन जब खराब अंपायरिंग इस टक्कर का मजा किरकिरा कर दे तो फैंस को भी निराशा होती है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मौजूदा एशेज सीरीज का पहला टेस्ट ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला जा रहा है, जिसमें खराब अंपायरिंग की सारी हदें पार कर दी गई हैं. खासकर नोबॉल को लेकर, जिसे मैदानी अंपायर लगातार नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं. ऐसा ही एक वाकया तब हुआ जब इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स की पांव की नोबॉल के चलते मेहमान टीम को ऑस्ट्रेलियाई ओपनर डेविड वॉर्नर का कीमती विकेट नहीं मिल पाया. हालांकि इस दौरान एशेज में ‘टेक्नोलोजी’ से जुड़ी समस्या भी उजागर हो गई. वो इसलिए क्योंकि टीवी अंपायर तकनीकी खराबी के चलते रीप्ले की समीक्षा नहीं कर पा रहे थे ऐसे में नोबॉल देखने की जिम्मेदारी मैदानी अंपायर को दी गई.
स्टोक्स ने लगाई नोबॉल की झड़ी
दरअसल, बेन स्टोक्स ने मार्च के बाद जब अपना पहला ओवर किया तो उसके तुरंत बाद ही डेविड वॉर्नर को यह जीवनदान मिला जो तब 17 रन पर खेल रहे थे. इससे यह भी पता चला कि स्टोक्स ने अपनी पिछली तीन गेंदों पर भी क्रीज से आगे पांव रखा था लेकिन अंपायर ने उसे नोबॉल नहीं दिया था. हद तो तब हो गई जब बाद में ऑस्ट्रेलिया के एशेज प्रसारक चैनल 7 ने खुलासा किया कि स्टोक्स ने मैच के दूसरे दिन गुरुवार को 14 बार अपना पांव क्रीज से आगे रखा था लेकिन केवल दो बार ही नोबॉल दी गई.
रिकी पोंटिंग ने की खराब अंपायरिंग की आलोचना
बेन स्टोक्स की गेंद पर डेविड वॉर्नर को भी पहले आउट दे दिया गया था लेकिन रीप्ले से नोबॉल का पता लगने के बाद अंपायर को अपना फैसला बदलना पड़ा. इससे मैच अधिकारियों को लेकर बड़ी समस्या भी उजागर हो गई. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि गाबा में टेक्नोलॉजी से जुड़ी समस्या का मतलब है कि तीसरे अंपायर पॉल विल्सन यह पता करने के लिए कि गेंदबाज ने क्रीज से आगे पांव रखा है, प्रत्येक गेंद के रीप्ले की समीक्षा नहीं कर सकते. इसका मतलब है कि मैदानी अंपायरों को ही इस पर फैसला करना होगा. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने मैच की कमेंट्री के दौरान इस तरह की खराब अंपायरिंग की आलोचना की. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इस व्यवस्था को लागू किया जिसमें तीसरे अंपायर को नोबॉल की जांच करने की अनुमति दी गई. पिछले साल नियमों में बदलाव से पहले मैदानी अंपायर ही क्रीज से आगे पांव रखने पर गेंदबाज को सूचित करके नोबॉल देते थेे.

