भारतीय मूल के खिलाड़ी तहसीन मोहम्मद जमशेद ने कतर की फीफा वर्ल्ड कप 2026 के स्क्वॉड में शामिल होकर इतिहास रच दिया. स्पेनिश कोच जुलेन लोपेटेगुई ने एशियाई चैंपियनों के मुख्य खिलाड़ियों पर आधारित टीम का ऐलान किया, तो उसमें तहसीन को भी जगह मिली. इसी के साथ वह फीफा वर्ल्ड कप का हिस्सा बनने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बन गए हैं.
सब कुछ छोड़ दोहा चला गया था परिवार
कालीकट के रहने वाले जमशेद थचनकंडी 1996 में अपनी पत्नी शाइमा के साथ दोहा चले गए थे. वहां वे अपना लकड़ी का कारोबार और चोट के कारण बीच में ही खत्म हुए फुटबॉल करियर पीछे छोड़ गए थे. कतर में शुक्रवार को छुट्टी होती है. जमशेद अपनी छुट्टियां दोस्तों और सहकर्मियों के साथ स्थानीय स्टेडियमों में बिताते थे और उनका छोटा बेटा भी उनके साथ जाता था. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जमशेद याद करते हुए बताते हैं कि उनका बेटा डग-आउट एरिया के पास बैठा करता था. बाद में वह उनये और उनके दोस्तों से उसके साथ ड्रिबल करने और फुटबॉल सिखाने के लिए कहता था. यही उनका पहला कदम था.
भारत के लिए खेलने का मौक़ा हाथ से निकला
1992 में जमशेद को इंडिया यूथ फ़ुटबॉल कैंप के लिए चुना गया था, लेकिन वह नहीं गए. कालिकट यूनिवर्सिटी को सर आशुतोष मुखर्जी शील्ड के लिए उनकी ज़रूरत थी, उन्हें अपनी डिग्री पूरी करनी थी और अपनी ज़िंदगी बनानी थी. उन्होंने अपना फ़ैसला कर लिया था. वह उस दौर के केरल के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी पॉल एंचेरी के साथ भी खेले थे, मगर भारत के लिए खेलने का मौक़ा उनके हाथ से निकल गया.
तीस साल से भी ज़्यादा समय बाद जमशेद के 19 साल के बेटे को FIFA वर्ल्ड कप के लिए कतर की 26-सदस्यीय टीम में शामिल किया गया. 2006 में विकास धोरासू के फ़्रांस के लिए खेलने के बाद यह पहली बार है जब भारतीय मूल का कोई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेगा.


